6 मार्च 2013

Secret Formula for great health


Secret Formula of FIVE for great health {research of DIABETIC clinic Dr Satyajit Sahu }





1. regular pranayam
2.regular medicine- even if u don't have any disease .take healthy Ayurveda rasayan therapy.
3. diet...healthy ways........cut off rich food if u r overweight
4 regular prayer.............obviously to avoid bad times.... bad health
5 walk my dear walk..............just walk around.......or walk treadmill.....

नेपोलियन ने दुनिया को एक गणित सिखाया है ----



ज्यादातर लोग भय के कारण किसी भी कार्य में बहुत लंबा समय ले लेते है .या तो वे ज्यादा अच्छे परिस्थिति या ज्यादा पैसे आने का इंतजार करते है .आपको इसके ठीक विपरीत करना है और जब तक आप इंतजार करे की पूरी तैयारी हो गयी है उसके पहले ही चलना शुरू कर दे .आप स्वयं अपने लिये थोड़ी कठिनाई और चैलेन्ज वाला रास्ता चुनिये .आप देखेंगे की आगे आपकी उर्जा और शक्ति समय के साथ चुनौती के स्तर तक बढ जाएगी और यही शक्ति का राज है .आप यह जानते रहेंगे की आप पूरी तरह तैयार नहीं है तो आप ज्यादा inventive और सतर्क रहेंगे .और अंत में आप सफल ही होंगे .



यही प्राचीन से वर्तमान के इतिहास में दर्ज सफल लोगों ने किया है .जब जूलियस सीजर को अपने जीवन का सबसे महानतम निर्णय लेना था की--- क्या पाम्पे के खिलाफ जाए और गृह यद्ध की शुरुआत करे या फिर और बेहतर समय का इंतजार करे --वह इटली और गौल की सीमा पर रुबिकान नदी के किनारे एक छोटी से सेना के साथ था .उसने छोटी सी सेना को अपने महान इरादे और रण नीतिक कौशल से महान शक्ति में परिवर्तित कर दिया .उसने रुबिकान को पार करके ,शत्रुओं को अचंभित कर दिया और फिर उसने कभी मुड़ कर नहीं देखा .





बराक ओबामा को 2006 में प्रेजिडेंट चुनाव के लिये लगभग सभी लोगों ने नहीं खड़ा होने की सलाह दी और सही वक्त का इंतजार करने को कहा . उनकी उम्र कम थी और ज्यादातर लोगों के लिये वो नये थे .हिलेरी क्लिंटन पूरे परिदृश्य में छाई हुई थी .उन्होने पारंपरिक धारणा के बजाय चुनाव में खड़ा होने का निर्णय लिया .अब जबकि सारी स्थितियां और लोग उनके खिलाफ थे तो उन सबको campansate करने के लिये उनको ज्यादा साहस, ज्यादा उर्जा ,ज्यादा तेज रणनीति और ज्यादा संगठित होकर काम करना था .उन्होने इस मौके पर इतना शानदार campaign किया और अपनी सारी कमियों को अपनी शक्ति में बदल दिया ---जैसे अनुभव की कमी को लोगों ने नयापन और परिवर्तन के रूप में लिया . 







नेपोलियन ने दुनिया को एक गणित सिखाया की कैसे सेना की शक्ति को तीन गुना बढाया जा सकता है ---वह है आप और आपकी सेना की उर्जा और प्रेरणा उसकी पूरी ताकत को तीन गुना बढ़ा देती है और आप अपने से तीन गुना ज्यादा ताकतवर सेना को हरा सकते है .व्यक्ति अपने साहस ,उर्जा और रणनीति से जीवन के लगभग सभी बधाओं और समस्याओं पर विजय पा सकता है और नामुमकिन स्थितियों से भी नई सफलता के आयाम गढ़ सकता है

सत्संग

कल एक संत के पास में बैठा था .मन में उलझन थी .इतनी दिनों के अभ्यास के विपरीत अब मै बहुत ज्यादा लोगों से मिल रहा हूँ और समाज के सभी वर्ग में जा जा कर उनके बीच स्थितियों को देख समझ रहा हूँ .कुछ समाज शास्त्रियों की बात पढ़ कर संतोष हुआ की एरिया ऑफ़ कंसर्न वही रखते हुवे एरिया ऑफ़ इन्फ्लुएंस बढाया जा सकता है ..इसी सिलसिले में जब प्रश्न किया 



