31 मई 2011

सम्बुद्ध स्वामी आनंद निर्वाण (यथार्थ ) (जीतेंद्र उपाध्याय ) जी के जीवन के अमूल्य स्वानुभव की झलकियाँ




सम्बुद्ध स्वामी आनंद निर्वाण (यथार्थ ) (जीतेंद्र उपाध्याय  ) जी के जीवन के अमूल्य स्वानुभव की झलकियाँ 
जीतेंद्र उपाध्याय (स्वामी आनंद निर्वाण यथार्थ )






वर्तमान सत्संग के लिये पता है :
जीतेंद्र उपाध्याय 
9300137696
पेंशन बाड़ा चौक 
रायपुर .
(अध्यात्म ,ओशो ,झेन,ध्यान ,सत्संग के अनूठी विधियों के स्वानुभव के लिये उपरोक्त पते और नंबर पर संपर्क कर सकते है )


जीतेंद्र उपाध्याय जी को गुरुदेव स्वामी चिन्मय योगी ( श्री रजत बोस ) ने ओशो संन्यास दीक्षा ने स्वामी आनंद निर्वाण नाम प्रदान किया  था .जीतेंद्र उपाध्याय जी ने अपने जीवन के युवा काल के आठ अमूल्य वर्ष गुरुदेव के साथ गहन सत्संग में बिताये है .
जीतेंद्र उपाध्याय (स्वामी आनंद निर्वाण यथार्थ )

 करीब उन्नीस साल  से जीतेंद्र  अध्यात्म  और सत्संग में  गहरी डुबकी लगा रहे है .



उन्होने अपने विशिस्ट अनुभव को अपनी डायरी में लिखा है जिसको २९ मई २०११ रविवार सत्संग में सबके सामने सबसे पहली बार प्रकाशित किया और गुरुदेव के समक्ष स्वयं पढकर सुनाया .

उनके डायरी के कुछ अंश यहाँ प्रस्तुत है :


आदमी  की  नियत को 
ठीक ठीक समझना
सबसे कठिन काम है 
स्वामी आनंद निर्वाण यथार्थ  




मेरे पास किसी को देने के लिये कुछ नहीं है
और मुझे अब किसी से कुछ लेना नहीं है
मेरे पास जो कुछ भी है वो अस्तित्व का
दिया हुआ है  उसमे मेरा कुछ हाथ नहीं

स्वामी आनंद निर्वाण ५-४-७   प्रातः  २:१५





जीवन उपहार में मिला सभी को
जीवन पच नहीं रहा किसी को
सब बौखलाये बौखलाये फिर रहे यहाँ
जीवन समझ आरहा नहीं किसी को
आनंद निर्वाण









लिखना मेरा     शौक नहीं
दिखना मेरी मौज    नहीं
लूटना उसका   भ्रम सही
लुटता मै       कभी   नहीं
इन्द्रियों से मै दिखता कभी नहीं

स्वामी आनंद निर्वाण

भूख ,  प्यास,   ठंडी ,  गर्मी
मन में उबल ,घुटन बेचैनी
उत्साह, हताशा , लालच ,झिझक
घबडाना, शरमाना,शारीरिक पीड़ा
थकान ,           सब कुछ दर्पण में
दिखता है फिर भी दर्पण मौन रहता है

स्वामी आनंद निर्वाण


स्वामी आनंद निर्वाण यथार्थ ( जीतेंद्र उपाध्याय )








उसकी परंपरा : करुणा सदगुरु की

मैने कह के कुछ कहा नहीं
उसने सुना सब कुछ सही सही   .         ( अव्याख्य )

मैने जान जान के जाना नहीं
उसने छोड़ा सब   सही   सही .

मैने      खोजा   सब    जगह
उसने खोजा    कही     नहीं .

मै     अब      रहा     नहीं
समझ  गया  वह  सही सही .

आनंद निर्वाण  १२-३-२००७












 हर शोरगुल की   ओट में मौन     छुपा    है
और मौन हर शोरगुल से अनंत गुना बड़ा है
जैसे एक तारे से आकाश अनंत गुना बड़ा है

आनंद निर्वाण







 कोई खोज रहा था बरसों से
जिसे वह खोज रहा था वह वही है
जिसे वह खोज रहा था

स्वामी आनंद निर्वाण  २५-७-२००७ रात्रि ८:२२



जीतेंद्र उपाध्याय 



 निज घट जानू मै

जो भी व्यक्ति अपनी अभिव्यक्ति को
समग्रता से अभिव्यक्त कर लेता है वह
जीवन के महारास  को प्राप्त हो जाता है

आनंद निर्वाण
जीतेंद्र उपाध्याय (स्वामी आनंद निर्वाण यथार्थ )






                                    करिश्मा उसे कहते है 
                            जो कभी दोहराया नहीं जायेगा 


                                               यथार्थ 
                                                                      रात्रि १२:१५


जीतेंद्र उपाध्याय (स्वामी आनंद निर्वाण यथार्थ )






                                  "  ये जीवन इतना सीरियस भी नहीं है की
                                   इसके लिये इतना परेशान हुआ  जाये "
                            स्वामी आनंद निर्वाण यथार्थ (जीतेंद्र उपाध्याय )