6 जून 2010

शाबर, चंडीपाठ, अघोर तंत्र की क्रियाकारी शक्तियां रात को ही सक्रिय होती है


.आज शनिवार है .सिर्फ पिंकू और मै रात के सत्संग में आये हुए है .गप्पू अपने २२ दिन के कम्पनी के ट्रेनिंग के लिए निकल चुका है.

मै अपनी तंत्र पूजा करके भोजन करने के लिए तैयार हुआ वैसे ही गुरुदेव ऊपर ध्यान केंद्र आये .हम दोनों  ने प्रणाम किया .मैंने भोजन किया .पिंकू गुरुदेव की मालिश करने लगा .
"स्वामीजी.आपने पिछले शनि वार को हमको शाबर हवन  करते समय प्रचंड भैरव और वैदिक रीती के  देवी तथा अन्य शक्ति मन्त्र करने के लिए मना  किया था  .इसका कारण  मुझे समझ में अब आया .मुझे आपके बताने से ही नयी दृष्टी मिली ." मैंने कहा .
"इसी  कारण से तो सदगुरु की आवश्यकता है . देखो तुम लोग क्या कर रहे थे .बैठे थे तुम शाबर तंत्र हवन के लिए .उसमे तुम पहले वैदिक रीती से देवी भैरव शिव की पूजा (मन्त्र) करते थे .उसके बाद शाबर मन्त्रों से हवन करते थे .इसी बीच तुम प्रचंड भैरव का भी हवन  करते थे .कर तो रहे थे  तुम सारा कुछ जादा  शक्ति लगा पर तुम्हारी सारी  पूजा निष्फल जा रही थी ."
".वैदिक के साथ शाबर तंत्र की और साथ में प्रचंड भैरव की पूजा करके तुम एक ही साथ वैदिक शाबर और अघोर की पूजा करते थे .अब इस  प्रकार की पूजा एक ही सिटिंग में करने से ही पूजा निष्फल हो रही थी."
"सब विधि के गण यक्ष ,गंधर्व ,प्रेत ,पिशाच अलग अलग होते है सबको एक ही साथ बैठा  कर भोजन नहीं  खिलाया नहीं जा सकता .इससे उनके प्रतिनिधि गण नाराज़ होते है .और आते नहीं है या लौट जाते है .तुमको इस प्रकार से पूजा का लाभ नहीं मिल सकता ."
".इस बात को और अच्छे से  समझो .जैसे एक ही कौर में कोई यदि  एलोपैथी आयुर्वेदिक और होमीओ पैथी की दवा खायेगा तो उसका क्या होगा .तुन डाक्टर हो समझ सकते हो "
"हाँ, इससे तो मर्ज ठीक नहीं होगा." मैंने कहा .
"जैसे एक ही समय में कोई चाय पिए .चाइनीज़ और साउथ इंडियन भी साथ में खा ले तो क्या होगा  .मामला ख़राब ही होगा .इसलिए तुमको बोलता हूँ की आप एक समय में एक को ही करो .जब शाबर तंत्र पूजा या हवन करो तो उस समय उसी को करो .जब वैदिक करो तो उसी को करो .जब प्रचंड भैरव करना हो तो उसी को करो .अघोर रीती की लक्ष्मी पूजा करना हो तो उसी को करो उस समय और  किसी और विधि की पूजा नहीं करना है ."
"इसका मतलब अगर एक टाइम में करना है तो शाबर ही करें "
"देखो शाबर का तुमको इसलिए बोल रहा हूँ की तुम लोगों को भैरवी और मेरे माध्यम से उसकी सिद्दी प्राप्त हो गई है .तंत्र की यह शाखा वैदिक से कई गुना जायदा प्रभावशाली और शक्तिशाली है .जब तुम्हारे पास  जादा बेहतर विधि है तो उसको करो .अगर समय है तो वैदिक    भी कर सकते हो "
"समय तो कामधाम घर बार के बाद कम ही बचता है गुरुदेव "
"इसीलिए तो जादा बेहतर को करने बोल रहा हूँ "
"स्वामीजी मै सोचता था की बाकि लोग भी हमारे साथ बैठ कर आहुति दे सकते है "
" तुम बाकि लोगों को शाबर तन्त्र हवन  क्रिया को करते वक्त साथ में बिठा कर आहुति मत दिलावावो .बाकि लोग चूँकि दीक्षित नहीं है इसलिए तुम्हारे  साथ क्रिया में बैठने के अधिकारी नहीं है .बाकि लोग शाबर कर भी नहीं रहे है . तुमको अगर अन्य लोगों को भी शाबर तंत्र हवन का लाभ दिलाना है तो जब पूरी क्रिया संपन्न हो जाये तब उनसे तीन बार ॐ अग्नये स्वाहा बोल कर आहुति दिलावावो .इससे उनको पूरा पूरा हवन का लाभ मिलेगा ."
स्वामी जी वैदिक को दिन में और तांत्रिक और शक्ति मन्त्र पूजा को रात में ही करना चाहिए ."

"' देखो पूजा दिन और रात कभी भी करने से लाभ होगा पर जादा लाभ के लिए तंत्र को रात में ही करना चाहिए.   मै वैदिक पूजा मन्त्र जाप दिन में करता हूँ और हड्डी महाराज की पूजा अलग समय में रात्रि में करता हूँ .किसी भी प्रकार की शक्ति पूजा रात में ही जायदा प्रभावी रहती है .शाबर चंडीपाठ, अघोर इत्यादि की क्रियाकारी शक्तियां रात को ही सक्रिय होती है इसलिए रात में ही करना चाहिए ."गुरुदेव  ने कहा,
"स्वामीजी अपने मुझको एक नयी दृष्टी प्रदान की ."
"गुरु का यही तो रोल है " गुरुदेव ने कहा .
जय गुरु महाराज की जय, जय भैरवी माता की जय