9 मई 2011

मन में बाधा हो तो व्यक्ति आधा

गुरुदेव स्वामी चिन्मय योगी ( श्री रजत बोस )
8 मई २०११
आज रविवार सत्संग का दिन है .पांच बजे तक मै ध्यान केंद्र पहुच गया . गप्पू भैया खाने का किराना और सब्जी लेकर पहुचे है .अमित 10 मई के  बच्चे के जन्म दिन  उत्सव का कार्ड बांटकर पहुचे इसलिये थोडा लेट आये .पिंकू भी आ गया. सूरज अमित के साथ आया .अनिल तम्बू भी आये हुवे है .






गुरुदेव के साथ जीतेन्द्र उपाध्याय एवं हेमंत 
हेमंत अभी जज की परीक्षा की तैयारी रायपुर में ही कर रहे है .इसलिये वो भी जल्दी ही सत्संग में आ गये .हेमंत को गुरुदेव ने कहा " ये अभी अंडर तैयारी जज है " 
"गुरुदेव मुझे जज बनाइये ,अंडर तैयारी नहीं ,आप के ही आशीर्वाद  से होगा ." हेमंत 
"अभी तो तैयारी ही कर रहा है इसलिये अंडर तैयारी जज बोला ."गुरुदेव 
"मेरे बनाने से आपको भी  ख़ुशी होगी "हेमंत 
"अरे तू जज बन गया तो मुझे लगेगा की मै जज बन गया .मुझको इतनी ख़ुशी होगी "
गुरुदेव की बातों को सुनकर हेमंत का ह्रदय गदगद हो गया.


पिंकू 
पिंकू आया है .पिछले ढाई महीने से नौकरी नहीं है .अभी निलोंस कम्पनी में सलेक्सन हुआ है .इसलिये प्रसन्न है .
"तू समय  पर तैयार होकर जोइनिंग कर भाई .तेरा तो  डर ही लगता है की कब तेरा दिमाग बदल जाये .अभी दिमाग पूरी तरह से मेय्चौर होने में तुझको समय लगेगा .सही तरीके से लगातार साल भर काम करेगा तो ही अच्छा होगा .तभी तेरी शादी होनी चाहिये .अन्यथा तेरे परिवार के लिये बोझ हो जायेगा और लड़की के साथ भी  अन्याय होगा  ." गुरुदेव ने समझाते हुये कहा .मजाक की कई बाते होने लगी .गुरुदेव पिंकू के साथ आई पी एल के मैच को लेकर मजाक करने लगे .
गुरुदेव के सानिध्य  में  दिव्य सत्संग  मण्डली 

















आज शाम को गुरुदेव से मिलने  मिस्टर अ और श्रीमती अ आई थी .मिस्टर अ को गुरुदेव ने तीन वर्ष पूर्व पत्रिका देख कर कहा था की तुम्हारा    वृसब  लग्न है तुम्हारा  आने वाला मगल महादशा बहुत ख़राब जायेगा .कम धाम में परेशानी होगी .बच्चे से सम्बन्ध ख़राब  होंगे .बच्चे  सही दिशा में नहीं बढेंगे.
पत्नी से संबंध बिगड़ेंगे .तुहारा द्वि भार्या योग है .पर स्त्री सम्बन्ध से बहुत  नुकसान  इत्यादि .
मिस्टर अ ने यह कहकर इसी गंभीरता से नहीं लिया की पैसा तो  रहेगा  .इसी से बाकि सब ठीक हो जायेगा .
इस बीच जब समय ख़राब आया तो  कई प्रकार की परेशानी से मिस्टर अ घिर गये और अन्य ज्योतिषियों के पास चले गये .उन्होने इनको गोमेद और श्रीमती अ को पन्ना पहना कर और कबाड़ा ककर दिया क्युकी राहू  मिस्टर अ के लिये और बुध श्रीमती अ के लिये अकारक है . 
अभी पिछले दिनों उनके भाई इनके बाबत   पूछने  आये तो गुरुदेव ने बताया की समय ख़राब है और परस्त्री सम्बन्ध के कारन पारिवारिक जीवन और ख़राब होगा इसे सुनकर मिस्टर अ ने कहा की बोस  साहब गलत बोल रहे है .
पर अगले ही दिन उनके भाइयों ने मिस्टर अ को छापा मर कर पर स्त्री के साथ रंगे हाथों पकड़ लिया .घर परिवार में बहुत बदनामी हुई .

