26 फ़रवरी 2018

विज्ञान प्रकृति के उन हिस्सों के बारे में सच्चाई जानने का प्रयास है, जिन हिस्सों को जाना जा सकता है

विज्ञान क्या है? 


वास्तव में यह  एक बड़ा सवाल है जिसके बारे में मोटी मोटी किताबें हैं और जिसको पढ़ने में  मुझे बड़ी मुश्किल है। मेरे पास एक सरल जवाब है.  विज्ञान  प्रकृति के उन हिस्सों के बारे में सच्चाई जानने का प्रयास है, जिन हिस्सों को जाना जा सकता है । इसलिए, विज्ञान, नहीं जान सकने वाली चीज़ों के बारे में पता लगाने का साधन नहीं है   ,जैसे की  भगवान का अस्तित्व होने या नहीं होने पर निर्णय लेना  या किसी आत्मा के वजन को नापना।

यह बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है कि विज्ञान बेहद अभिमानी बन गया है - यह डार्विन के समय शुरू हुआ, लेकिन अब  इससे भी बदतर हो रहा है - और  कुछ वैज्ञानिक अक्सर अपनी बेवकूफियों के कारण इस गुमान में रहते हैं की उनको किसी भी विषय पर बोलने का विशेष अधिकार है और वो इस बात का हल्ला भी मचाते है।

उदाहरण के लिए, नेशनल एकेडमी ऑफ साइंसेज, यह  वैज्ञानिक सोच का एक महत्वपूर्ण मंच है ,जिसमें कुछ बहुत ही मज़ेदार पात्रों ने बैकडोर  के माध्यम से प्रवेश किया  है,  जो स्वयं को ज्ञान का वास्तविक स्वरुप मानते हैं।  लेकिन जब आप  जीवन भर अपने प्रयोग में  बुलबुला चैम्बर देखते हैं जहाँ  सीज़ियम क्लोराइड ग्रैडिएंट चल रहा है, तो आप एक विशेषज्ञ बबल या ग्रेडिएंट एनालिस्ट  बन सकते हैं, लेकिन आपके इस प्रकार बहुत अधिक ज्ञान प्राप्त करने की संभावना बहुत कम है। मज़ा ये है की  ऐसे लोग धीरे से  बहुत सुस्त साथियों में बदल जाएंगे, और वो जिन अन्य दस थकेले साथियों से प्रतियोगिता में है उनको भी थका देंगे।



 इरविन चारगाफ  ( Heraclitean Fire: Sketches from a Life Before Nature )

 PS :   इरविन चारगाफ  का DNA के डबल हेलिक्स मॉडल पर विषय  योगदान  है। 

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