28 अप्रैल 2017

गुरूवार सत्संग

गुरूवार सत्संग


आज जैसे ही मैं स्वामी जी के कमरे में पहुँचा तो पाया की सूरज स्वामी जी की सेवा जतन में लगा हुआ है .स्वामी जी बीमारी और उम्र के कारण अशक्त हो गये है .ज़्यादातर मौक़ों में वे बिलकुल नहीं बोलते .शिष्यों से वह ज़रूर बातें करेंगे यह सोचकर मैंने प्रणाम करके बातें शुरू की .एनर्जी की बात चल निकली .हम सभी के जीवन की कई बातों का उल्लेख हुआ .

"पाज़ीटिव  और नेगेटिव दो ही चीजें रहती है। जहाँ दुख ,कलह ,विषाद ,नैराश्य बहुत जादा दिखाई दे समझ जाना की नेगेटिव एनर्जी है।" स्वामी जी ने कहा .

" पॉजिटिव एनर्जी बढ़ाने के क्या उपाय हैगप्पु ने पूछा.

"मैंने तुम लोगों को शुरुवात में सत्संग के लिए प्रेरित किया। यह स्वयं में बहुत महत्वपूर्ण ध्यान विधि है। उसके बाद तुम लोगों को धीरे धीरे मंत्र जाप और पूजा के लिए बताया।इसके बाद  हवन के लिये प्रेरित किया . यह पॉज़िटिव एनर्जी को बढ़ाने की  बहुत शक्तिशाली विधी है "गुरूदेव ने कहा .
"हमारी एनर्जी के लेवल की क्या स्थिति है "सूरज ने पूछा .
"तुम लोगों की स्थिति बहुत अच्छी हो गई है विशेषकर हवन शुरू करने के बाद " स्वामी जी ने कहा .
कुछ देर में अंतरंगता और पारलौकिकता का संदर्भ आया तो स्वामी जी ने कहा " मेरा बहुत आसानी से भगवान श्री से संपर्क हो जाता है , इतने बीमार होने के बावजूद तुम लोगों के यंत्री की  पूजा मैं बिना नागा किये करता हूँ . मैं सूक्ष्म रूप से तुम्हारे हवन में उपस्थित होता हूँ . "


मैंने भाव के बारे में पूछा 
"भावदशा का बहुत महत्व है . इसे नकारना  मत . ये बहुत महत्वपूर्ण है " गुरूदेव ने कहा 


आज गुरूदेव से और भी बहुत सी बातें हुई . इसके बाद हम लोग उपर कक्ष में मंत्र जाप पूजा के लिये चले गये