21 अप्रैल 2011

अभ्यास करने से उत्तम गुण आ जाते है

समर्थ रामदास 
एक दिन समर्थ रामदास जी एक गाँव से गुजर रहे थे .वहां के लोगों ने उन्हें एक ठग समझ कर उनका अनादर किया .रामदास जी ने शिष्यों को कहा की आप इनका प्रतिवाद मत करो .आगे जाने पर एक नए गाँव में बहुत आदर सत्कार मिला तब भी गुरुदेव चुप रहे .कुछ अच्छे कीर्तन गा कर आगे चल दिए .
रामकुमार नामक शिष्य ने पूछा तो रामदास जी ने उत्तर दिया "रूप और लावण्य का अभ्यास नहीं किया जा सकता, स्वाभाविक गुणों के लिए कोई उपाय नहीं चलता परन्तु अवगुण छोड़ देने से चले जाते है ,अभ्यास करने से उत्तम गुण आ जाते है .जो समझ बुझ कर बर्ताव करते है वही भाग्यवान कहलाते है ,उन्हे छोड़ कर बाकी सब अभागे है "
(बोध कथा )

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