29 मई 2010

"सारे ज्योतिषी बेकार है ,यह ठगी का व्यापार है


"सारे ज्योतिषी बेकार है ,यह ठगी का व्यापार है सब के सब धंधा करते है जिसको जैसा बन पड़ता है लूटता है ."आप फलां  रत्न पहन लीजिये ,फलां पूजा ,अनुष्ठान करा लीजिये ,आपके कष्ट दूर हो जायेंगे " बस फिर क्या है .इतना सुन कर लालच या मज़बूरी ,ज्यादातर मज़बूरी और तकलीफ में पड़े लोग खर्च करते है और अंत में उनके हाथ आती है निराशा "  गुरुदेव के पास आकर अनिल ने कहा .

डॉ अनिल वास्ती जो हमारे ध्यान केंद्र में नियमित आते है उसने कहा.

 मै भी पास में बैठा था .अनिल ने विषय छेड़ा तो सत्संग में विचार करने का मुद्दा आया .

"यार अनिल तू  कितने ज्योतिष के पास गया है और क्या क्या किया है पहले तो ये बता .सारा सुन सुन केर सिर्फ बुद्दिवादी तर्क दे रहा है की अपने स्वानुभव से बोल रहा है .आजकल ज्योतिष को गलत साबित करने का ठेका भी तथाकथित बुद्दिजीवी प्रगतिशील लोग ले करके बैठे है ,कुछ चेनल वाले भी टी आर  पी बढाने के लिए इस प्रकार की बहस आयोजित करते है .कंही उसकी बात को सुनकर तो नहीं बोल रहा है ."   मैंने भी आगे आकर कहा .
आखिर ज्योतिष का अध्ययन मै पिछले ग्यारह साल से कर रहा हूँ और लोगों को उनके कस्ट दूर करने के उपाय भी बताता हूँ .

"गया  तो मै किसी के पास नहीं हूँ पर मेरे पास बहुत मरीज आते है जो इस प्रकार की बातें करते है .मै उनके
नाम पते सब बता सकता हूँ " अनिल ने कहा .

मैंने कहा "लाभ सबको अपने अपने मन के हिसाब से मिले वैसा जरुरी नहीं है .जैसे डाक्टरी में है , कैसा डाक्टर है ,क्या अनुभव है ,कैसी दवा है ,मरीज कितने नियम से दवा खाया है ,मर्ज किस स्थिति में है ,इन सबकी विवेचना  से ही आप हिसाब निकाल सकते हो की आपके  मरीज     को कितना लाभ कितने और कैसे इलाज के बाद मिलेगा .वैसा ही ज्योतिष में भी है.
"अच्छा जिसको तेरे इलाज से लाभ नहीं मिलेगा वो भी तो यही बात डाक्टरी के बारे में बोल सकता है ."सब हंस दिए .



अनिल बोला "नहीं डाक्टरी के बारे में नहीं बोल सकता .बीमारी और इलाज का एक विज्ञानं है .कोई भी इलाज नहीं कर सकता .हाँ मै झोलाछाप डाक्टर का नहीं बोल सकता ."

"झोला  छाप ज्योतिषी भी है . ज्योतिष भी विज्ञानं ही है .आज के वैज्ञानिक भले इसे पूरी तरह साबित नहीं कर पायें और ये उनकी सीमा के कारण है .हो सकता है की भविष्य  में वो साबित कर पायें ."मैंने कहा .

अनिल बोला " ज्योतिषियों में एक रूपता नहीं है ,उनमे कई अलग अलग मत है .यह तो उलटी बात है ."


"अरे यार वैज्ञानिकों में भी अलग अलग सिद्धांत होते है .जो जितना रिसर्च करता है उसको उतनी बारीकी दिखती है .अलग अलग जगह लोगों ने अलग सिद्धांत दिए है .यह तो  ज्योतिष  की विशेषता है ." मैंने कहा .

गुरुदेव ने कहा "अच्छा अनिल ये बता की तेरी पत्नी को रत्न फायेदा किया की नहीं ?और यहाँ तेरे साथ लूट हुई क्या ?"

अनिल  हँसते हुए बोला " यहाँ तो स्वामीजी मुझे कोई लूट नहीं हुई बल्कि बहुत जादा फायदा हुआ  .रजनी मेरी पत्नी का काम तो रत्न पहनने से ही हुआ ."

"बस तो काम ही अगर हो गया तो मक्कड़ खात  पियो "गुरुदेव ने कहा .
जय गुरु महाराज की जय ,जय भैरवी माता की जय