26 अप्रैल 2011

तुम दो चीज मत करो .पहला बीसी और दूसरा शराब

गुरुदेव स्वामी चिन्मय योगी 
"सत्संग में मेरे दोस्त हबीब आये हुवे है 
हबीब सात आठ साल पहले भी ध्यान केंद्र आये हुवे है .गुरुदेव से उनका परिचय है .आठ साल पहले हबीब शहर के बड़े अंग्रजी के आध्यापक थे और उनकी कोचिंग बहुत जादा अच्छी चलती थी . पर बाद से  सालों में उनकी कुछ चारित्रिक कम जोरियों  के कारण उनका धन ,मान , पारिवारिक शुख नस्ट हूँ गया . अब गये एक साल से उन्होंने मदिरा से तिलांजलि लेकर अपनी अच्छी स्थिति पुनः प्राप्त करने के लिए प्रयास कर रहे है .
हबीब अपने दोस्त गिन्नी को लेकर ठीक साढे चार बजे ध्यान केंद्र आ गए .
उस समय मेरे गुरुभाई भी नहीं आये थे 
मैने उनका स्वागत किया और हम तीन आपस में चर्चा करने लगे .मैंने हबीब की पत्रिका देख कर उसको कुछ रत्नों और व्यावहारिक बातों को पालन करने के लिए सलाह दी और भविष्य के लिए आगाह किया की और आगे जीवन में किसी भी तरह का नुक्सान न हो इस प्रकार के आचरण की सलाह दी .
गुरुदेव कुछ समय के बाद ऊपर सत्संग हाल में आये .
बाकी सब लोग भी आगे .सत्संग हाल खूब भरा लगने लगा .
सब आपस में मस्ती भी कर रहे थे और आई पी एल का आनंद भी ले रहे थे .
बीच बीच में गुरुदेव भी आनंद दाई बातों के बीच अपनी कल्याण कारी सलाह भी दे रहे थे .

हबीब ने कहा " गुरुदेव आपका आशीर्वाद चाहिए . मुझको आब जीवन में आगे ही बढ़ाना है "

गुरुदेव ने प्रेम भरी मुस्कराहट से कहा " मेरा आशीष तो हमेशा ही है .मैंने तो तुमको आठ साल पहले इसी जगह कहा था की तुम दो  चीज  मत करो .पहला बीसी और दूसरा शराब . पर तुम माने नहीं .और देखो इसी दो कारणों से तुम्हारी सारी सफलता  हाथ से चली गयी . आब और भविष्य में इन्ही दो से बच कर चलोगे तो तुमको सफलता मिलेगी ."
"गुरुदेव मै कोशिश करूंगा  की आगे ऐसा मत हो ...और मुझे सफलता ही मिले ." हबीब ने कहा
गुरुदेव मेरी पत्नी मेरे साथ रहने आएगी की नहीं ?"   
देखो पत्नी और तुम्हारे घर वालों के साथ कलह का तुम्हारा योग है .इसलिये तुमको ही बैक गेयर लगा कर उसको मना कर  घर लाना चाहिये ." गुरुदेव ने कहा .
"जी गुरुदेव " हबीब  ने कहा .
फिर रात में गिन्नी और हबीब से मिलने प्रणय भी ध्यान केंद्र आया 
सभी आगतुक लोगों के लिए भोजन बन चूका था 
सबने प्रेम से भोजन का आनंद लिया .
गिन्नी और हबीब को खाना विशेष रूप से पसंद आया .गुरुदेव यह देखकर आनंदित हुये .