25 मई 2010

आदि शक्ति से एकात्मता का अनुभव

आदि शक्ति से एकात्मता का अनुभव, उसकी विभूतियों और शक्तियों से एक्य कैसे प्राप्त किया जाय?
उत्तर है साधना और योग द्वारा.


साधना शब्द साध से आता है जिसका अर्थ है एक लक्ष्य की प्राप्ति के लिए अथक प्रयास .यह प्रयास ही साधना कहलाता है .इसमें सफलता सिद्धि कहलाती है .हिन्दू अर्थों में साधना का मतलब धार्मिक क्रिया होता है. साधक की स्थति द्वैत की होती है यानि साधक और उसका इस्ट .धार्मिक साधना का सर्वोच्च उद्देश्य इस्ट लोक की दिव्य आनंद और विभूति प्राप्त करना होता है . यह देव लोक का आनंद निर्वाण नहीं है .निर्वाण निरपेक्ष है.सामान्यत धार्मिक कर्म कांड साधक को योग के लिए तैयार करते है. साधना में सिद्दी योग में ले जाती है .योग में सिद्धि पूर्णता देती है ,दिव्य अनुभव देती है .


 अब साधना के बारे में कुछ और बातें .







साधना जिसकी हम चर्चा कर रहें है वो धार्मिक क्रिया है जो नैतिक ,अध्यात्मिक.लक्ष्य प्राप्ति के लिए होती है.यद्यपि इससे देव के दिव्य विभूति और सांसारिक, भौतिक प्राप्तियां भी होती है .




सिद्धि अति मानवीय शक्ति है जो प्रकृति द्वारा दी गयी शक्तियों का ही विस्तार है.
 धार्मिक कर्म कांड विचारों की शक्ति ही है जिसको हिन्दू मान्यता भौतिक शक्ति के बराबर या जायदा मानते है और इसके क्रिया से कई प्रकार के भौतिक लाभ भी प्राप्त करते है.
यह  हिन्दुओं की खासियत है .

जय गुरुदेव जय भैरवी माँ