25 मार्च 2010

नवरात्र साधना गृहस्थ


नवरात्री का समापन हुआ .माता की भक्ति से सारा भारत भावपूर्ण हो उठा है .मेरे सभी मित्रों को रामनवमी की शुभकामनायें .
एक गृहस्थ होने के नाते मै नवरात्र में क्या पूजा करू ? यह प्रश्न मन में उठा तो सभी तंत्र और पूजा के साहित्य को पढ़ कर देखा . उसमे की पूजा और विधि कठिन लगी और कुछ तो बहुत जायदा समय लेने वाली थी .ज्योतिष को और मंत्र के प्रभाव को देख लेने के बाद कुछ ना कुछ करना है नवरात्र में यह सोच लिया था .सभी साहित्य और ज्ञानियों ने नवरात्र की महिमा और इस समय की साधना की विशेषता का उल्लेख किया है .
मेरे माता पिता नवरात्र में मंदिर में ज्योत जला देते है और प्रथम और आठवें दिन दर्शन के लिए मंदिर जाते है .और साथ में अंतिम दिन खीर पूडी का प्रसाद देवी को लगा कर हूम दे कर पूजा करते है .मेरा इस पूजा से और अधिक कुछ करने का मन था .
मन में इसी विचार को ले कर गुरुदेव से पुछा तो उन्होंने कहा " नवरात्र में सबसे बढ़िया साधना है  देवी के मंत्र का  जाप. तुम प्रतिदिन तो मंत्र जाप करते ही हो .साथ में नवरात्र तक चामुंडा मंत्र का एक माला जाप कर लेना और रविवार को हम सब महामाया मंदिर पुरानी बस्ती में दर्शन के लिए जायेंगे .महामाया मंदिर रायपुर में शक्ति पीठ है .मेरे सारी तंत्र की साधना की सिद्धि यही हुई है .यहाँ भैरव और बटुक नाथ भी देवी के साथ विराजित है .बहुत जाग्रत स्थान है यह रायपुर में .मै तो हर नवरात्र में दर्शन करने जाता हूँ "
ये सबसे बढ़िया हुआ .एक माला मैंने करना शुरू कर दिया और महामाया मंदिर में गुरुदेव के साथ दर्शन करने के लिए गया तो आनंद और बढ़ गया . आठवे दिन भट गाँव परसदा ,बिल्हा बिलासपुर के पास गया .वहां उच्च कोटि के साधक श्री एस  के  दीक्षित जी के घर में   प्रधान पूजा और हवन में शामिल हुआ .देवी का प्रसाद प्राप्त किया और दीक्षित जी की विशेष पूजा को देख कर बड़ा आनंद आया . जय माँ महामाया की जय