19 फ़रवरी 2018

उसके प्रति अवमानना ​​और तिरस्कार दिखाओ

इच्छा अक्सर विरोधाभासी प्रभाव पैदा करती है: जितना अधिक आप किसी इंसान को   चाहते हैं, जितना अधिक आप उसका  पीछा करते हैं, और वो आपसे उतना ही दूर हो जाता है।  आप जितना अधिक उत्सुकता  दिखाते हैं, उतना ही वो आपको अपने से दूर ढकेल देता है।  इसका कारण यह है कि आपकी दिलचस्पी जरुरत से जादा  है- यह लोगों को अजीब और भयभीत महसूस करता है। अनियंत्रित इच्छा आपको कमजोर, अयोग्य, दयनीय बना देती  है।

आपको जरूरत है उस इंसान के प्रति बेरुखी दिखाने की,  उसके प्रति  अवमानना ​​और तिरस्कार दिखाओ। यह एक शक्तिशाली प्रतिक्रिया है जो उस इंसान को  को पागल बना देगा। वे अपने स्वयं की इच्छा से प्रतिक्रिया देंगे, जो आपके लिए बस एक प्रभाव पड़ेगा-   जो  शायद आप को घर कर जाये या कभी दुःख भी पहुंचाए।


Robert Greene (1998), The 48 laws of power, p. 305, Penguin Putman

प्यार और इच्छा की विरोधाभासी प्रकृति  से हमेशा मुझे डर लगता रहा  है. यदि संसार  एकदम सही और तर्कसंगत है , तो हम बिना किसी चालबाजी के सरलता से अपने प्रेम की  हमारी इच्छा को   व्यक्त कर सकते थे। लेकिन मुझे समझ में आया कि वास्तविक धरातल के सामने मेरा यह विचार बिलकुल अस्तित्वहीन है। लोगों को जैसे ही यह लगता है ये इंसान तो हमारे बस में है ही उनके बीच का प्रेम तुरंत ख़त्म हो जाता है ।

 मैंने देखा कि लोग उन लोगों की आकाँक्षा  करते हैं  जिन्होंने उन पर कोई दिलचस्पी नहीं दिखाई, जिससे उन लोगों की अनदेखी की गई, जब अपने  प्यार को उन्होने जाहिर  किया। कुछ ने तिरस्कार और तकलीफ दी । ज्यादातर लोग इस भयावह विरोधाभास को ही  की प्रेम के स्वभाव के रूप में व्यक्त करते हैं, जैसे कि प्रेम एक जादुई घटना है , बिना किसी वास्तविक आधार में।


इस ज्ञान ने मुझे  इंसानी आकर्षण के विषय  के प्रति मेरी  मूर्खता  और डार को दूर किया।

मैंने आकर्षण  पर रोबर्ट ग्रीनी की सलाह को तरजीह दिया   क्योंकि उन्होंने बहुत ही स्पष्ठता से इसके बारे में बताया है. इंसानी आकर्षण के विषय में उनकी सलाह  मनोविज्ञान के सत्यों पर आधारित है। 

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