2 जून 2011

"मै तो थोड़े से दाना दोस्तों की तलाश कर रहा हूँ ."

भगवान् श्री रजनीश (ओशो ) के  अनमोल पत्र 
 जो उन्होने स्वामी चिन्मय योगी (श्री रजत बोस )
 जी को लिखे 











17 jan 1983 oregon usa
प्रिय योगी ,
प्रेम ,
आपका पत्र  पाकर आनंद  हुआ .
इस पागलपन   की    मस्ती   लें ,
क्यूंकि यह पागलपन सौभाग्यशालियों को उपलब्ध होता है .
अगर गृहस्थी  से थोडा समय निकल सको तो "जुलाई के उत्सव "
पर " यहाँ आना सुंदर होगा "

"मै तो थोड़े से दाना दोस्तों की तलाश कर रहा हूँ .

थोड़े से समझदार सन्यासी मुझे चाहिये .

और यह काम होगा ,यह ज्योति जलेगी .

ये इशारे ऊपर से आ गये है की ज्योति जलेगी ."

वहां सभी को प्रेम 

भगवान् श्री के आशीष
माँ आनंद शीला

1 टिप्पणी:

  1. बहुमुल्य पत्र हैं मित्र
    इनसे रुबरु कराने के लिए आभार
    अगर स्केन कापी लगाते तो उत्तम होता।

    उत्तर देंहटाएं