18 अप्रैल 2011

"प्यार है उनके लिए और हमसे फकत बातें है "


गुरुदेव के साथ सूरज ,पाक विद्या सत्संग

सत्संग हाल में बैठकर सब ipl  का मैच देख रहे है .सभी लोग आ गए है .क्रिकेट का मज़ा शुरू हूँ गया है सब अपनी अपनी टीम को सपोर्ट कर रहे है. उत्थपा  और युवराज के फैन पुणे को सपोर्ट  कर  रहे है . पिंकू पुणे को जितना चाह रहा है .खेल शुरू हो गया है .कमल शर्मा जी पहले आ गए है . उनसे प्रश्न पूछने और वार्तालाप के लिए सूरज को बोला पर मैच के रोमांच में कुछ भी बात नहीं हो पाई .गुरुदेव के आने पर मजाक मस्ती और बढ़ गयी .
"तुम लोग क्या चर्चा का कार्यक्रम रखे हो उसको शुरू करो " गुरुदेव ने कहा .
"गुरुदेव आप स्वयं है यहाँ और क्या चाहिए .आपके सत्संग का लाभ ही सर्वोत्तम चर्चा है " कमल ने कहा .मुझको कमल ने कहा की IPL  का मज़ा चल रहा है इस माहौल को चलने दीजीय. बाकि बातें तो होती रहेंगी और कभी बैठ जायेंगे .
सबका ध्यान क्रिकेट और चाय और मजाक में लगा हुआ है .
सूरज चाय बनाकर फारिग हुआ तो गुरुदेव ने उससे कहा " हाँ सूरज कई प्रश्न है तो पूछ ले .
"गुरुदेव सब लोग मुझको नाकारा और निकम्मा ही कहते है इसका मुझको बहुत दुख होता है .घर वाले  और बाहर में भी सब मुझको यही कहते है " यह कहकर सूरज के आँखों में आंसू आ गए .
गुरुदेव ने प्रेम पूर्वक  कहा " लोग  मुझको  भी बोलते है .पर यह बोलना उनकी समस्या है मेरी नहीं . मै  अपने विवेक से सोचता हूँ चिंतन करता हूँ लोगों के बोलने ,नहीं बोलने ,प्रशंसा करने निंदा करने से आब मुझे कोई फर्क नहीं पड़ता .मै जनता हूँ की यह उनकी समस्या है मेरी नहीं . मुझको मेरे गुरुदेव ने भी यही कहा की तुम अपनी जागरूकता से जीना कौन क्या कहता है क्या नहीं कहता है इसकी जरा भी फ़िक्र  नहीं करना ."
बहुत प्रकार की बात करने के बाद सूरज को अच्छा लगा
गुरुदेव ने सबको प्रसाद दिया .एक बार सबको देने के बाद सूरज को और अलग से प्रसाद दिया .सूरज के मन में और प्रसाद लेने की बात थी ,दुबारा मिलने से उसका मन प्रसन्ना हो गया .
तभी गुरुदेव ने कहा "मुझको एक गाने की लाइन याद आ गयी "प्यार है उनके लिए और हमसे फकत  बातें है " सूरज इस ध्यान केंद्र की जान है अगर ये नहीं आये तो मज़ा ही नहीं आता ."

सभी लोग हँसे पड़े .
सूरज के दिल में सुकून आया .

सदगुरू दावं बीछाइया
खेले दास कबीर

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