16 मई 2011

नास्तिक व्यक्ति को प्रमाण मिलने से वह जादा आस्तिक हो जाता है ."

१५ मई २०११ 

गुरुदेव स्वानी चिन्मय योगी जी के साथ डॉ सत्यजीत साहू 

आज रविवार सत्संग  का दिन  है . पिंकू हेमंत सूरज  आये हुये है. सूरज ने निर्णय लिया है की पेच भात बनायेंगे .उबले  आलू और अंडे के साथ पेच भात का सूरज को बहुत शौक हो गया है .यह पारंपरिक बंगाली खाना है जिसे गुरुदेव ने हम सबको यहाँ बताया है .यह जल्दी बन जाता है पौष्टिक तथा आसानी से पच जाने वाला होता है .सूरज अपने घर पर भी इसे बनाकर बडे आनंद से खाता है .
आज खाना बनाने की सारी जवाबदारी सूरज ने ले ली है और बडे तन्मयता से बहुत अच्छा बनाया है .हेमंत जो पेंच भात पहली बार खा रहा है उसने भी इसकी बड़ी तारीफ की .
बातचीत करते  हुये  गुरुदेव स्वामी चिन्मय योगी जी 


बाबा पात्रे और उसके मित्र  आये और गुरुदेव के साथ  थोड़ी देर  बातचीत करके चले गये .

.इसी बीच अनिल आ गया .काफी देर तक अनिल के साथ  गुरुदेव ने बातें की .पुरानी बातों का उल्लेख करके गुरुदेव बता रहे थे की अनिल के जीवन में बहुत जादा (१८० डिग्री) परिवर्तन आ गया है जब से वो सत्संग में आकर गुरुदेव की बातों को मानने  और विश्वास करने लगा है .
"मैने इसकी पीड़ा को अपने बचपन में भोगा है इसलिये अनिल के कल्याण के लिये मैने बहुत किया .आज इसका जीवन पहले के मुकाबिल बहुत अच्छा  हो गया  है ." गुरुदेव ने कहा .
"जी स्वामीजी  जी . आज आपकी कृपा से मेरा जीवन बहुत ही अच्छा हो गया है .समाज में प्रतिस्ठा है परिवार है पत्नी है बच्ची है शानदार कैरियर है . अब   तो पहले के जीवन के बारे में सोच कर भी अच्छा नहीं लगता .यह  सब आपकी कृपा से हुआ है .मुझे अभाव और दुख  ने नास्तिक बना दिया था .पर अब आपकी कृपा से मेरा  विशवास हड्डी महाराज ,नर्मदा बाबा ,और आपमें जम गया है ." अनिल  बोला 
" .तेरे कल्याण के लिये मैने  बहुत पहले से ही तैयारी शुरू की  थी . जब तेरा यंत्री पूर्णिमा के दिन जगा उसी दिन मुझे पता चल गया की तेरा कल्याण बहुत जादा  होगा मै जान  गया  था की तू आस्तिक बन जायगा  .अभी भी मै बोलता  हूँ की तुझे धन की कभी कमी नहीं होगी पर तुझे अपने स्वास्थ्य का ध्यान रखना होगा " गुरुदेव ने कहा .
गुरुदेव स्वामी चिन्मय योगी जी के साथ लक्ष्मण झुला हरिद्वार में 

एक बार सत्तू  ने पूछा " स्वामी जी  अनिल तो यहाँ बहुत जादा नहीं आता और आपकी भक्ति भी नहीं करता फिर भी आप उसके कल्याण के लिये इतना प्रयास करते है ?"
गुरुदेव ने कहा "मै किसी के कल्याण के लिये निर्णय स्वयं लेता हूँ .इसमे मै यह नहीं देखता की वो आ रहा है की नहीं आ रहा है .रही बात भक्ति की तो नास्तिक व्यक्ति को प्रमाण मिलने से वो बाकि लोगों से जादा आस्तिक हो जाता है ."

अनिल के बच्चे के जन्म दिन का कार्यक्रम १७ मई को है .उसका निमंत्रण उसने गुरुदेव और समस्त गुरुभाइयों को दिया और विशेष रूप से सबको आने के लिये कहा .११ बजे वो चला गया .

हेमंत गुरुदेव से प्रश्न पूछ  रहे है. गुरुदेव उसका समाधान दे रहे है .
गुरुदेव स्वामी चिन्मय योगी जी के साथ हेमंत 

"गुरुदेव मै देखता हूँ की आपके पास  जिनको लाभ मिल जाता है वो यहाँ से भाग जाते है ." हेमंत ने गुरुदेव से कहा .
"यहाँ कौन आता है और कौन टिका रहता है इसकी मै फिर्क ही नहीं करता .यह मेरे गुरु ओशो ही तय करते है .इस बाबत मेरी लम्बी चर्चा भगवान् श्री ( ओशो ) से हुई थी .इस प्रकार ध्यान केंद्र चलाना युवा लोगों को एसोटेरिक जगत के बाबत तैयार करना और उनके साथ मित्रवत रहने की बात जब हुई तो मैने तो साफ कहा दिया की ये सब मुझसे नहीं होगा .तब भगवान् श्री ने कहा की तुझे कुछ नहीं करना है मै करूंगा .मुझे तुझसे काम लेना है .मै भगवान् को यह बोलता भी था की चिन्मय योगी तुम्हारा है अब तुम जानो .मुझे कभी भी यह नहीं  लगा की तुम लोगों को मैने बुलाया है या मैने भगाया है .यह सब भगववान की मर्जी है .मेरे अंदर से भी वाही तुम्म लोगों को मार्गदर्शन करते है .मेरी स्वयं की स्थिति beyond की हो गयी है .मेरे शरीर को भी कब तक रखना है यह वो ही तय करेगे .मै तो बस बांस की पोंगरी हूँ .इसमे  मेरे  गुरु का  ही संगीत निकलता है .यही बात भगवान् श्री बार बार बोलते थे की बांस की पोंगरी बन जावो ." गुरुदेव ने कहा .
गुरुदेव ने मैत्रेय जी के प्रेम और अनुग्रह की बातें बताई .रात्रि गहरा जाने से सत्संग में  बहुत सारी बातें गुरुदेव बताने लगते  है .इन रात्रि कालीन सत्संग में और जादा आनंद आता है .



अंत में एक कविता 

आईये   हाथ उठाएं  हम भी 
हम    जिन्हे रस्मे- दुवा   याद नहीं 
हम   जिन्हे   सोजे- मुहब्बत के सिवा 
कोई बुत    कोई खुदा       याद नहीं 
(बिरहनी मंदिर दियना बार पृष्ट ८० )



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