2 मई 2017

तुम जब भी मुझे महसूस करना चाहोगे मेरी उपस्थिति महसूस होगी

"आपकी उपस्थिति में मुझे अभूतपूर्व आनंद महसूस होता है "  एक विदेशी सन्यासी ने दर्शन में भगवान श्री से कहा।
भगवान् श्री मुस्कुरा दिए।
" आपके सानिध्य में मैं आपकी उपस्थिति को महसूस करता हूँ। पर जब मैं घर जाऊंगा तब कैसा होगा। "
"तुम जब भी अपनी आंखे बंद करके मुझे महसूस करना चाहोगे मेरी उपस्थिति महसूस होगी। "भगवान् श्री ने उसे कहा.

दर्शन डायरी में इस संस्मरण को पढ़कर मुझे अपने साथ होने वाले अनुभव का ख्याल आया। 1999 से मैं गुरुदेव के साथ जुड़ा हुआ हूँ। शुरुवात के कुछ वर्षों में जब भी मुझे उनकी उपस्थिति का अहसास होता था तो मैं उसे अपने मन का विभ्रम समझता था। हालाँकि जब भी गुरुदेव से इस अनुभव की चर्चा करता तो उनका हमेशा जवाब होता " तुम्हारा अनुभव विभ्रम नहीं है। गुरु शिष्य में ऐसा होता है। यह एकात्मता के कारण होता है "

लगातार कई वर्षो तक यह जवाब सुनने के बाद मुझे बाद के वषों में ऐसे अनुभव में विभ्रम नहीं महसूस हुआ। अब मुझे जब भी प्रश्न होता है तुरंत जवाब मिल जाता है।

यह अनुभव मेरे लिए सुखद और तृप्त करने वाला है।

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