29 अप्रैल 2011

अमित और राशी

गुरुदेव के परम और आशीष में डूबे अमित और राशी 
गुरुदेव के साथ उठते बैठते बहुत सारी बातें होती है .देश दुनिया , राजनीती  ,पाक विद्या ,क्रिकेट  इत्यादि सामायिक बातें होती है .कई बार तो कुछ विषयों पर जब मै कोई धारणा नहीं बना पाता हूँ  तो गुरुदेव के विचारों से खुद के विचार बन जाते है और सोच को नई दिशा मिल जाती है .

घर परिवार और कामकाज के बारे में गुरुदेव से बहुत बहुमूल्य दिशा निर्देश मिलता है. आज हम सभी गुरुभाइयों के जीवन में रूपांतरण आया है उसका मुख्य कारण घर परिवार और आजीविका के बाबत सही दिशा है .इसमें गुरुदेव के सत्संग और आशीष का बहुत ही बड़ी भूमिका है .

अमित शर्मा जी जो मेरे गुरुभाई है और पिछले पांच  साल  से गुरुदेव से दीक्षित  है.इनका  संन्यास नाम स्वामी आनंद शिवा है . पांच साल पहले जब ये पहली  बार गुरुदेव के पास आये थे तब इनकी समस्या थी की इनका विवाह नहीं हो पा रहा था . विवाह में इनकी पत्नी राशी के घर वाले राजी नहीं थे और अमित बहुत जादा  उत्सुक थे .दूसरी समस्या थी की राशी और उसके घर वालों को बहुत जबरदस्त   बाहरी बाधा थी .

गुरुदेव ने दोनों की पत्रिका को देख कर मुझसे कहा " ये अमित शादी के लिए मरने को उतारू है और पत्रिका में विवाह मिलान बहुत अच्छा नहीं दिख रहा है .तू बता इस शादी के लिए ज्योतिष की दृष्टी से किस प्रकार से अनुमति दी जाये ."
विवाह के बाबत ज्योतिष के अनुसार सारी बातें अमित अच्छे से  को बता दी गयी .  पर अमित के सर पर तो जैसे भुत सवार था की शादी ही करूंगा .वो इस कदर दीवानां था की ज्योतिष  की प्रतिकूल  बातों को सुनकर ज्योतिषियों के ऊपर भी नाराज हो जाता था .अंत में गुरुदेव ने कहा की अगर यही नियति है तो अपनी  जिम्मेवारी  पर तू शादी कर ले .बाकि जैसे ही राशी तुम्हारे घर की बहु बन जाएगी तो उसकी बाहरी बाधा को मै ठीक  कर दूंगा .अमित और राशी की शादी सकुशल हो  इसलिए विशेष पूजा भी गुरदेव ने की .उसी समय 2006 को  भैरव बाबा की पूजा गुरुदेव ने हमारे सभी गुरुभाई लोगों के हित में भी  की .अमित और राशी का विवाह आर्य समाज की रीति से संपन्न हुआ .बाद में राशी की बाहरी  बाधा  की समस्या भी गुरुदेव ने ठीक कर दी .

अब जब भी राशी अमित   की बात पति पत्नी विवाद के कारण गुरुदेव के पास  आती है तो गुरुदेव समझा देने के बाद प्रारब्ध की बात अवश्य दोनों को बोल  देते है और उनके अपने विवाह विषयक चुनाव की बात याद दिला देते है.


इसी सन्दर्भ में एक घटना याद आ गयी .एक दिन सत्संग में राशी और अमित आये हुवे थे .किसी बात को लेकर राशी अमित के ऊपर बहुत जादा नाराज हो गयी .और जब   राशी नाराज हो जाये तो भूकंप आ जाता है .
तभी गुरुदेव ने कहा की तुम सभी स्त्रियों के पतियों में बहुत सारी खासिअत  है और इनका सत्संग में आने के कारण बहुत सकारत्मक परिवर्तन हो रहा है .गस्से से भरी राशी  ने सबके सामने गुरुदेव को कहा "आपकी बात तो  ठीक  है स्वामी जी पर आप मेरे अमित की एक भी खासियत  बता दीजिये तो मै मान जाऊं ."( राशी चूँकि अमित की सारी बातें जानती है तो बडे शान से बोल दीं .)
गुरुदेव ने प्रेम भरी मुस्कराहट के साथ तुरंत कहा "एक तो मै अभी बता देता हूँ  सबसे पहली खासियत  तो अमित की  ये है की इसने तुमसे शादी की है "इतना सुनने के बाद तो राशी शरमा गयी  और बोली "हाँ स्वामीजी ये बात तो सोनू में है "(प्यार से राशी अमित को सोनू बोलती है )


एक दिन  सत्संग में हम   सभी गुरुभाइयों  की प्रगति पर बात चल रही थी . गुरुदेव सबकी अवस्था के बारे में बता रहे थे  तब मैने गुरुदेव से पूछा की मेरी अपनी अध्यात्मिक  प्रगति कैसी है .
 " तुम्हारा ठीक चल रहा है . किसी भी परिस्थिति में तुम मंत्र जाप ,साबर,सत्संग ,हवन,प्राणायाम ,आहार संयम  को मत छोड़ना. इसको जीवन भर करते रहना . ऐसी स्थति में मै मृत्युपरांत भी तुम्हारे हित में कार्य करते रहूंगा .और उस समय यह कार्य मेरे लिए इस वक्त के बनिस्बत जादा आसान रहेगा. गुरु और इस्ट की सदैव पूजा भक्ति करते रहना " गुरुदेव ने मुस्कुराते  हुवे कहा .


जय गुरु महाराज की जय