27 मई 2011

धोनी की किस्मत की चकरी चल रही है


NRMC DIARY 24:05:11 10:45 PM

आई पी एल का  २४ मई का मैच सब लोग देख रहे है .पिंकू धोनी की टीम को जिताने के लिये बैठा हुआ है .बाकि लोग आर सी बी को जिताने के लिये सोच रहे है .वैसे भी आर से बी ने  शानदार १७५ रन बनाये है जो  पीछा करना बहुत मुश्किल है .
पिंकू को सब बोल रहे है की अब तो हालत धोनी की टीम की पतली है .लगातार रन रेट बढ़ रहा है .शुरू के दो विकेट जल्दी गिर गये है .
बद्रीनाथ आउट हो गया .धोनी ने कुछ करारे शाट लगाये पर वो भी चलता बना .
पिंकू के  ऊपर  दोस्त और ध्यान केंद्र का  भी प्रेशर और बढ गया .बाहर के दोस्त एस एम् एस पर भी उसको बता रहे है की तेरी टीम हर जायेगी उसकी हालत पतली है .


रैना बढ़िया खेल दिखा रहा है साथ में अल्बी मोर्कल ने खूब जोरदार खेल दिखा कर टीम जो आखिरकार जीत दिला ही दी .
पिंकू इस जीत से उछल पड़ा और कहा " धोनी की किस्मत की चकरी चल रही है ,इस चकरी में जो भी दांव लगायेगा वो जीतेगा ही ."
अनुराग भइया ने कहा " धोनी की किस्मत वाकई बहुत ही  अच्छी  है .उसको हमेशा बहुत अच्छी टीम मिलती है .वह खुद तो नहीं खेला है पर उसकी टीम उसको जीता देती है "
मैने कहा " धोनी तो आल टाइम ग्रेट प्लेयर बन गया है वर्ल्ड कप जीता कर .वर्ल्ड कप जितना बहुत ही कठिन बात है और देश को यह गौरव दिलवाने के कारण ही वो महान क्रिकेटर की श्रेणी में आ गया है ."


गुरुदेव ने भी कहा " वर्ल्ड कप देश के लिये होता है इसको जीतने के लिये बहुत ही अच्छी टीम ,शानदार प्रदर्शन के साथ बेहद अच्छी किस्मत का होना भी जरुरी है ."
अनुराग भैया  " धोनी का तो पांच साल कप्तान बने रहना तय है ."
गुरुदेव ने कहा " क्यों नहीं ,आखिर वो टीम को जीता ही तो रहा है .वो तो कप्तान रहना ही चाहिये ."
गप्पू भइया ने कहा " गांगुली ने अच्छे अच्छे खिलाडी को लाकर टीम की बुनियाद रख दी थी ."
अनुराग भइया ने कहा "गांगुली ने टीम को खडा किया था "

गुरुदेव " टीम इंडिया नाम ही गांगुली ने रखा था .उसने भी महान कप्तान में अपना नाम कर लिया है .टीम को झुझारू  बनाया ही उसने "
अनुराग " फसल गांगुली ने बोई और धोनी ने उसको काटा. बस फ़ाइनल ने खेल कर जीता दिया  "
पिंकू " कई कई परियां तो धोनी ने बहुत शानदार खेली .फ़ाइनल की पारी और उसका  अंतिम शाट तो यादगार है "


मैच की बात ख़त्म हुई तो गप्पू ने अपने पारिवारिक दौरे की बातें गुरुदेव को बताई .

उसके बाद गुरुदेव के साथ अन्य विषयों पर बातें होने लगी .

मैने कहा " स्वामी जी हसन भाई के  घर के निर्माण में बाधा आ रही थी उस घर को मै  और  हेमंत बांधने गये थे .तीन दिन के भीतर ही उस घर का लेन्टर्न ढल गया और ख़ुशी ख़ुशी हसन भाई यह बताने आये थे .उन्होने कृतज्ञ होकर  आभार भी प्रकट किया ." साथ में मैने हेमंत के अनुभव की बात बताई की प्रचंड भैरव मिश्रण का चमत्कारिक फल मिला .

साबर दंड 

गुरुदेव ने कहा " तुम लोगों को सबर की सिद्दीहो गयी है .जैसा अनुभव तुम लोग बताते हो उससे मुझे ओअता चल गया है .मै तो भैरवी को बोला करता था की यह लोग नहीं कर पायेंगे .पर भैरवी लगातार बोलती थी की तुम्हारे शिष्य जादा पढे लिखे है उनसे बिलकुल होगा ."
"मैने तुम लोगों को ठीक विधि से शुरू करा कर आगे की प्रक्रिया  नियम से कराई.तुम लोगों ने अच्छे  से किया भी .वस्तुतः साबर गाँव खेड़े के लोगों के लिये है जिनके पास खूब सारा समय है और धुन है की यह सब करना है .शिव जी ने अपने नंदी भृंगी लोगों के लिये इस साबर तंत्र की रचना  की थी . "
गुरुदेव स्वामी चिन्मय योगी जी के साथ डॉ सत्यजीत साहू और बाब पत्रे 
मै तुम लोगों को बार बार बोलता  हूँ की इसका फल बहुत ही असरदार है .कई मामलों में तो यह अघोर  से जल्दी  फल देता है अघोर में बहुत समय लगता है ."
तुम लोगो समय कितना देते हो इस पर ही है .यह तो तुम लोग लगातार कर रहे हो .भैरवी ने कहा है की समय देने पर  तुम लोगों की सिद्धि और और बढती जाएगी ."




अंत में गुरुदेव की पसंदीदा कविता. भगवान्  श्री से दूर रहकर यानि रायपुर में रहकर   उनको याद करते हुवे यह कविता उनके ह्रदय को बहुत छूती  थी .  कई बार गुरुदेव ने अपने संस्मरण में इसका उल्लेख किया है .
भगवान् श्री रजनीश (ओशो )


आचल थाम लिया है तुमने 
इतना ही आधार बहुत है 
नेह  नजर से देख रहे हो 
इतना ही आभार बहुत है 
चाहे दुरी पर जलता हो 
दीप रूप का जलता तो है 
जिसे देख कर दुर्गम पथ पर 
स्वास-पथिक यह चलता तो है 
मेरी राहे चमकने को 
इतना ही उजियार बहुत है 
किसी सगे को तरस रहा था 
मेरा एकाकी पन कबसे 
सारा जग अपना लगता है 
तुम आये जीवन में जब से 
तुम मेरे कोई अपने हो 
इतना ही अधिकार बहुत है 
भींगे रहते अधर हंसी से 
महका करता मन का उपवन 
चहका करता प्राण पपीहा 
बरसा करता सुधि का सावन 
सारी उम्र  हरी रखने को 
इतनी ही रसधार बहुत है 
बडभागी मेरा मन कितना 
जन्मों का वरदान मिला है 
गाने को मृदु गान मिला है 
पूजने को भगवान्  मिला है
कर चुका न पावूं उम्र  भर   
इतना ही यह प्यार बहुत है

(जगत तरैया भोर की प्रवचनमाला से )
संन्यास माला 




भगवान् श्री रजनीश ( ओशो )