3 जून 2011

"शिष्य गुरु से अलग नहीं हो सकता . गुरुमय होकर जीता है "

                                                   
   भगवान् श्री रजनीश ( ओशो ) के अनमोल  पत्र 
                जो उन्होने स्वामी चिन्मय योगी  
                  (श्री रजत बोस )जी को   लिखे 









RAJNEESH FOUNDATION INTERNATONAL
P.O. Box-9,Rajneeshpuram,Oregon 97741, USA
(503) 489-3301
२५-७-८३
प्रिय चिन्मय योगी जी ,
                      प्रेम 
आपका पात्र पाकर खूब आनंद हुआ .

"शिष्य गुरु से अलग नहीं हो सकता .

एक बार शिष्य हो जाये ,

एक बार झुक जाये और जागने  का रस ले ले ,

एक बार समर्पित हो जाये ,

एक बार प्रेम की लपट उसके भीतर उठ जाये 

और प्रेम के स्वाद पकड़ जाये - बस .

 गुरुमय होकर जीता है "


फिर गुरु में ही जीता है
भगवान् श्री के आशीष 
माँ आनंद शीला 

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