2 मई 2011

फिल्म जो गुरु घासी सी दास के ऊपर बन रही थी

गुरुदेव के छाया में गप्पू अमित सत्तू 
एक मई २०११,आज रविवार सत्संग का दिन है 
.मै आज थोडा लेट पांच बजे  ध्यान केंद्र  आया .गप्पू भैया  ने   दोपहर से आकर कूलर ठीक कर वाया है .सूरज आकर माताजी को बाजार करवाने के लिये चला  गया मुझे याद आया की मै  बी पी मशीन नहीं ला पाया इसलिये वहां से निकल  कर लेने के लिये गया .रास्ते में गयात्री पीठ जाकर हवन कुंड  और हवन सामग्री भी  खरीद लाया .मुझे वहां की हवन सामग्री जादा अच्छी लगती है .
अमित और राशी 10   मई के बच्चे के जन्म दिन के कार्यक्रम का कार्ड देने के लिए आये है .गुरुदेव को विशेष रूप से निमंत्रित करने के लिये वो दोनों उनके रूम में है 
ऊपर सत्संग हाल में बैठकर हम सब आई पी एल देख रहे है और खाने की तैयारी कर रहे है .
गुरुदेव उपर आ गये .
हेमंत अपने साथ अपने दोस्त परेश को लेकर आये हुवे है .
परेश छत्तीस घड़ी फिल्म प्रोडूसर है और स्वयं की रेकॉर्डिंग स्टूडियो भी चलाते है . उनकी  गाड़ी से   एक्सिडेंट होकर उनके पार्टनर का देहांत दो माह पहले हुआ  और एक माह पहले उनकी बहन ने आत्महत्या कर ली . इसके चलते उनकी फिल्म जो गुरु घासी सी दास के ऊपर बन रही थी वो 75 प्रतिशत बनकर बंद हो गयी .परेश आर्थिक मानसिक और पारिवारिक रूप से परेशान है और उसने ये बात गुरुदेव को बताई . 
गुरुदेव ने उसकी पत्रिका देख कर कहा " अभी परेशानी का समय है और ये सब लगा रहेगा .जो एक्सिडेंट  हुआ  है उसमे तुम कुछ नहीं कर सकते .वो होनी है .हाँ तुम रत्न धारण कर लो .सत्तू तुमको जो रत्न दिया है वो बिलकुल ठीक है .इससे तुमको लाभ होगा .   बाहरी बाधा के लिए हेमंत और सत्तू को सिखा दिया हूँ उनसे बात करके तुम बंधन की क्रिया करवा लो .इतना तो तुम कर ही सकते हूँ .बाकि धीरे धीरे ठीक हो जायेगा ."
परेश ने पूछा " बाबा घासीदास की फिल्म में किसी दोष के कारण तो ये सब  हादसा नहीं हो रहा है .कहते है की अगर संत के संदर्भ में गलती हो जाये तो कई प्रकार के नुकसान होने लगते है ."
 "ऐसा कुछ नहीं है . जो तुम्हारे साथ हुआ  वो एक्सिडेंट है और इसमे तुम्हारा या फिल्म का कोई हाथ नहीं है . तुम्हारा अभी अगस्त से अच्छा होगा .तुम अपना काम करते रहो ."   
"गुरुदेव आपका आश्रीवाद रहेगा तो सब  अच्छा  हो जाएगा "
"हाँ मेरा आश्रीवाद है " गुरदेव ने कहा .
थोड़ी और बातचीत करके परेश चले  गये .
हेमंत भी जाने वाला था पर हम सबने उसे रोका और खाना खा कर जाने के लिये कहा .
इसी बीच अनिल और ताम्बु आ गये .
ताम्बु  सत्संग के पुराने सदस्य है और कई साल बाद आये है .हेमंत और ताम्बु आपस में मिलकर प्रसन्न हुवे .
ताम्बु ने आकर सारी पुरानी नयी बाते की और हम सबको बहुत आनंद आया .ताम्बू की बात बताने की खास शैली ने सबका बहुत मनो रंजन किया 
सबने कढ़ी भात का प्रसाद प्राप्त  किया .

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