29 मार्च 2010

प्रार्थना से आप बदलते हो, परमात्मा नहीं



"स्वामी जी जन्म पत्रिका देख कर, जब किसी का उपचार तंत्र मंत्र और रत्न से करता हूँ तो क्या इससे जीवन की सारी  समस्या का समाधान हो जायेगा ?"मैंने गुरुदेव से पुछा .
"सारी समस्या तो ठीक नहीं हो सकती, नहीं तो पत्रिका ही गलत साबित हो जाएगी .हाँ आप उसको उसकी समस्या से राहत जरुर दिलवा सकते हो ."गुरुदेव ने कहा .
"राहत  किस प्रकार से मिल सकती है ?"
" जैसे कोई समस्या आने वाली है तो उसकी तीव्रता कम हो जाएगी .अगर लाभ मिलने वाला है तो लाभ ज्यादा मिलेगा  "
"लेकिन क्या समस्या पूरी तरह से नहीं आये ऐसा नहीं हो सकता "
गुरुदेव मुस्कुरा कर बोले " बेटा ,प्रारब्ध के लिखे को तो विधाता भी नहीं बदल सकता है . मंत्र ,रत्न ,तप, पूजा ,प्रार्थना ,से जो असर आता है उस कारण व्यक्ति  में परिवर्तन आता है जो उर्जा के तल पर होता है .इसी फर्क के कारण फल प्राप्ति में बदलाव आ जाता है "थोडा सा ही फर्क आता है तो फिर पता क्या चलेगा ?"
गुरुदेव ने कहा "इसे ऐसे समझो की अगर फ़ाइनल मैच में भारत की टीम को जीतने के लिए ३५० रनों की जरुरत है और अंतिम ओवर में उसे जीतने के लिए १२ रनों में भाग्य से ३ रन मिल जाते है और टीम जीत जाती है  तो कितना फर्क पड़ जाता है .पुरे ३४७ रन टीम ने अथक परिश्रम से बनाये और उतने बनाने  ही  पड़ेंगें ,तभी ३ रन भाग्य वाले जीत के लिए काम आएंगे .अब तुम बताओ की थोडा सा ही फर्क रिजल्ट में कितना फर्क कर देता है और इसी प्रकार जीवन में भी भाग्य के थोड़े से फर्क से आप सोच नहीं सकते उतना सकारत्मक फर्क पड़ जाता है ."
"ये तो वाकई में काफी बड़ा अंतर आ गया " मैंने खुश होकर कहा .
" आप  लगातार मंत्रजाप प्रार्थना इत्यादि करते हो तो सबसे पहले आपकी कई समस्या जो आने वाली रहती है वो कट जाती है जिनका की आपको कभी आभास ही नहीं होता .तुम लोगों की उम्र अभी कम है .मैंने जीवन में इतने कष्ट झेले है तो अनुभव से ही बता देता हूँ की तुमको और भी कष्ट आयेंगे इसलिए अगर तुम प्रभु के शरण में रहोगे तो ही कष्टों को आसानी से प्रभुकृपा ,साईकृपा से पार कर जाओगे .मुझे शुरुवात में  कर्म का ही सहारा दिखता था पर जब मात्र कर्म से ही काम नहीं बना और गुरुकृपा ,साईं कृपा  से काम बना तो इनके प्रति मेरी आस्था बढ गई. मेरा रोम रोम इनका आभारी हो कर इनके प्रेम और आस्था में पड़ गया ."
"गुरुदेव अगर मै करूंगा तो मुझ पर भी साईं कृपा करंगे ?"  मैंने पुछा.
" बेटा उनका आशीष तो प्रतिपल बरस ही रहा है .आप प्रार्थना मन्त्र पूजा से गुरु साईं भगवान् को नहीं बदलते हो बल्कि आप उनकी कृपा प्राप्त करने के लिए अपनी झोली आगे करते हो .तुम करोगे तो तुमको अवश्य ही कृपा प्राप्ति होगी ."
"मुझको कितनी जल्दी यह पता चलेगा की कृपा हो रही है ?"
"बेटा,इसमें देरी और जल्दी का नहीं है यह भीतर की आस्था की बात है .आस्था होगी तो पता चलेगा ही ."