19 फ़रवरी 2018

थ्योरी ऑफ़ माइंड - नैतिक और मेकियावेलियन कूटनीति



थ्योरी ऑफ़ माइंड - नैतिक और मेकियावेलियन कूटनीति : इस आलेख की प्रमुख बातें


एक रणनीति बनाने के लिए, आपको तीन चीजें जानना चाहिए। दूसरों की प्रकृति के बारे में जानें, अपने चारों और के सामाजिक परिदृश्य  की प्रकृति के बारें में , और अपनेखुद के  को  का पता करें। आपको सामान्य रूप से मानव स्वाभाव और उसकी  प्रकृति, और व्यक्तियों  की जटिलताओं को विस्तार से समझना होगा।

क्या होगा अगर मैं आपको बताना चाहूंगा कि मानवता को नैतिकता का आधार देने वाली  प्रदान करने वाली चीज वही है  है जो हमें लोगों को अंधेरे में रखने , हेरफेर करने और दूसरों को धोखा देने की अनुमति देती है? यह अच्छाई सीधे बुराई के साथ जुड़े हुई  हैं?

आइए हम एक स्तिथि की कल्पना करते है. आप अपने दोस्त के पैसे को चोरी करने का विचार करते है। आपको दोस्त की स्तिथि पता है।   यदि आपके साथ चोरी होती तो आप अपने गुस्से और हताशा की कल्पना कर सकते हैं इसलिए  आपको अपने दोस्त की प्रति सहानुभूति महसूस हुई।आप अपने दोस्तों के इन भावनाओं को महसूस करते हैं जैसे कि आप स्वयं शिकार थे। आप किसी से चोरी नहीं करना चाहते हैं,  ऐसा  इसलिए आप दूसरों के साथ नहीं करते हैं क्यूंकि  आप खुद को अनुभव नहीं करना चाहते हैं। आपकी सहानुभूति आपकी नैतिकता का आधार है.





लेकिन अब एक और जटिल स्थिथी  की कल्पना करें जहां आप सहानुभूति महसूस नहीं करते हैं। कल्पना कीजिए कि आप उस पैसे को चोरी कर सकते हैं लेकिन किसी दूसरे व्यक्ति पर उसे दोष दे सकते हैं। आप जानते हैं कि आपके शिकार ( प्रीत  ) आपको भरोसा दिलाते हैं और चोरी करने की आपकी इच्छा से अवगत नहीं हैं। प्रीत की दोस्ती  एकांत से है जिसकी चोरी करने की आदत है और वह कई बार पकड़ा जा चूका है। अगर प्रीत के पैसे की चोरी आप कर लें तो आप यह जानेंगे की प्रीत चोरी के लिए एकांत को दोषी ठहराएगा। एकांत अपनी मासूमियत  समझयेगा पर प्रीत उस पर यकीं   नहीं करेगा

 आप प्रीत  के विचारों और विश्वासघात के भविष्य के कृत्य की संभावित प्रतिक्रिया पर विचार करने में सक्षम थे। आपको कुछ दोष लग सकता है, लेकिन आप अपने व्यक्तिगत लाभ के लिए अपने धोखे में प्रीत  और एकांत  दोनों को धोखा देने के लिए पूरी तरह से तैयार हैं.

आपने पहली स्थिति में नैतिक रूप से काम किया और दूसरे में घृणित किया। लेकिन दोनों स्थितियों में आम तत्व क्या था?

किसी अन्य व्यक्ति की भावनाओं और विचारों की कल्पना करने की आपकी क्षमता यह" मन की सिद्धांत " THEORY OF  MIND  जाता है।

यह कारक हमारे पूर्वज प्राइमेट आदि मानव यहाँ तक की चिंपांजी में भी देखने मिलता है।



विकासवादी मनोवैज्ञानिकों  ने सभ्यता और मानव प्रकृति विकास का आधार मिरर न्यूरॉन को बताया है।  मिरर न्यूरॉन्स हमें स्वयं का सामना किए बिना किसी अन्य व्यक्ति की भावनाओं, विचारों और भावनाओं की कल्पना करने की क्षमता देते हैं।





फ्रांज डी वाल ने पहली बार अपनी पुस्तक  "  चिंपांज़ी राजनीति ''Chimpanzee Politics  "   में  "मेकियावेलियन बुद्धि" 'machiavellian intelligence' नामक कांसेप्ट  का प्रयोग किया था।  इससे प्राइमेट की  व्यक्तिगत लाभ के लिए धोखा देने की क्षमता की व्याख्या  होती है। 



उन्होने  हालिया किताब प्राइमेट्स एंड फिलोसोफर्स में, उन्होंने यह भी बताया कि कैसे नैतिकता और सहानुभूति भी मानव और प्राइमेट प्रकृति के निहित भागों हैं।



To construct a strategy, you need to know three things. Know the nature of others, know the nature of your environment, and know the nature of yourself. You need to understand human nature in general, and individuals in detail.



You acted morally in the first situation and despicable in the second. But what was the common element in both scenarios?

Your ability to imagine the feelings and thoughts of another person. It is an ability called theory of mind.

In the first scenario, you felt empathy for the victim and refrained from stealing. In the second, you could predict the thoughts and possible reactions of your victims and use that to deceive them for your personal gain. This ability comes from you being able to construct a “theory of mind”, and this ability may come from the mirror neurons in your brain.

Evolutionary psychologists point to mirror neurons as the basis for civilisation and human nature. Mirror neurons allow us to imagine the feelings, thoughts and emotions of another person without experiencing it ourselves. If we see another person performing an action, the same parts of the brain required for that action will light up in our person’s brain (performing that action) and our brain (only watching that action). This may be fundamental in learning skills and languages, but it also may also enable us to empathise with others. If we see another person being physically assaulted, we can feel the fear and pain of the assaultee, even though we ourselves are not being beaten. Empathy leads to morality. We do not hurt others if we understand the pain that this will cause them. We ourselves do not want to experience that pain, so we treat others like we want to be treated. This, we hope, will lead others to treat us well in return.

How can this wonderful ability lead to manipulation and deception? Franz de Waal first used the term machiavellian intelligence in his book Chimpanzee Politics to describe the ability of primates to deceive for personal gain. Chimpanzess share our ability to maintain complex social exchanges based on their ability to learn skills from others and to predict the actions of others. They can also make alliances and then break them, deceive other chimps of their intentions. In his recent book Primates and Philosophers, he also explains how morality and empathy are also inherent parts of human and primate nature.

Evolutionary biologists claim that our primate ancestors have the same mirror neurons as we do. We have evolved to even more complex forms of civilisation, but we still share the inherent animal characteristics that definen our human nature. The need for social interaction, moral guidance, and the ability to deceive are inherent characteristics of our human nature, based on our theory of mind abilities.

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