10 जून 2010

"डाक्टर साहब , डिप्रेशन की बीमारी का ब्लड टेस्ट करा दीजिये "




कुछ पहले इन आँखों आगे क्या-क्या न नज़ारा गुज़रे था
क्या रौशन हो जाती थी गली जब यार हमारा गुज़रे था
थे कितने अच्छे लोग कि जिनको अपने ग़म से फ़ुर्सत थी
सब पूछते थे अहवाल जो कोई दर्द का मारा    गुज़रे    था
 (फैज़ )



 चन्दन  कासवानी  रितेश  के स्कूल का दोस्त है .वह बहुत अच्छा किराना दूकान चलता था .उसके भाईयों ढाबा खोला था . जब वो ढाबा नहीं चला पाए तो उन्होंने  चन्दन को ढाबा चलाने के लिए कहा. चन्दन ने अपनी किराना दूकान भाई लोगों को देकर खुद ढाबा चलने लगा .ढाबा के धंधे में  उसको नुकसान हुआ . उसके बाद में भाई लोगों ने भी उसको सहारा नहीं दिया .वो पिछले डेढ़ साल से कुछ नहीं कर रहा है .उसने मित्रों से भी मिलना छोड़ दिया था .रित्तु को चन्दन इक दिन मिल गया. उसने उसको प्रेम से सहारा दिया ,सहयोग का भरोसा दिया .उसका मारल  बूस्टअप किया .
"डाक्टर साहब ये अपने खाटी   दोस्त है .जब अच्छा चल रहा था इसका तब इसने अपने भाई बहन की शादी की .अपने भाई लोगों को धंधे में  स्थापित किया. अब इसका बुरा वक्त आ गया है तो भाई लोग खुल कर सहयोग नहीं कर रहे है .मै  इसको देखता  हूँ तो मुझे अपने ख़राब दिन याद आते है .ये मेरा दोस्त है और इसको लाइन में लगाना है .आप इसका इलाज करो और इसके भाग्य को  बढ़ाने के उपाय बतावो  ." रितेश  ने कहा.

चन्दन ३० साल का युवक है पर चेहरे में उदासी और  निराशा छाई थी . बातचीत में  उसकी  दिमागी उलझन दिख रही थी .
"डाक्टर साहब मेरा ब्लड  टेस्ट करा दीजिये ."  चन्दन ने कहा .

"ठीक है .क्लिनिक आ जाना .मै पूरा करा दूंगा ."  मैंने कहा
.
"डाक्टर साहब .उसमे मेरी  डिप्रेशन की बीमारी का पता चल जायेगा ना ? "

मै मुस्कुरा दिया .

"अरे  यार डिप्रेशन का कोई ब्लड टेस्ट होता है " व्यंकटेश जो साथ में बैठा था  उसने कहा. व्यंकटेश और रितेश और चन्दन का स्कूल का दोस्त है . वह  ऍम बी ए है .

"होता है. सभी बीमारी का जब टेस्ट होता है तो इसका भी होगा .क्यों डाक्टर साहब? ." चन्दन ने मेरी और देख कर कहा .

"नहीं, डिप्रेशन का कोई टेस्ट नहीं होता है " मैंने कहा .

"देखा मैंने बोला था "  वेंकट ने पूछा " डिप्रेशन और निराशा में क्या अंतर होता है सर जी "

 " कभी कभी निराश हो जाना स्वाभाविक है .लेकिन  निराशा लगातार कई दिनों तक बनी ही रहे और बढती रहे तो ये डिप्रेशन में बदल जाती है . यदि मरीज को लगातार दो  हफ्ते तक निराशा का भाव बना रहे या निराशा के कारण उसकी दैनिक सामान्य दिनचर्या प्रभावित हो रही है तो यह मेजर डिप्रेशन कहलाता है .यह किसी प्रकार की शारीरिक कमजोरी या अपराध नहीं है यह इक बहुत विकराल स्वास्थ्य समस्या है और यह दवाई और समुचित चिकित्सा से ठीक हो जाने वाली बीमारी है ."

" इसमें सोचने  के लेवल में क्या  असर होता है? "

"डिप्रेशन के प्रमुख लक्षण है गहरी निराशा का भाव और जीवन में रूचि ख़त्म हो जाना .पहले जिन चीजों में मजा आता था वो  रुचिहीन लगती है .मरीज को साथ में  अपराधबोध, सारहीनता,नाउम्मीद ,और आत्महत्या  का भाव जैसे लक्षण भी होते है . इसे भावनात्मक लक्षण कहते है "

"साथ में कुछ शारीरिक लक्षण भी आते ही होंगे ?"


" हाँ शारीरिक लक्षण कई प्रकार के दर्द के रूप में आता है.
यद्यपि डिप्रेशन में भावनत्मक तल पर जबदस्त असर आता है पर साथ में शरीर पर भी यह असर करता है .६५ % डिप्रेशन के मरीज भावनात्मक लक्शाकं के साथ शरीर दर्द की शिकायत भी करते है .यह सिरदर्द ,कमरदर्द ,मांस पेशी दर्द ,जोड़ों का दर्द ,अधिक थकान ,जायदा या बहुत कम  नींद आना ,चक्कर आना इत्यादि लक्षण  के रूप में होते है .   "

"कई को तो भूख  भी काम लगती है "

"  हाँ, डिप्रेशन में मरीज के भूख और वजन में परिवर्तन होना भी इक प्रमुख लक्षण  है . भूख  अजीब तरह से बढ कर अत्यधिक हो जाती है या फिर भोजन की रूचि ख़त्म हो जाती है .कुछ मरीजों को बार बार दस्त या कब्ज या उलटी की शिकायत भी होती है "

मुझे ध्यान केंद्र  जाना था .देरी हो रही थी .मै जाने लगा तो वेंकट ने कहा" डाक्टर साहब मेरी उत्सकता अपने  बढ़ा दी. मुझे   कुछ और  जानना था ."

"कल  बैठेंगे  तो आगे बातें करेंगे "

चन्दन ने पूछा "मै ठीक तो हो जाऊंगा न, डाक्टर साहब ?"

"क्यों  नहीं"  

"अरे यार चंदू .तू डाक्टर साहब के क्लिनिक चला जाना तेरा सारा इलाज हो जायेगा .तेरे डिप्रेशन का भी और तेरी किस्मत का भी " रितेश ने कहा .

जय गुरु महाराज की जय जय भैरवी माता की जय

3 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत बढिया चल रहा है।
    ज्ञानवर्धक आलेख

    आभार

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  2. अच्छा आलेख्। बधाई। डिप्रेशन बहुत ही खतर्नाक चेएज है।

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