22 अप्रैल 2011

अपनी माँ को घर से बाहर निकालने पर तुले है

गुरुदेव स्वामी चिन्मय योगी
रिखू  और उसकी पत्नी रमा ने अपने पिता की मृत्यु  के बाद अपनी माँ को बोझ समझ कर पालने लगे . रिखू की पत्नी रमा ने उसके मन में अपनी माता के लिए सारे अच्छे भाव मिटा दिए. 
रमा के बच्चे अब कॉलेज में पढने लगे है. खर्चा उनका मज़े से चल जाता है रिखू की कमाई अच्छी है  .

 रिखू की बहन  हमारे मुह्हले में रहती है .वो अपनी माँ को लेकर  बहुत परेशान है. उसकी माँ चूँकि अनपढ़ है  इसलिए उसके भाई और भाभी ने मिलकर उसकी सारी संपत्ति अपने नाम कर ली है .
अब वो लोग अपनी माँ को घर से बाहर निकालने पर तुले  है. माँ को रिखू की बहन के पति ने बोल दिया है की अगर इतनी परेशानी है तो बोरिया बिस्तर बांध कर मेरे घर आ जावो . माँ  भी जिद  पर है की अपने घर पर ही मरूंगी पर  दुसरे घर नहीं जाउंगी .

लोगों ने रिखू की पत्नी रमा को समझाया की आप अपनी सास के साथ ऐसा मत करो .जो जैसा बोता है वैसा ही काटता है .माँ को परेशान करने से आपके बच्चे भी आपको बाद में वैसा कर सकते है .इतना सुनाने पर रमा बोली " मै क्या अनपढ़  हूँ जो बिना जाने अपने बच्चों के हाथ में सारी संपत्ति लिख दूँगी ."

अहंकार और विभ्रम ने उसके संस्कार नष्ठ  कर दिए है.

( गुरुदेव ने मुझे एक ऐसा परिवार दिखाया  है जिसमे  जिस बहु ने अपने सास ससुर को मारा पीटा और भूखा रख कर मार दिया उसकी बहु  ने भी  ठीक वैसा ही उसके साथ किया )