6 मार्च 2013

सत्संग

कल एक संत के पास में बैठा था .मन में उलझन थी .इतनी दिनों के अभ्यास के विपरीत अब मै बहुत ज्यादा लोगों से मिल रहा हूँ और समाज के सभी वर्ग में जा जा कर उनके बीच स्थितियों को देख समझ रहा हूँ .कुछ समाज शास्त्रियों की बात पढ़ कर संतोष हुआ की एरिया ऑफ़ कंसर्न वही रखते हुवे एरिया ऑफ़ इन्फ्लुएंस बढाया जा सकता है ..इसी सिलसिले में जब प्रश्न किया 



" हमारे गुरु के भी लाखों शिष्य थे और उन सबसे उनका संवाद था .पर भीतर से वो तठस्थ रहते थे .आप की तठस्थ रहो और सबके बीच रहो यही आध्यत्मिकता है " गुरु रूपी संत ने सहज सरल समाधान दे दिया .यूरेका यूरेका

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