17 अप्रैल 2017

32 साल पहले मोरारी बापू की कथा देवेन्द्रनगर के गुजराती स्कूल में हुई थी

32 साल पहले मोरारी बापू की कथा देवेन्द्रनगर के गुजराती स्कूल में हुई थी .मां और पिता जी के साथ सतसंग में गया था .तब मैंने पहली बार उनको सुना . उनकी शैली मुझे हमेशा आकर्षित करती है .
मैंने अपनें सत्संग ग्रुप में भी अपने गुरू भाईयों के बीच उनकी चर्चा कई अवसरों पर की हैं . उनकी राम कथा  रसिक भक्तों के लिये आनंददायी अमृत है .

आज राजधानी रायपुर में संत मोरारी बापू जी ने  डॉक्टरों की  सेवा को, मानव एवं उसकी आध्यात्मिक मदद हेतु एक सच्ची प्रेरणा बताया. उन्होंने कहा, ″डॉक्टरों को अपने पेशे तथा अपने वचन और कर्म से यही प्रदर्शित करना है कि मानव जीवन पवित्र, मूल्यवान और अनुल्लंघनीय है जिसके कारण वह प्यार किये जाने, बचाये जाने एवं स्वस्थ किये जाने के योग्य है"

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