" हमारे गुरु के भी लाखों शिष्य थे और उन सबसे उनका संवाद था .पर भीतर से वो तठस्थ रहते थे .आप की तठस्थ रहो और सबके बीच रहो यही आध्यत्मिकता है " गुरु रूपी संत ने सहज सरल समाधान दे दिया .यूरेका यूरेका

डायनामिक पब्लिक स्कूल के सम्मान समारोह में डॉ सत्यजित साहू जी का ऐतिहासिक भाषण

डायनामिक  पब्लिक स्कूल के सम्मान समारोह में डॉ सत्यजित साहू  जी का ऐतिहासिक भाषण 



मंच पर उपस्थित आदरणीय अतिथि गण , मंच पर उपथिति हमारे अपने विधायक रायपुर उत्तर के श्री कुलदीप जुनेजा जी  मौदहापारा वार्ड के माननीय पार्षद श्री अनीस अहमद जी ,हमारे बीच उपस्थिति रायपुर ग्रामीण कांग्रेस के महामंत्री श्री विकास दुबे जी जो  प्रदेश कांग्रेस कमेटी सदस्य भी है ,युवा नेता के रूप में आपनी छाप इस शहर में जिन्होने बनाई है ,मंच पर उपस्थित डॉ मनीष गुप्ता जी जो jci के राष्ट्रीय स्तर के ट्रेनर है और दांत के डॉक्टर भी है मंच पर उपस्थित हमारे शेख समीर भाई जो भारतीय स्काउट एंड गाइड के प्रदेश फाइनेंसियल कमेटी के सदस्य है और jci रायपुर राइस सिटी के प्रेसिडेंट है जिन्होने हॉकी में शहर का नाम किया है ,मंच पर उपस्थित हमारे हर दिल अजीज मित्र तारिक खान जी मंच पर बैठे हमारे हरदिल अजीज मित्र और कौमी एकता के प्रतिक श्री आदर्श जॉन जी ,डॉ  फरीद जी जो जाने माने फ़िज़ियोथेरेपिस्ट और लाइफ स्टाइल गुरु है ,मंच पर उपस्थित प्रदेश  मानिकपुरी युवा समाज के अध्यक्ष और युवक कांग्रेस के नेता समाजसेवी श्री सुमित दास जी  एवं आप सभी डायनामिक पुब्ल्लिक स्कूल और आर एन ए परिवार के सदस्य इस मौदहापारा के सम्मानीय महिलाये और नागरिक गण ,





