4 मई 2011

८० :२० प्रिंसिपल आध्यात्म और भौतिक जगत के लिए एप्लाई होता है

डॉ सत्यजीत साहू (स्वामी आनंद चैतन्य )
८० :२० प्रिंसिपल आध्यात्म और भौतिक जगत के लिए भी एप्लाई होता है .त्यागी व्यक्ति  के लिए  ८० प्रतिशत अध्यात्म और २० प्रतिशत भौतिक जीवन का अनुपात आवश्यक है वहीँ आम साधक व्यक्ति के लिए ८० प्रतिशत भौतिक और २० प्रतिशत अध्यात्मिक जीवन जरुरी है .
भारत  में  आम जन जीवन की परम्पराएँ इस प्रकार से संस्कृति के अनुसार आबद्ध है की तीज त्यौहार को ही पूजन पूर्वक मनाने और माता पिता गुरु की सेवा करने से इस अनुपात का पालन हो जाता है .
आत्म शुद्धी के तरफ जाने और सत्संग का भाव रखने से व्यक्ति की चेतना का विकास सहज ही होते रहता है .
भारत के वातावरण में वास्तव में अध्यात्मिक स्पंदन विद्यमान है जो साधक को साधना के सारे उपकरण प्रदान करता है .
जीवन के सभी आयामों के बारे में भारतीय दर्शन ने अपने विचार रखे है और समय समय पर संतों और समाज सुधारकों ने इस पर सामायिक व्याख्या दी है .
तो मार्ग क्या है ?
आप जैसा चाहते है उसी प्रकार के मार्ग आप अपना लेते है .
अगर आप शांति और प्रगति से भरा भौतिक जीवन जीना  चाहते है  तो ८० :२० प्रतिशत के फोर्मुले को जीवन में अपना कर इसको प्रयोग की भांति ३ महीने कीजिये . आपको समाधान प्राप्त होगा .

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