2 जून 2011

ध्यान केंद्र में शनि भैरव पूजन हवन संपन्न

नीरव ओशो  ध्यान केंद्र में शनि भैरव  पूजन हवन संपन्न 

अनुराग भैया राजू पिंकू  एवं गुरुदेव स्वामी चिन्मय योगी ( श्री रजत बोस )

एक जून को अमावस्या है . अब से यह निर्णय लिया गया है की प्रत्येक अमावस्या को हवन किया जाएगा .इस निर्णय में मेरा बहुत बड़ा हाथ है .गुरुदेव से अनुमति मिल गयी है .
गुरुदेव ने कहा " हवन करना तो बहुत उत्तम कार्य है .तुम लोग साबर भी कर चुके हो .हवन तो जरुर करो .अमावस्या  भी बहुत बढ़िया दिन  है .
मैने पूछा " गुरुदेव किस मन्त्र का हवन करें ?"
शनि भैरव हवन 


"महाकाल के मन्त्र का हवन करो .भैरव बाबा और बटुक नाथ की पूजा से हड्डी महाराज की पूजा भी हो जाती है .आखिर महाकाल हड्डी महाराज के भी आराध्य देव है .महाकाल की पूजा से पत्रिका  के और जीवन के भी बहुत बड़ी बड़ी विघ्न बाधाएँ दूर होती है ." 
गुरुदेव से मैने पूछा "साबर मन्त्रों का भी कर सकते है क्या ?"
"साबर का करोगे तो तुम गप्पू और हेमंत ही कर सकते हो .सभी को शामिल नहीं कर पावोगे ."
"आपने मेरी समझ की जादा स्पस्ट कर दिया .सबको शामिल करना ही है .सबका लाभ हो ,सामूहिक हवन  हो तो ही जादा आनंद है ."
अमावस्या हवन 


"भैरवी से बात हुई है उसने कहा है की शनि अमावस्या की पूजा भी तुम लोग जोड़ लो .पहले शनि के मन्त्र से आहुति के बाद भैरव और बटुक के मन्त्रों से हवन करो .तुम लोगों को दोहरा लाभ होगा ."
हेमंत ने पूछा " गुरुदेव क्या आपकी भैरवी माता से रोज बात होती है ?"
"नहीं .जब काम होता है तभी बात होती है .उसको मुझसे बात करने के लिये वहां सभी चीजों से आफ होना पड़ता है ." गुरुदेव ने कहा .
स्वामी आनंद चैतन्य (डॉ सत्यजीत साहू )
डॉ सत्यजीत साहु (स्वामी आनंद चैतन्य )
डॉ सत्यजीत साहू (स्वामी आनंद चैतन्य )
पिंकू सत्तू गप्पू अनिल हेमंत हवन करते हुवे 
मैने हवन के लिये  धयान केंद्र के अलावा आकाश ,चंदू , रोहित ,रितेश और प्रवीण को कहा था .आज सिर्फ चंदू और आकाश ने मुझसे संपर्क किया .मै समझ गया की बाकि लोग के प्रारब्ध में हवन का हिस्सा बनाना नहीं है .चंदू को मैने सीधे पहुचने के लिये कहा .आकाश का फ़ोन आया तो मै उसके पास पंहुचा और दोनों साथ में ध्यान केंद्र पहुचे .

गप्पू ,पिंकू, राजू ,अमित ,हेमंत ,अनिल पहुच गये थे .मुंग बडे  का प्रसाद तैयार किया गया .अनिल अपने  स्वभावतः हंसी मजाक करने लगा और साथ ही साथ जल्दी जल्दी सभी तैयारी को करने लगा . उसको रात्रि के कार्यक्रम को जल्दी से निपटा कर घर भागने की जल्दी रहती है .
उसका शनि महादशा का समय ख़राब आने वाला है इसलिये गुरुदेव ने उसे हवन के लिये विशेष रूप से बुलाया है .इसी बीच सूरज भी आ गया .सूरज भिलाई से रात गये आया है इसलिये रात्री का भोजन यही बनाने का भी तय किया गया .पेंच भात बनाने की तैयारी भी कर दे गयी .चंदू आया था तो उसे अंडा और आलू लाने के लिये कहा गया .
आहुति देते हुवे 
हवन का कार्यक्रम शुरू किया गया .गुरुदेव से आज्ञा ले कर सबको मन्त्र और विधि बताई गयी फिर  पूजन और आहुति की गयी .सबने आहुति डाली .बाद में गुरु माँ और बुआ जी ने भी आहुति डाली . सबने  दक्षिणा दी और प्रसाद ग्रहण किया .
मैने गुरुदेव से कहा "आज हवन की अग्नि बहुत तीव्रता से प्रज्वलित हो रही थी .उसकी लपटे शरीर से भी टकरा रही थी ."
"हाँ ,आज लपटे काफी ऊँची तेज थी .यह हवन के सफल होने का संकेत  है ." गुरुदेव ने कहा .
हवन में शामिल पिंकू ,सत्तू ,गप्पू 
अनिल ,आकाश चंदू और अमित चले गये .पिंकू को गप्पू ने उसके कंपनी के फोर्मेट भरने के लिये दिशा निर्देश दिया .पिंकू को कापी किताब लेकर पड़ते देख कर गुरुदेव  गप्पू से कहा " पिंकू को पढते देख कर मुझे सुखद आश्चर्य हो रहा है ."
सामूहिक भोजन 
भोजन  के बाद सत्संग बैठी तो सबके लिये रत्न निकला गया .पिंकू को अपने ब्रेसलेट के लिये रत्न मिला .गुरुदेव ने गुरु माँ के लिये लाकेट का रत्न निकाल कर गप्पू की दिया और कहा की उसको लाकेट देने से भैरवी को उपहार देना हो जाएगा .
हेमंत और सूरज के अंगूठी के लिये भी रत्न गुरुदेव ने दिया .
गुरुदेव की मालिश गप्पू ने की . हेमंत  जज बनने पर क्या क्या करेगा  इस बात को लेकर हेमंत से सब मजाक करने  लगे .बाद में सत्संग सभा विसर्जित हुई .गुरुदेव और समस्त देवी देवता तथा हड्डी महाराज को प्रणाम करके सबने प्रस्थान किया .

जय गुरुमहाराज की जय 
जय भैरवी माता की जय 
जय इस्ट देव साईं बाबा की जय 
जय नर्मदा बाबा की जय 




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