7 जून 2011

The Utility of Noting Guru Chandala Yoga


The Utility of Noting Guru Chandala Yoga


morden maharishi k n rao

People with Guru Chandala yoga in their horoscope show the following common psychological traits:

1. They are known for a lack of sense of gratitude which is a noticeable mark in their lives.
2. Timid and lacking in initiative they need the support of someone to climb up some ladders in their life, and after achieving some success, betray their mentors (represented by Jupiter).
3. If the 2nd house of ethical conduct is under malefic influence it can be easily concluded that they can lose their mental balance.
4. There is no one in the world that they admire. Emotionally warped, they rarely suffer a guilty conscience.
5. All these traits manifest most if the mahadasha of Rahu followed by that of Jupiter comes in their life in the prime of their youth.

ग्रह शांति क्या है ?

ज्योतिष के तकनीकी सूत्र (के एन राव )
गुरुदेव स्वामी चिन्मय योगी (श्री रजत बोस ) जी के साथ स्वामी आनंद चैतन्य 


ग्रह शांति क्या है ?
  1. वास्तव में ग्रह शांति क्या है इस प्रश्न का प्रत्येक ज्योतिष के पास अपना व्यक्तिगत उत्तर है .
  2. मेरे पास इसके दो उत्तर है .ज्योतिष की दृष्टी  से   यह  देखा  जा  सकता  है की एक विशेष स्थिति में  ग्रह शांति के लिये जो उपाय किया जा रहा है वह कार्य करेगा अथवा नहीं ? यदि वह कार्य नहीं कर रहा है तो ज्योतिष का नैतिक कर्त्तव्य हो जाता है की वह सलाह लेने आएये व्यक्ति को उसका खोया हुआ आत्मविश्वास जगाने में मदद करे .यह किसी धोखा धडी से नहीं किया जा सकता ,सलाह लेने वाले व्यक्ति को इस बात के लिये तैयार करना पडेगा की प्रारब्ध के आघातों को वह जीवन की अत्यावश्यक नियति मन कर स्वीकार करे .उपदेश देने के सामान यह भी स्वस्थ विधि है .उपदेश से बचाने के लिये ज्योतिष को भूतकालिक घटनाओं का सफलतापूर्वक कथन करना चाहिये और तब सम्बंधित व्यक्ति को यह विश्वास कराना  चाहिये कुछ घटनाओं के विषय में उसे प्रारब्ध की आवश्यकता स्वीकार करनी चाहिए .इस कथन के कारण बहुत विवाद हुआ ,तथा अनचाहे ही कुछ लोग मुझसे वैर भाव रखने लगे .
  3. यदि ऐसा लगे की किसी व्यक्ति में धार्मिक प्रवृतियाँ  है तो यही सबसे अच्छा होता है की उसे और अधिक श्रद्धा पूर्वक उपासना करने के लिये प्रेरित  किया जाये .कारण बहुत  सहज है .ईश्वर तो निसंदेह अंतिम सत्य है .
  4. अब रहा रत्न धारण करने की बात का .इसमे तो मै यही कहूंगा की अधिकांशतः जो लोग रत्न धारण करने की सलाह देते है उनमे से बहुतों का सम्बन्ध जौहरियों से रत्न बिक्री पर प्राप्त होने वाली कमीशन से होता है .अब यह ज्योतिष तो नहीं है इसे तो व्यापार ही कहा जायेगा .
  5. हाँ ,यंत्रों का प्रयोग निश्चित रूप से फलदायक होता है ,लेकिन तब ही जब कोई शुद्द आचरण वाला साधक शास्त्रोक्त विधि ज्योतिषीय दृष्टी कोण पर विचार करते हुवे ये यंत्र बनाये .ऐसे लोग जो सम्यक विधि से यंत्र निर्माण कर सकते है वे बहुत गिने चुने लोग ही है. अधिकांश ज्योतिष तो यह भी नहीं जानते की इन यंत्रों को बनाने का रहस्य क्या है .परन्तु उनका भाग्य अच्छा होता है क्यूंकि उनके द्वारा बनाये हुये यंत्रों को ग्राहक अच्छी खासी रकम देकर खरीद ही लेते है .
  6. यद्यपि हम सब महर्षि पराशर द्वारा लिखित पद्धति के आधार पर ही ज्योतिष करते है ,किन्तु बहुत खेद की बात है की महर्षि पराशर द्वारा बताये गये मन्त्र जाप तथा दान का उपायों को कुछ स्वार्थी ज्योतिषी इसलिये नहीं सुझाते की भले ही यह उपाय सम्बंधित व्यक्ति के लिये किनी ही लाभ प्रद सिद्ध हों ,लेकिन उन ज्योतिष के लिये तो आर्थिक रूप से हानिप्रद ही होते है .
  7. मनोवैज्ञानिक स्टार पर पर ज्योतिष को बहुत श्रेष्ठता प्राप्त होती है ,और इसका उपयोग वह एक मनो चिकिस्तक के रूप में सम्बद्ध व्यकित को प्रभावशाली तथा व्यावहारिक सलाह दे कर कर सकता है .लेकिन फिर वाही व्यावसायिक आर्थिक स्वार्थ आड़े आ जाता है और फलस्वरूप सम्बद्ध व्यक्ति को उचित तथा अच्छी मनोवैज्ञानिक सलाह से वंचित रहना  पड़ता है .