आज मुझे कहा गया है की मै डायनामिक पब्लिक स्कूल और आर एन ए के संस्थापक आपके अपने हबीब सर के बारे में कुछ कहूं ,
मै इन दो लाइन से शुरू वात करना चाहूंगा 
अब तो हवाएं ही करेंगी रौशनी का फैसला ,
अब तो हवाएं ही करेंगी रौशनी का फैसला ,
जिस दिये में दम होगा वो बाकी रह जायेगा 
मित्रो ,विश्व में एक देश है जापान  जिसका आज से साठ साल पहले नामो निशान मिट गया था ,उस देश को उसके शत्रुओं ने धुल में मिला दिया था और सभी यह सोच बैठे थे की अब यह देश कभी उठ नहीं पायेगा पर उस देश ने अपने चालीस साल में इतनी तरक्की की कि वह विश्व में सबसे आगे के देश में शुमार हो गया , विश्व में तकनीक के क्षेत्र में सारी बड़ी खोज का श्रेय उसको है और आज वह जापान अमरीका को टक्कर दे रहा है।जापान की  तरक्की का कारण  क्या है ? वो है उस देश की अटूट इच्छाशक्ति ,उसके लोगों के परस्पर सहयोग की भावना ,उसका इरादा की नहीं रुकना नहीं है अपने आप को खड़ा करना है ,ठीक वैसे ही एक व्यक्ति के जीवन में भी हुआ आज से कुछ साल पहले हबीब सर की परिस्थितियां भी बहुत ही ख़राब थी पर उन्होने अपने हौसले से ,आपनी अटूट इच्छाशक्ति से ,आपने सहयोग की भावना से ,दिनरात की मेहनत से अपने आप को इतना सफल बनाया ,इतना खड़ा किया की आज हमसब उनके इस कार्यक्रम में सम्मानित होने  के लिये आये है .मै चाहता हूँ की आप सभी जोरदार तालियों से उनके इस हौसले की तारीफ करे ,आप सभी 
हबीब से मेरी पहचान पिछले 24 साल से है ,उन्होने सेंट पाल स्कूल की टीम को जो साठ साल में एक बार भी इंटर स्कूल ट्राफी नहीं जीत पायी थी मेरे मित्र यहाँ मंच पर बैठे है ये जानते है  उस टीम को साठ साल में पहली बार जीतने का हौसला भरने के मै चाहता हूँ की आप सभी जोरदार तालियों से उनके इस हौसले की तारीफ करे ,आप सभी 
 एक बार हमारे स्कूल के  तीन छात्रों ने संभाग स्तरीय प्रतियोगिता में पर्थम स्थान प्राप्त किया पर प्रशासन और स्कूल प्रबंधन ने आगे भेजने के लिये पैसा देने से मना कर दिया बड़ी मुश्किल हुई मंच पर बैठे ,हमारे स्कूल के साथी जानते है , ऐसी मुश्किल परिस्थिति  में हबीब सर ने कहा ,आप पैसा नहीं देते कोई बात नहीं ,हम सभी छात्र एक एक दो दो रूपया इकट्ठा करके हमारे भाइयों के भेजेंगे ,इस हौसले के लिये ,मै चाहता हूँ की आप  जोरदार तालियों से उनकी  तारीफ करे इस हौसले के लिये 
पूरे रायपुर शहर में आपको गिनती के ही लोग मिल पायेंगे ज गणतंत्र दिवस पर हमारे शहर की ओर से राष्ट्रपति को आपनी सलामी देते है हमारे पूरे शहर का गणतंत्र दिवस परेड में नाम रौशन करने के लिए मै चाहता हूँ की आप  जोरदार तालियों से उनकी  तारीफ करे .

गणतंत्र दिवस कैंप में गॉड ऑफ़ ऑनर के लिये तत्कालीन मध्य प्रदेश का प्रतिनिधित्व करने के लिये और हमारे शहर और प्रदेश का नाम रौशन करने के लिये  मै चाहता हूँ की आप  जोरदार तालियों से उनकी  तारीफ करे .
आप सभी जानते है ,पार्षद महोदय गवाह है, आज से 12 साल पहले इस मुहल्ले में  शिक्षा के साथ साथ संस्कार भी डालने के इरादे के साथ की यहाँ डायनामिक पब्लिक स्कूल खोलने का हौसला किया ,इस इरादे के लिए मै चाहता हूँ की आप  जोरदार तालियों से उनकी  तारीफ करे। 
हजारों हजारों स्टूडेंट को अपने मोटिवेशन और इंग्लिश से प्रेरणा देने के लिये और उनकी जिंदगी बदल देने के लिये ,मै चाहता हूँ की आप  जोरदार तालियों से उनकी  तारीफ करे। 
बम्बई ,इन्दोर भोपाल इटारसी नागपुर में अपने  मोटिवेशन और स्किल से नाम कमाने और हमारा नाम रौशन करने के लिये मै चाहता हूँ की आप  जोरदार तालियों से उनकी  तारीफ करे। 