गुरुदेव को इनके घर जाना पड़ा  . सभी ने गुरुदेव सा अनुनय विनय किया की आप ही कुछ कीजिये .श्रीमती  अ गुरुदेव के सामने फूट फूट कर रोने लगी और कहा  की आप ही पिता समान हो मेरे इस संकट से मुझे बचाये. (मिस्टर अ ने पत्नी को तलाक के लिये भी बोल दिया .अगले दिन परस्त्री घर आकर शादी के लिये जोर और धमकी दे कर भी चली गयी )  उनके ताऊ जी ने भी गुरुदेव से मिस्टर अको समझाने के  लिये  कहा.
आज शाम का समय ले कर जब पति पत्नी आये तो गुरुदेव ने उन्हे सही रत्न पहनने की सलाह दी तथा बाकि रत्न उतरवा दिया .इन्ही ज्योतिष की बारीकियों को समझाते हुवे गुरुदेव ने कहा की ज्योतिष बड़ा और छोटा नहीं होता .देखो बडे  नाम ज्योतिष  ने मिस्टर अ और श्रीमती  अको  किसी भी प्रकार का लाभ नहीं पहुँचाया उल्टे नुक्सान ही किया .मैने जो सलाह दी थी उसको जातक ने नहीं माना और ख़राब समय में उसको सभी प्रकार से परेशानी का सामना करना पड़ रहा है .



 इसी बीच बाबा पात्रे आये जो हेमंत के मित्र है .इन्होने गुरुदेव से कहा " आपने जो उपाय बताये थे वो पिछले दो हफ्ते से कर रहा हूँ और ऐसा लग रहा है की समस्या कम हो रही है "
"देखो ज्योतिषी भगवान् नहीं होता .पर सही उपाय करने से समस्या कम अवश्य होती है .बाकि जब समय अच्छा आयेगा तो काम भी बढ़िया हो जायेगा ." गुरुदेव ने कहा .
"जी गुरुदेव आपके आशीर्वाद से मुझे अच्छा लग रहा है " बाबा पात्रे कुछ और बात करके चले गये .


जितेन्द्र उपाध्याय ( ताम्बु)

 जितेन्द्र उपाध्याय ( ताम्बु) आये .ये सत्संग के बहुत पुराने सदस्य है पर पिछले सात  आठ साल से नहीं आते थे .ताम्बु की हेमंत और अनिल से खासी मित्रता है .सब मिलकर बहुत आनंदित हुवे .ताम्बु ने खास शैली में कई कई प्रकार की बातें की और बहुत मनोरजक अंदाज से बताया की मन में बाधा हो तो व्यक्ति आधा हो जाता है  और आधा  काम  ही कर पता है . संसयत्मा विनश्यति .
ताम्बु को किस ने कह दिया की वो गुरुदेव की बात को अच्छा   याद कर लिया है तो ताम्बु ने कहा "कैसे याद नहीं रहेगा .गुरुदेव की बातों को मैने सिर्फ सुना नहीं है बल्कि जिया है "
सबने अंत में रात्रि  का भोजन प्रसाद प्राप्त किया  .

आनंद भरी मुद्रा  में सूरज 

 अंत में   सब जाने  लगे  तो गुरुदेव  ने सूरज से कहा "सूरज ने आज कोई भी प्रश्न नहीं पूछा है अब  जल्दी  से एक दो पूछ ले ."
सूरज खिल खिला कर मुस्कुराया .गुरुदेव के साथ खूब आनंद भरी बातें सूरज ने की .