28 मार्च 2010

सदगुरु दांव बतईया खेले दास कबीर "

मेरे गुरुदेव स्वामी चिन्मय योगी जी ने अपने गुरु भगवान श्री रजनीश ओशो से पुछा "भगवान् ,किसी व्यक्ति को सदगुरु मिल गया. सदगुरु ने पूजा ध्यान विधि बता दी .उसके बाद क्या  सदगुरु  की आवश्यकता नहीं है ?"
भगवान् श्री ने कहा "भले ध्यान पूजा की आवश्यकता नहीं हो पर सदगुरु तो परम आवश्यक  है "

देवी देवता तो अदृश्य है पर सदगुरु प्रत्यक्ष है

.मेरे गुरुदेव कहते है की हजार कार्यों से भी महत्वपूर्ण कार्य गुरु का संगसाथ (सत्संग) है.

सदगुरु के लिए कबीर  ने बोला है "बहुरि ना ऐसा दांव "  " सदगुरु दांव बतईया खेले दास कबीर "

चिन्मय योगी परा वेदा चिन्मय योगी परा मखा
चिन्मय योगी परा योगा  चिन्मय योगी परा क्रिया
चिन्मय योगी परम ज्ञानं चिन्मय योगी परम तपः
चिन्मय योगी परा भक्तिम चिन्मय योगी परम गतिम्