इनका नाम अब्बा जी और मांजी ने हबीब रखा है ,और मुझे हबीब का मतलब बताया गया है प्यारा दोस्त 
तो ये हबीब हैं  अपने मंजी और अब्बा जी के 
ये हबीब हैं अपने फुफ्फी चच्चा के 
ये हबीब हैं  अपने परिवार के 
 ये हबीब हैं  अपने  मुहल्ले के 
ये हबीब हैं  अपने मुहल्ले की गलियों के
 ये हबीब हैं अपने डायनामिक पब्लिक स्कूल के 
ये हबीब हैं आर एन ए के सभी स्टूडेंट के 
ये हबीब हैं  सभी सेंट पाल् के साथियों के
ये हबीब हैं  इस शहर के
हम सभी दोस्तों के ये हबीब हैं 
और इन हबीब को इस दुनिया में लाने के लिये मै इनके अब्बा जी और मांजी का शुक्रिया अदा 
करता हूँ 
इनके अब्बाजी यहाँ बैठे है मै उनको यहाँ मंच पर बुलाना चाहता हूँ और मै  दरखास्त करूँगा की मेरे दोस्तों की तरफ से तारिक खान जी से की  अब्बा जी का  पुष्प गुज्झ से स्वागत करें मै चाहता हूँ की आप   सभी जोरदार तालियों से उनकी  स्वागत करें आखिर माँ बाप ही हमको इस दुनिया में लाने का सबसे बड़ा कारण  है  









और अब हबीब सर रजा हो गये है 
रजा का मतलब होता है रब की इच्छा 
रज़ा हबीब अब रब की इच्छा बन गए है 
और जब अल्लाह की इच्छा ,जब ईश्वर की इच्छा ,जब मालिक की इच्छा ,भगवान की इच्छा हो जाती है तो उसे कोई नहीं बदल सकता 
रज़ा हबीब सर अब रब की इच्छा बन गये है रज़ा हबीब सर अब अल्लाह की इच्छा बन गये है की वो अपनी कामयाबी से और और लोगों की जिंदगी बदलें और अपने जीवन में आगे आगे और आगे जाएँ .हम सभी दुआं करते है की रज़ा हबीब सर अपने तमाम उम्र कामयाबी ,ख़ुशी और तरक्की के नये नये मुकाम हासिल करे  .
आपने इतनी देर तक मुझको सुना इसके लिये मै आप सभी का शुक्रिया अदा करता हूँ 

महान और सफल बनने का रहस्य

दुनिया के सबसे महान कलाकार, वैज्ञानिक , कोच, लेखकों के जीवन का अध्ययन कर महान और सफल बनने का रहस्य खोजा गया है .इस खोज का श्रेय विश्व विख्यात लेखक रोबर्ट ग्रीने की रिसर्च को जाता है ...............



1 आपने जीवन की व्यक्तिगत चुनौती को पहचानना {Discover your calling: the life's task }

2 वास्तविक स्तर पर रहकर सबसे काबिल व्यक्ति अपने मास्टर ,कोच ,गुरु का साहचर्य प्राप्त करना {Submit to reality: the ideal apprenticeship}


3 अपने मास्टर ,कोच की कला और गुणों को आत्मसात करना {Absorb the master's power: the mentor dynamic}


4 सामाजिक वास्तविकता और सामाजिक बुद्धिमत्ता का ज्ञान विकसित करना {See people as they are: social intelligence}

 5 आपने अंदर की सृजन क्षमता से नया कुछ करने की प्रक्रिया का विकास करना{Awaken the dimensional mind: the creative-active}

 6 महानता :::--सृजन क्षमता से ,अपने क्षेत्र में क्रन्तिकारी नया करना {Fuse the intuitive with the rational: mastery }

छत्तीसगढ़ में" राज्य स्तरीय ग्रामीण डायबिटीस सेंटर " का स्वप्न

छत्तीसगढ़ में" राज्य स्तरीय ग्रामीण डायबिटीस सेंटर " का स्वप्न 
पूरे हिन्दुस्तान के सबसे प्रतिष्टित और बेहतरीन डायबिटीस सेंटर TOTALL डायबिटिक और हॉर्मोन सेंटर में होने वाले दो दिवसीय अंतररास्ट्रीय सम्मलेन के लिये इंदौर जाना हो रहा है 2 और 3 मार्च को .
TOTALL इंदौर के विश्व प्रसिद्ध ENDOCRINOLGIST डॉ सुनील एम जैन और डॉ किरनेश पाण्डेय की उनकी लगन मेहनत और समर्पण की जितनी तारीफ की जाये कम है .
डॉ सुनील एम् जैन जी ने डायबिटीस के इलाज, रिसर्च और जागरूकता के लिये जो काम किया है उसकी मिसाल पूरे विश्व में दूसरी नहीं है .पिछले दिनों जब उनका रायपुर आना हुआ तब भी उन्होने अपने चिकित्सकीय ज्ञान से मुझे अभिभूत कर दिया .मेरे अग्रज कई सीनियर डॉक्टर भी उनको अपना गुरु और मेंटर स्वीकार कर चुके है .











