4 जून 2011

ज्योतिष विवेचन की विधियों में सी आर डी ऍफ़ फ़ॉर्मूला

ज्योतिष विवेचन की विधियों में सी आर डी ऍफ़ फ़ॉर्मूला 

 आधुनिक ज्योतिष के महर्षि श्री के एन राव जी ने अपने लेख में यह नया फ़ॉर्मूला दिया है .ज्योतिष के क्षेत्र में भावी ज्योतिषियों को इस  फोर्मुले से  नयी दिशा  मिलेगी .

शास्त्रीय पद्धति 
क्लासिकल का" सी "
"सी " से आशय है ज्योतिष के प्राचीन ग्रन्थ जो ज्योतिष सीखने का ठोस और ज्ञान अर्जित करने का सबसे भरोसेमंद आधार है .सभी ज्योतिषियों को प्राचीन ज्योतिष ग्रंथों का अद्ययन और मनन करना चाहिये .हिन्दू ज्योतिष की बुनियादी  बातों के साथ विषय के व्यापक और गहन समझ के लिये जरुरी प्राचीन ग्रंथों और उआकी टीकाओं की संख्या  बहुत  बड़ी है .इनमे से कुछ ग्रन्थ तो सभी सफल ज्योतिषियों के आदर्श मानक भी रहे है .

उदार दृष्टीकोण 
रोमांटिक का "आर "
"आर " से आशय है "रोमांटिक " या उदार दृष्टीकोण .प्राचीन ज्योतिषीय सिद्दांतों को आत्मसात करने के बाद ही किसी जातक के देश ,काल ,समाज ,तथा परिवार आदि की पृष्टभूमि में इनका लचीला प्रयोग करना चाहिये .
यह शोध का सबसे उपयोगी क्षेत्र है .

सूत्र 
फोर्मुले  का "ऍफ़ " 
फोर्मुला वह संवेदी सूचकांक है जिसे कुछ ग्रहों के अंश को जोड़ या घटाकर हासिल किया जाता है और इसका गोचर तथा दशाक्रम के साथ तालमेल बैठाकर सुनिश्चित भविष्य वाणी की जाती है .

दशा 
दशा का "डी"
"डी" का मतलब है दशा क्रम .भारतीय ज्योतिष के पराशरी में ही कम से कम चालीस दशाएं है .
दशाओं के ज्ञान से समय की भविष्यवाणी और सटीक ही जाती है