13 मार्च 2013

मानिकपुरी युवा समाज के अध्यक्ष सुमीत दास मानिकपुरी

   मानिकपुरी युवा समाज के   सुमीत दास मानिकपुरी जी अध्यक्ष है। उन्होने  व्यापार ,राजनीती ,समाज सेवा सभी क्षत्रों में सफलता के नये आयाम स्थापित किया है .उनसे उनके बाबत कई विषयों में बातचीत की जो यहाँ पर प्रस्तुत है .



"आप इतने  सफल है इसका राज क्या है ?"

"मेरा सिद्धांत रहा है जियो और जीने दो "

जियो और जीने दो के सिद्धांत पर कई लोग चलते है .वो क्या चीज़ है जो आपको प्रेरणा देती है ?

"देखिये डॉ साहब आदमी काम  करता तो उसके लिये  हर आदमी का अपना नजरिया होता है कुछ लोग नाम के लिये काम करते है कुछ पैसा कमाने के लिये काम करते है कुछ दोनों के लिए काम करते है कुछ काम के लिये काम  करते है कुछ घर बार चलाने के लिये काम करते है ,मै  जब भी काम करता हूँ तो बहुत सारी  बातों  का ध्यान रखता हूँ मै कबीर पंथ में पैदा हुआ हूँ और कबीर साहेब ने एक बात कही है 
साईं इतना दीजिये जामे कुटुंब समाये ,मै भी भूखा न रहूँ साधो भी भूखा न जाये  कबीर साहब के इस सिद्धांत में साधो का अर्थ कई कई प्रकार से लोग लगाते है  .मै इसका अर्थ, जैसे की मैने पहले भी कहा जियो और जीने दो के अनुसार लेता हूँ  मै जब भी काम करता हूँ तो यह ध्यान रखकर काम करता हूँ की मेरे साथ बहुत सारे लोग मिल कर काम करे ,साथी रहे ,मित्र रहे ,कामगार रहे ,वर्कर रहे ,एक टीमवर्क  के साथ मै काम करता हूँ ,इस टीम के साथ काम करने से सबको लाभ मिले यह मेरी चाह रहती है .
मैने शुरू से टीम वर्क में काम किया है और ऐसा मै  हमेशा करता हूँ इसी टीम वर्क के कारण इंटरेस्ट और  मेरी प्रेरणा बनी रहती है की मै ज्यादा समय तक  काम करू और अच्छे से  काम करूं .टीम वर्क के कारण मेरी ऊर्जा बनी रहती है .जियो और जीने दो के सिद्धांत के अनुसार इस टीम वर्क में सबको लाभ  मिलता है  ."

" काम का सफ़र में जब निराशा , बाधा या   विपरीत परिस्थिति आती है तब कैसा आप का रवैया रहता है ?"

"देखिये यह तो पार्ट ऑफ़ लाइफ है ,जो भी काम करेगा उसको उसमे यह सब अनुभव मिलेगा ही . काम में जब अप डाउन आएगा तभी वह महसूस करेगा की वह काम कर रहा है .मेरी जिंदगी में भी जब भी डाउन का समय आया है तब मैने ऐसा महसूस किया है की मेरे काम  के अलावा के अन्य शुभ कर्म का फल जिंदगी के डाउन फाल के ऊपर भारी पडे है ,इसी कारण हमेशा  मै जितनी तेजी से डाउन हुआ हूँ उसकी दुगनी  स्पीड  से मुझे सक्सेस मिली है .'

"जब निराशा आती है तो आप क्या सोच बनाकर उसका सामना करते है ?"

"जब भी निराशा या डाउन फॉल  आता है तो सबसे पहले तो मै यह सोचता हूँ की जहाँ भी गलती हुई है उसका हमेशा ध्यान रखूँ और वह दुबारा ना हो इसका प्रयास करू .क्यूंकि कोई न कोई चुक जरुर होती है जिसके कारण निराशा और डाउन फॉल आता है ,अगर चुक नहीं होगी तो  निराशा और डाउन फॉल आ नहीं सकता .तो मै  इसका ध्यान रखता हूँ"

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"आपने टीम वर्क की बात की ऐसा भी देखने में आता है की कई साथी जो पहले टीम में आपके साथ थे वो अब नहीं है आपका क्या सोचना है इस बारे में ?"