छत्तीसगढ़ में उनके जागरूकता अभियान को यहाँ की सरकार मंजूरी दे इसके प्रयास जारी है पर देखते है की यहाँ की सरकार क्या करती है ? .इस बार के विजिट में उनसे साइंटिफिक चर्चा के अलावा छत्तीसगढ़ में एक ग्रामीण डायबिटिक सेंटर की रुपरेखा और इसके स्वरुप के बाबत उनसे चर्चा करनी है .
छत्तीसगढ़ में" राज्य स्तरीय ग्रामीण डायबिटीस सेंटर " का निर्माण यहाँ के निवासियों का स्वप्न बने और यह साकार हो इसके लिये प्रयास जरूरी है

छत्तीसगढ़ की संस्कृति और कबीर पंथ

छत्तीसगढ़ की संस्कृति और कबीर पंथ--
छत्तीसगढ़ संस्कृति की पहली और अंतिम पहचान है - उसकी मानवीयता और संवदेनशीलता। यही कबीरीय संदेश की भी मुख्य बातें हैं। समय चक्र के साथ जब कबीर का आगमन होता है और उनकी वाणीं वायुमंडल में गूंजती है, तब हवा की तरंगों पर अटखेलियाँ खेलती यह रागिणी यहां के लोक जीवन में झंकृत हो उठती है। इसलिए हम कबीर पंथ को बहुत गहराई से छत्तीसगढ़ी संस्कृति में परिव्याप्त देखते हैं।

कबीरीय चेतना आने से पहले मानों छत्तीसगढ़ की जीवन्त प्रकृति उसकी आगवानी के लिए बाँह फैलाये खड़ी थी। अविलम्ब वह चारों और फैलकर यहां के जीवन के साथ एकरस हो गई। इसलिए इस कबीरीय चेतना को हम छत्तीसगढ़ में उपलब्ध आदिवासी, सत्नामी, पिछड़ा वर्ग, ब्राह्मण, बौद्ध, जैन, सिक्ख, ईसाई, मुसलमान तथा और भी जितने मत-मतांतर हैं, सब में कमोवेश से इसे प्रतिध्वनित पाते हैं। इतना ही नहीं छत्तीसगढ़ के आस-पास अन्य क्षेत्रों में इस वाणी का प्रभाव देखा जा सकता है।

छत्तीसगढ़ की भूमि अनादिकाल से संतों - ॠषियों और मुनियों का प्रिय क्षेत्र रहा है। उनके प्रभाव से वह अपने यहां एक उदात्त स्वरुप को बना सका है। पर इस ऐतिहासिक कालखंड में हम कबीर पंथ को सर्वाधक रुप से यहां फैलते हुए देखते हैं। छत्तीसगढ़ के साधु संत और योगी भी आस-पास के क्षेत्रों में भ्रमण करते रहे और लोक चेतना जगाते रहे।

मूलभूत रुप से छत्तीसगढ़ संस्कृति लोक संस्कृति है। क्योंकि यह आदिवासी क्षेत्र है और आदिम जातियां यहां के मूल निवासी हैं। कबीर - कबीर की वाणी तथा उनका जीवन दर्शन सभी कुछ जनवादी है। उसका यही जनपदीय व्यक्तित्व छत्तीसगढ़ी संस्कृति के साथ सबसे अधिक तालमेल रखता है। जनता की आत्मपीड़ा, उसकी मौन ललकार, विश्वमानवता के मंदिर में समानता और प्रेम का अधिकार आदि वे सपने हैं, जो कबीरीय संदेश के मूल तत्व हैं। सह-अस्तित्व, पारस्परिक सहयोग, संतुलन आदि बातें जो छत्तीसगढ़ी संस्कृति की मूल बातें हैं, कितनी कबीरीय वाणी के कारण हैं और कितनी भारतीय संस्कृति के प्रभाव के कारण तथा कितनी छत्तीसगढ़ी संस्कृति की देन है, कह पाना असंभव है? किसने किसको कितना दिया और लिया, शायद यह राज तभी खुलेगा, जब प्रकृति के महामौन को वाणीं मिलेगी। तब इतिहास से कोई स्वर मुखरित होगा या फिर आकाश में कोई जीवन रागिणी लहरायेगी। हम तो केवल इतना ही कह सकते हैं कि भारतीय संस्कृति और छत्तीसगढ़ी संस्कृति तद्रूप और अद्वेैत हो गई हैं।

