5 मई 2011

बाबा जी के रूप में साक्षात् शिव चले आ रहे है

परम गुरु बाबा कीनाराम जी 
राहुल अभिषेक शर्मा जी का घर का नाम है . इनके पिता जी स्टेट बैंक के मेनेजर पद से दो वर्ष पूर्व रिटायर हुवे है . इनके बड़े भाई राजा मेरे हम उम्र है .राहुल से मेरी मुलाकात १० वर्ष पहले से है .इन्होने अपना कैरियर फार्मा  मार्केटिंग से शुरू किया और पिछले छह वर्ष  से फार्मा की डीलर शिप का व्यवसाय करते है
अघोरेश्वर सरकार बाबाजी 
मेरी इनसे  शुरू से दोस्ती रही है .और हमारी सभी विषयों में बातचीत होती रहती है .
(बाबा जी) पूज्य नीय अवधूत समूहरत्न जी 
इन्होने मुझे अपने गुरु अवधूत बाबा जी के बारे में बहुत कुछ बताया .अभी अभी जब इनसे बाबा जी के रायपुर आश्रम में मुलाकात जादा हुई तो और भी कई बाते राहुल अपने गुरुदेव और इनके दादा गुरु सरकार बाबा के बारे में बताने लगे .राहुल ने बताया की सरकार बाबा वस्तुतः परम गुरु अघोराचार्य बाबा किना राम जी के ही अवतार थे .कई कई बातें इन्होने गुरु देव  (बाबा जी )दादा गुरु( सरकार बाबा ) परम गुरु( बाबा कीनाराम जी ) के जीवन की और उनके भक्तों की बताई . राहुल ने अपने संग्रह से कई किताबें भी मुझे पढने के लिये दी. किताबों के पड़ने के आनंद से जादा आनंद भक्तों के माध्यम से उन्हे सुनने में आता है .सो हमेशा ही राहुल की प्रेम भक्ति मयी बातों का रस मुझे लुभाता है . मुझे गुरुपरंपरा के बारे में जानने ,सुनने और ढकने का बहुत रस है इसलिये हमारी मित्रता और बढ गयी .मुझे गुरुभक्तों  की  बातों में अप्रतिम आनंद आता है और सदैव उनके सौभाग्य की मै सराहना करता हूँ .
आज के समय में गुरु भक्ति की बातें वैसे भी दुर्लभ ही है और मेरे विचार अब इस बाबत तय है की सदगुरु मिलाना कई कई जन्मों के पुण्य का ही प्रताप है . राहुल  इस बाबत एक दोहा कहते है जो इन्होने अपने फेस बुक कमेंट में भी लिखी है 
 सदगुरु मिले तो सब मिले
न मिले तो मिला न कोई
माता पिता पुत्र और बांधव
ये तो हर घर होये
राहुल ने अभी हाल ही में अपने अनुभव की बात बताई .राहुल नवरात्र में कई बार  बाबा जी आश्रम जाते है .नवरात्र का अनुभव राहुल कहते है की अत्यंत दुर्लभ और पवित्र होता है खास कर की बाबा जी की नवरात्र की अवस्था भक्तों के दर्शन के लिये अदभुत है .
राहुल ने जब जब भी नवरात्र में बाबाजी का दर्शन पाया है उसकी अमित छाप ह्रदय में पड़ी है
एक बार  नवरात्र में राहुल बाबा जी के आश्रम में थे ,
प्रातःकाल जब बाबाजी पूजा करके अपनत कक्ष  से निकले तो बंटी जो साथ में सोये हुवे  थे ने राहुल को जगाकर कहा " राहुल उठ .देखा बाबा जी आ रहे है "
राहुल ने ऑंखें खोली और बाबा जी को जब देखा तो देखता ही रह गया .वो नव रात्र की अस्टमी थी .
बाबा जी के साथ राहुल और बंटी 
राहुल को लगा की बाबा जी के रूप में साक्षात् शिव चले आ रहे है ."डाक्टर साहब  उस दृश्य को अब भी जब याद करता हूँ तो मुझे यही लगता है की मैने अपने गुरु बाबाजी के रूप में साक्षात् शिव के दर्शन किये. और यही नहीं जब जब नवरात्र की आठवी तिथि में बाबा जी के दर्शन हुवे मुझे शिव ही दिखलाई पडे ."
धन्य है राहुल ,धन्य है उसकी भक्ति .

कितना सुंदर भाव है ,मोल देकर भी इसे ख़रीदा  नहीं जा सकता ,यह अमूल्य  है 

गुरुर देवो महेश्वरः 

जय गुरु महाराज की जय