3 जून 2010

"अच्छा, अमिताभ की तरह भगवान के पास जाकर बोल भी आया "

रित्तु ने कहा "मेरा पूरा उत्साह ठंडा पड़ गया है .मै आखिर काम करू तो किसके लिए .डाक्टर साहब सबकी प्रेरणा होती है .जादातर लोग परिवार के लिए करते है .मेरी तो शादी होने का कोई ठिकाना दिख  नहीं रहा है "

दर असल रित्तु  ३० साल का हो गया है और पिछले तीन चार साल से शादी  का प्रयास घर वाले कर रहे है .गए छह माह में तो प्रयास में कोई कसर बाकि नहीं रही .लेकिन दो सौ के करीब रिश्तों की बातचीत भी रिश्ता ठीक नहीं कर पाई
.तो अब भाई साहब निराश है .होना स्वाभाविक है आखिर वो स्वयं स्मार्ट है सुंदर ऊँचा  पूरा है  उसका परिवार शहर  में बहुत प्रतिष्ठित परिवार है .मारवारी अग्रवाल है. लाखों का कारोबार है .रित्तु  स्वयं एक लाख रुपया महिना से जादा  कमाता है,खुद का आफिस है .बीस लोगों का स्टाफ है .अब शादी इतने अच्छे  लड़के की नहीं हो पा रही है और समाज में उसके सारे पहचान के लोगों की ,दोस्तों की हो गई है और लगातार सबकी होते जा रही है तो मन में तो ये सारी चीजें आती ही है .निराशा खूब बढती जा रही है.

"डाक्टर साहब खुद को तो समझा कर कुछ समय शांत करता हूँ पर जैसे ही घर जाता हूँ  परिवार , माता पिता भाई भाभी   सबको देखता हूँ तो और और निराश हो जाता हूँ ."

"रित्तु भाई तेरी शादी के बावत तो मेरे सारे फलादेश फेल हो गए .यहाँ तक की सारे कुटनीतिक प्रयास धरे रह गए .अब तो मै इस सारे वाकये में साक्षी बन कर घटनाक्रम को देख  रहा  हूँ की आखिर ये क्या हो रहा है ,क्यों हो रहा है और इसका आगे क्या होगा .जादा से जादा अपना अगला प्रयास ही कर सकता हूँ , पर तेरे को मै इतना बोल सकता हूँ की मै अंत तक तेरे साथ हूँ मेरे रित्तु भाई "  मैंने कहा .


"डाक्टर साहब ये तो मेरे लिए बड़ी सांत्वना है पर मै अपने दिल दिमाग का क्या करूँ ." 

"रित्तु भाई  ,वर्तमान को स्वीकार कर .के आगे का प्रयास कर "

"स्वीकार नहीं करूँगा तो भी वर्तमान तो जैसा है वैसा ही है "

"अरे यार स्वीकार से कुछ तो दर्द कम होगा "

"मै  इस प्रकार के किसी सिद्धांत से सहमत नहीं हूँ ."

"मत हो तू सहमत.  पर यह मेरा विचार  है . मै इसी प्रकार से ही जीवन को जीता हूँ .अब मेरा टाइप ही ऐसा है तो अपनी बात तो तेरे कान में डाल ही देता हूँ ,फिर भले से तू बाद में इन चीजों पर विचार करे ."

"मै तो आज भगवान ,और देवता लोगों से भी बोल आया की तुम लोग आखिर क्या कर रहे हो.अगर सभी चीज़ उसको करना है तो आप  लोगों का काम ही क्या है " 

"अच्छा तो तुम अमिताभ बच्चन की तरह भगवान के पास जाकर बोल भी आया "

"क्या करूँ .अब और किसको बोलूं "

"मै आशावादी और यथार्थ वादी दोनों हूँ मेरे पास जो आईडिया ही वो तेरे को करना चाहिए तो कुछ तकलीफ कम  होगी .अभी तेरा बैड पैच चल रहा ही बाद में ठीक  हो जायेगा .तू बाद में ठीक मूड में मिलना तो आगे बात करेंगे"
 मुझसे  बात करके रित्तु  घर चला गया .
मैंने मन में भगवान से, गुरुदेव से उसके कल्याण की प्रार्थना की .

7 टिप्‍पणियां:

  1. mere ek dost he balwant jain kar ke unka bhi yahi hal he


    aaj unki umer bhi 28 sal ke karib he

    halaki wo aap ke friends ki tarha ameer nahi he magar wo pade likhe he

    aayew din wo muj se bhi isi prakar ki bate hoti rahti he


    ab ye samsya to rahegi jab tak ajanmi beti ho log kokh me hi marte rahenge

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  2. आईये जानें ..... मन ही मंदिर है !

    आचार्य जी

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  3. अब यही ईश्वर की मर्जी वाली बात लागू होती है।

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  4. ...बेहद प्रसंशनीय अभिव्यक्ति !!!

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  5. आईये जानें .... मैं कौन हूं!

    आचार्य जी

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