ऐसी जनश्रुति है कि कबीर दास केवल आये ही नहीं, परंतु बहुत समय तक यहां की प्रकृति के मोहपाश में बंध गये। यहां की प्रकृति ने इस अक्खड़-फक्खड़ वीतरागी और मस्तमौला को ऐसा बांधी कि बहुत समय तक मनन, ध्यान और तपस्या आदि करते रहे। गुरुनानक जी के साथ उनकी मुलाकात अमरकंटक के पास छ: किलोमीटर दूर कबीर चौरा में हुई थी।

""छत्तीसगढ़ में कबीर-मत के प्रचार व प्रसार में सर्वाधिक महत्वपूर्ण भूमिका महामना धर्मदास जी की थी। वे बांधवगढ़ के निवासी थे। उन्होंने कवर्धा को अपने धर्मोपदेश का केन्द्र बनाया। और कवर्धा के कबीर चौरे के महंत कालान्तर में गुरु धर्मदास जी के सीधे उत्तराधिकारी बने।''छत्तीसगढ़ की संस्कृति और कबीर पंथ--
छत्तीसगढ़ संस्कृति की पहली और अंतिम पहचान है - उसकी मानवीयता और संवदेनशीलता। यही कबीरीय संदेश की भी मुख्य बातें हैं। समय चक्र के साथ जब कबीर का आगमन होता है और उनकी वाणीं वायुमंडल में गूंजती है, तब हवा की तरंगों पर अटखेलियाँ खेलती यह रागिणी यहां के लोक जीवन में झंकृत हो उठती है। इसलिए हम कबीर पंथ को बहुत गहराई से छत्तीसगढ़ी संस्कृति में परिव्याप्त देखते हैं।










कबीरीय चेतना आने से पहले मानों छत्तीसगढ़ की जीवन्त प्रकृति उसकी आगवानी के लिए बाँह फैलाये खड़ी थी। अविलम्ब वह चारों और फैलकर यहां के जीवन के साथ एकरस हो गई। इसलिए इस कबीरीय चेतना को हम छत्तीसगढ़ में उपलब्ध आदिवासी, सत्नामी, पिछड़ा वर्ग, ब्राह्मण, बौद्ध, जैन, सिक्ख, ईसाई, मुसलमान तथा और भी जितने मत-मतांतर हैं, सब में कमोवेश से इसे प्रतिध्वनित पाते हैं। इतना ही नहीं छत्तीसगढ़ के आस-पास अन्य क्षेत्रों में इस वाणी का प्रभाव देखा जा सकता है।

छत्तीसगढ़ की भूमि अनादिकाल से संतों - ॠषियों और मुनियों का प्रिय क्षेत्र रहा है। उनके प्रभाव से वह अपने यहां एक उदात्त स्वरुप को बना सका है। पर इस ऐतिहासिक कालखंड में हम कबीर पंथ को सर्वाधक रुप से यहां फैलते हुए देखते हैं। छत्तीसगढ़ के साधु संत और योगी भी आस-पास के क्षेत्रों में भ्रमण करते रहे और लोक चेतना जगाते रहे।

