23 अप्रैल 2011

शिव जी की चालीसा पर अटूट विश्वास


गरियाबंद का विशाल शिवलिंग

मेरे  एक परिचित है श्री एस के दीक्षित जी जो वर्मान में गोदावरी इस्पात के ड्राइंग विभाग के हेड है .दीक्षित जी बहुत अच्छे साधक है और देवी माँ के भक्त है .

उनसे बात चल रही थी की उन्होंने अपने जीवन की घटना सुनाई. जब वो अट्टारहउन्नीस साल के रहे होंगे तब  अपने गाँव चकर भाठा   में खूब बिंदास जीवन बिताया .चकर भाठा बिलासपुर के समीप ही एक गाँव है जहाँ सपेरों की बस्ती भी है . उन सपेरों से उन्होंने सांप पकड़ना सिखा लिया था .एक दो जहर वाले सांप को छोड़ कर वो बाकी सभी साँपों से खेल किया करते थे .कई बिना जहर के साँपों को तो वो बिल दे निकल कर खेला करते थे . इस बहादुरी में उनको खूब मज़ा  आता था .

एक दिन जब महाशिवरात्रि थी तब उन्होंने एक सांप को बिल से निकाल लिया और लोगों को खेल दिखाने के बाद उसे छोड़ दिया .आगे वो जब जा रहे थे तो एक घर में सांप निकला जिससे घर वाले शोरगुल मचाने लग गए . ये सब सुनकर दीक्षित जी ने जाकर उसको पकड़ कर जान से मार दिया .कई बार घरों में ऐसा होने पर सांप को मार दिया जाता है .


घर आकर दीक्षित जी को अपने मन में बहुत संताप हुआ .कई बुजुर्गों  भी उनको  इस काम के लिए
भूरा भला कहा था .

कुछ पूजा पाठ करने की ललक उनमे थी ही और वो बचपन में ही गाँव के  बैगा के पास कुछ तंत्र मंत्र सिख लिए थे साथ ही साथ छोटा मोटा भुत प्रेत भी भगाना सिखने की कोशिश कर रहे थे .
इसी सिलसिले में उनके हाथ एक किताब लगी .वो छोटी सी पुस्तिका थी जिसका शीर्षक था "तांत्रिक शिव चालीसा " उन्होंने उसको रट डाला था .


उस दिन उनको ख्याल आया की आज शिव रात्रि है और इस पाप के लिए उन्हे शिव जी के पास जाना ही है तो अब  जाकर शिव जी के पास इस चालीसा की सिद्धि भी कर लूंगा .
भरे मन से वो निकले तो अपने गाँव  के पास ही पीपल पेड़ के नजदीक एक शिव लिंग के पास रुक  गए . उस शिव लिंग की उस दिन पूजा भी हुई थी और उसकी मान्यता भी थी . उसी दिन उन्होंने वहां अपने कृत्य के लिए  पश्चाताप किया और शिव चालीसा को सिध्ह करने की प्रक्रिया भी की . उस किताब में लिखा था की जो भी कार्य इस चालीसा को पढ़ कर किया जायेगा वो पूरा होगा .
उन्होंने अगले दिन से लोक कल्याण  के लिए इस प्रयोग करने का  मन बनाया .और उसके बाद एक दो प्रयोग उत्सुकता में किये .उनको सारे कार्यों में सफलता मिली .इससे उनका विश्वास इस तांत्रिक शिव चालीसा में जम  गया .
दीक्षित जी कहते है " जिस शिव चालीसा को तांत्रिक लिखकर विशेष बताया गया था पुस्तक में वो सामान्य शिव चालीसा ही थी और वो सर्वत्र मिलती है पर शिव जी के नाम का प्रताप ही है जो उस चालीसा से लोगों के काम बनते है और आज तक मेरा शिव जी की चालीसा पर अटूट विश्वास कायम है "
जय गुरु महाराज की जय

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें