2 मई 2017

भाव और भावुकता में अंतर है

"भाव के महत्त्व को कभी भी कम मत आंकना। यह बहुत काम की चीज है। भक्तों को भाव के कारण बहुत से अनुभव होते है और वो वास्तविक होते है। रामकृष्ण परमहंस को काली का दर्शन होता था। वो वास्तविक था। प्रगाढ़ सानिध्य का भाव भक्ति की विशेषता है " गुरुदेव ने  पिछली मुलाकात में मुझसे कहा।

"मैं पहले भाव को मानसिक कमजोरी का प्रतिक मानता था पर आपने यह बात मुझे कई बार बोली है इसलिए अब मैं भाव की महत्ता को स्वीकारता हूँ।  दीक्षित जी ने कहा की मैय्या रानी खुद मुझे प्रेरणा देती है तो मुझे सहज ही यकीं हो गया। " मैने कहा।

भाव और भावुकता में बहुत अंतर है।  दरअसल भावुकता के तत्कालिक संवेदना है जबकि भाव दीर्घ कलिक सेवा और एकात्मता का परिणाम है। मानव स्वभाव में भक्ति ज्यादा आसान है इसलिए भाव की महत्ता और भी जादा है। ज्ञान मार्गी लोग इसे नहीं समझ सकते। चैतन्य महाप्रभु अपने समय के सबसे प्रकांड ज्ञानी और तर्क शास्त्री बन चुके थे पर जब  उन्होने भक्ति का आश्रय लिया तब जाकर उनके ह्रदय में शांति के उद्भव हुआ। 

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