1 जून 2010

यार,तुम लोग तो बहुत भाग्यशाली हो

"मै भींगता रहा, एक नशा मुझमे छाता रहा.,मलंग तू कौन है,,तुने बिना देखे मेरी ओर मेरे दिल को कैसे छु लिया .
मै चल रहा था जिस रास्ते  उसमें कितना सुंदर  मोड़ आ गया .मै मुड़ता चला गया और इस नए रस्ते मे इतनी जादा  फूलों की खुशबू थी की मेरे  जेहन में मदहोशी  छा गई  ." शानू बोलता ही रहा .

"मै क्या बताऊँ डाक्टर साहब ,बहुत अच्छा हुआ की आप मिल गए .मै तो रितेश से इस बारे में बोलूँगा ये ही सोचता रहा दिन भर और रितेश के साथ आप भी मिल गए .मै किस से बताऊँ की मेरे साथ क्या घटित हो रहा है .और ये रितेश सब जान रहा था और ये भी मजे ले रहा था ."

रितेश ने मुस्कुराते हुए कहा "मै तो खुद मजे ले रहा था और सोचा की तू भी इस चीज़ का आनंद ले ."

"मै जीवन की हर बड़ी उपलब्धियों के लिए तेरा आभारी हूँ और इस मज़े को जिसको मै इतने पल जिए जा रहा हूँ इसके लिए की तू मुझको उस मलंग मस्त के पास उसकी महफ़िल तक ले गया ,मै फिर तेरा आभारी हूँ " शानू बोला .
शानू और रितेश की बरसों पुरानी दोस्ती है और इन दोस्तों की खासियत है की आपस में एक दुसरे के अन्दर चले वाले सारे बातों को भी महसूस करते है .
 दो दोस्तों की बातचीत चल रही थी.शानू के अंदर   एक प्यार भरी मस्ती और आनंद घटित हो रहा था .
ये बहुत ही दुर्लभ घटना शानू के साथ हुई थी की एक सदगुरु के पास उसकी महफ़िल में सबसे पहली बार आये दरवाज़े पर ही लगा की अन्दर कोई है जिसको  मुझे प्रणाम करना है,अन्दर आकर प्रणाम किया ,और कोई बात नहीं हुई, किनारे ४५ मिनट महफ़िल में बैठे रहे .सारी बातचीत हो रही थी मलंग गुरु और उसके एक चेले के बीच .पर  मलंग गुरु  इस अंदाज़ में  बोल  रहे थे की ऐसा लगा की सारी शराब वो शानू के  जहेन में ही उड़ेल रहे है   और हो गया ,सत्संग का नशा शानू को .और यह आनंद शानू को रविवार रात के बाद सोमवार को पुरे दिन भर छाया रहा .मस्ती के अनोखे मखमली एहसास  जैसी स्थिति में ही पूरा दिन डूबा  रहा .

पर मेरे आश्चर्य की और एक बात थी की रितेश को इस सारे बात का एहसास उसी समय हो गया. वो इस सारे वाकये का आनंद ले रहा था .मलंग गुरु की बातों का भी ,उसके चेले के अंदाज़  का भी ,और बाजु में बैठे  शानू के परिवर्तन का भी  .
उसका आनंद इसलिए और भी बढ गया की मलंग  गुरु की बातें जो शानू की अंदर फर्क ला रही थी उन बातें को एक दिन पहले ही शानू को वो बोलना चाह   रहा था .मलंग गुरु अपने मलंग अंदाज़ में उन्ही सारी बातों को बोल रहे थे. रितेश का मज़ा और बढ गया .

शानू बोला "डाक्टर साहब मै किसान का बेटा हूँ .हमारे यहाँ आम के फल के ऊपर कोयल अगर पेशाब कर देती है तो बोलते है की फल के ऊपर से उसकी कुछ बूद नीचे के फल पर भी टपक जाती है .और उसका असर ये आता है की ऊपर वाला फल तो पक जाता है साथ में नीचे वाला फल भी आधा पक जाता है .मेरे साथ ऐसा ही हुआ .मलंग गुरु अपना प्यार और अपनी सारी शक्ति अपने उस चेले पर उड़ेल रहे और इधर मुझ पर असर होता रहा ."

मै इस अद्भुत घटना को जान कर मुग्ध हो गया और इतना ही कह पाया "यार तुम लोग तो बहुत भाग्यशाली हो "
(शानू को यह समाधी के आनंद की एक झलक थी .इसे सतोरी यानि समाधी की झलक कहते है ,यह अकारण अत्यधिक आनंद की अवस्था है )