मूलभूत रुप से छत्तीसगढ़ संस्कृति लोक संस्कृति है। क्योंकि यह आदिवासी क्षेत्र है और आदिम जातियां यहां के मूल निवासी हैं। कबीर - कबीर की वाणी तथा उनका जीवन दर्शन सभी कुछ जनवादी है। उसका यही जनपदीय व्यक्तित्व छत्तीसगढ़ी संस्कृति के साथ सबसे अधिक तालमेल रखता है। जनता की आत्मपीड़ा, उसकी मौन ललकार, विश्वमानवता के मंदिर में समानता और प्रेम का अधिकार आदि वे सपने हैं, जो कबीरीय संदेश के मूल तत्व हैं। सह-अस्तित्व, पारस्परिक सहयोग, संतुलन आदि बातें जो छत्तीसगढ़ी संस्कृति की मूल बातें हैं, कितनी कबीरीय वाणी के कारण हैं और कितनी भारतीय संस्कृति के प्रभाव के कारण तथा कितनी छत्तीसगढ़ी संस्कृति की देन है, कह पाना असंभव है? किसने किसको कितना दिया और लिया, शायद यह राज तभी खुलेगा, जब प्रकृति के महामौन को वाणीं मिलेगी। तब इतिहास से कोई स्वर मुखरित होगा या फिर आकाश में कोई जीवन रागिणी लहरायेगी। हम तो केवल इतना ही कह सकते हैं कि भारतीय संस्कृति और छत्तीसगढ़ी संस्कृति तद्रूप और अद्वेैत हो गई हैं।

ऐसी जनश्रुति है कि कबीर दास केवल आये ही नहीं, परंतु बहुत समय तक यहां की प्रकृति के मोहपाश में बंध गये। यहां की प्रकृति ने इस अक्खड़-फक्खड़ वीतरागी और मस्तमौला को ऐसा बांधी कि बहुत समय तक मनन, ध्यान और तपस्या आदि करते रहे। गुरुनानक जी के साथ उनकी मुलाकात अमरकंटक के पास छ: किलोमीटर दूर कबीर चौरा में हुई थी।

""छत्तीसगढ़ में कबीर-मत के प्रचार व प्रसार में सर्वाधिक महत्वपूर्ण भूमिका महामना धर्मदास जी की थी। वे बांधवगढ़ के निवासी थे। उन्होंने कवर्धा को अपने धर्मोपदेश का केन्द्र बनाया। और कवर्धा के कबीर चौरे के महंत कालान्तर में गुरु धर्मदास जी के सीधे उत्तराधिकारी बने।''

दामाखेड़ा आज भी भारतीय कबीर - पंथ में एक महत्वपूर्ण स्थान रखता है। बिलासपुर संभाग में अधिकांशत: मुसलमान कबीर एवं कबीर-पंथ के लिए श्रद्धा रखते हैं। सभी अपना-अपना मत मानते हुये भी एक बिंदु पर आकर मिल जाते हैं, और वह है - महात्मा, युगपुरुष लोकनायक कबीर। चाहे ये पंथी हो या नहीं, उच्चवर्ग के हों या निम्न वर्ग के, शिक्षित हों या अशिक्षित पर निरक्षर-मसीहा और सत्यनिष्ठ गुरु के प्रति सबकी सामूहिक आस्था, विश्वास और भक्ति है। पनिका वह पिछड़ी जाति है, जो सर्वत्र प्राय: कबीर पंथी है। पनिका नाम भी प्रतीकात्मक है। पनिका अर्थात् (पानी + का)। कबीरदास जी को जन्म से ही मां ने त्याग दिया था। लहर तारा तालाब में एक पत्ते पर सोते हुये एक दूसरी मां को वे मिल गये थे।

"पनिका' जाति इसलिए अपने को पनिका कहलाना पसंद करती हैं। उसकी मान्यता है कि वह कबीर का सबसे अधिक प्रतिनिधित्व करती है।

""पनका द्रविड वर्ग की जनजाति है। छोटा नागपुर में यह "पान' जनजाति के नाम से जानी जाती है। ऐसा कहा जाता है कि संत कबीर का जन्म जल से हुआ था और वे एक पनका महिला द्वारा पाले पोषे गये थे।''

पानी से पनका भये, बूंदन रचा शरीर।
आगे आगे पनका गये, पाछे दास कबीर।।

पनका प्रमुख रुप से छत्तीसगढ़ और विन्ध्य क्षेत्र में पाये जाते हैं। आजकल अधिसंख्य पनका कबीर पंथी हैं। "कबीरहा' कहलाते हैं।

{साभार :डॉ शिवप्रिया महापात्रा ignca /kabir}