"जो जो साथी टीम में रहते है वो एक लक्ष्य के लिये साथ में काम करते है ,सभी का अपना योगदान रहता है सफलता में .  कई साथी ऐसे भी मिले जिन्होने टीम में  काम करने के योगदान को नकार दिया और मुझे ही सारा काम करना पड़ा .ऐसे  में मेरी जरुरत और परिस्थिति पर अपेक्षा कृत  साथ नहीं मिलने पर चीजे पाइल अप  होती गयी और साथ लम्बा नहीं रहा .मेरा काम टीम में इतना ज्यादा कर दिया की, बाकी  को सिर्फ लाभ से ही मतलब रहा तभी ऐसी स्थिति बनी .भगवान् की दया से टीम हमेशा बनती रही और जब भी जो भी साथ में रहा वह सफल रहा .
हमेशा  मैने अपने मौके पर सबको साथ में लिया . जबकि बाकि  साथी आपने मौके पर मुझे अपने साथ नहीं शामिल किये यह भी कारण रहा पर वह मेरे लिये बहुत जादा फायदेमंद रहा।"

"आपको साथ में नहीं रखने का कारण क्या रहा होगा ?"
"उनकी सोच का दायरा बहुत छोटा था .मैने सभी प्रकार के छोटे ,बडे ,मध्यम वर्ग के लोगों के साथ काम  किया है ,कई अब भी मेरे साथ है ,जो साथ नहीं है वो आपनी छोटी सोच के कारण  नहीं है।"

"ऐसा क्यों है ?"
"अब सबकी अपनी अपनी सोच है यह मै  कैसे बता सकता हूँ "

"छोटी सोच के साथी को आप ने बड़ी सोच में बदलने की कोशिश नहीं की ?"
"कोशिश तो हमेशा ही की . मै  सबकी सोच में अच्छा और बड़ा बदलाव लाने का भरपूर प्रयास करता हूँ टीम वर्क में तो खासकर . मेरे साथ टीम में जब भी काम हुआ है तो मेरी नेतृत्व करने के गुण  के कारण कई साथी सहज नहीं महसूस कर पाये होंगे ऐसा लगता है .हमेशा मेरे साथ ऐसा हुआ है की सभी टीम मेम्बर में मुझे ही सर्वाधिक श्रेय लोगों ने दिया यह बात भी कई लोगों को नहीं भायी ."

"तो आप हमेशा ही महफ़िल लूट लेते है ?"
"मै खुद नहीं करता  बल्कि लोग मुझे ऐसा हमेशा की श्रेय देते है ."


"वक्त के साथ कई नजदीक के लोग यह समझते है की आप बदल गये ?"
"हर व्यक्ति के जीवन में एक  उद्देश्य होता है मेरे जीवन में मुझे गाँधी जी से समाज का कार्य करने की प्रेरणा मिली और मुझे इस काम के लिये आपने  सभी नजदीक के लोगों का साथ चाहिये .मै चाहता हूँ की इस बात को लोग समझे और साथ दे .समाज के कार्य बहुत सारे लोगों के सहयोग से ही संभव है "

"ऐसा आज के समय में हो सकता है ?"
"बिलकुल हो सकता है आज शिक्षा बढ गयी है कानून सक्षम है ,सब जागरूक हो जाएँ तो बिलकुल हो सकता है "

"बीस साल बाद आप अपने को कहाँ पर देखना पसंद करेंगे ?"
"मै  समाज जीवन से जुड़ा हूँ तो निश्चित रूप से अच्छी जगह पर देखना पसंद करूंगा जहा से मै और बेहतर समाज कार्य कर सकूं ."

सुमीत दास मानिकपुरी युवा नेता और समाज सेवी के रूप में सबके साथ सबके बीच रहते है और उनको इस बातचीत के लिये धन्यवाद और  भविष्य के लिये अपार शुभकामनायें .














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