11 जून 2010

आध्यात्मिक होने के बावजूद इन्हें काफ़िर की ही संज्ञा मिली

हम फ़क़ीरों से बे-अदाई क्या
आन बैठे जो तुमने प्यार किया
सख़त काफ़िर था जिसने पहले "मीर"
मज़हब-ए-इश्क़ इख़्तियार किया .

सूफियों ने प्रेम को अध्यात्म की पहली और आखरी शर्त माना है.उनकी कविता की खासियत है की आधात्मिक ही नहीं  भौतिक ,शारीरिक प्रेमी भी इसका मज़ा ले सकते है .तो चाहे किसी भी स्तर पर  भी रहिये आनंद आयेगा .  

सबसे अनोखी बात यह है की आध्यात्मिक होने के बावजूद इन्हें काफ़िर की ही संज्ञा मिली है .हाल मिल गया है अपने हाल से .






अमृत बूंदे रसधार की :
"तुम लोगों को मै फिर बता देता हूँ की मन्त्र जाप को कभी मत छोड़ना.मन्त्र जाप से आपको अत्यधिक सहारा मिलता है .कितनी ही अनजाने संकट से आपको यह निकल देता है .मन्त्र जाप आपको आजीवन भौतिक स्तर पर लाभ देगा .इसको अगर आप छोड़ दिये तो आप नुकसान में रहोगे .इसको अपनी दिनचर्या बना लो ." गुरुदेव ने पिंकू से कहा  .पिंकू गुरुदेव कि मालिश कर रहा था .
"मै तो मन्त्र जाप करता हूँ पर मन्त्र को ग्यारह बार ही करता हूँ इक सौ आठ बार नहीं ." पिंकू बोला .
"मन्त्र जाप का लाभ लेना है तो मन्त्र को इक सौ आठ बार जाप करना ही पड़ेगा .ग्यारह ,नौ ,तीन बार तो मै शुरुवात के लिए बोलता हूँ ,इससे मन्त्र याद हो जाता है .मन्त्र उच्चारण के लिए जबान खुल जाती है .अगर छः माह हो गए है और ग्यारह ग्यारह ही करते हो तो नहीं करना अच्छा .इससे आपको कोई लाभ नहीं होगा .ग्यारह बार करना पूजा करना मात्र होता है "
"तुमको मै जीवन कि लगभग सभी समस्या के लिए मन्त्र दे चूका हूँ .तुम इन मन्त्र को जरुरतमंदों को दे कर उनका कल्याण कर सकते हो .भैरवी ने बताया है कि इन मन्त्रों पर उनके पीठ में सौ साल पहले ही रीसर्च हो चूका है .इनका असर स्थापित हो चूका है .जाँच परख कर ही पीठ के गुरुओं ने इसे जनसामान्य के कल्याण  लिए निकला है ."
मै अपने मन में सोच रहा था कि गुरुओं की करुणा बहुत है और में सौभाग्य है की गुरु के शरण में आज हूँ .
(जय गुरु महाराज की जय .जय भैरवी माता की जय )

ज्योतिष की अद्भुत दुनिया :


अगर कन्या का विवाह नहीं हो रहा है,या मंगली दोष के कारण विवाह बाधा,विवाह टूटना ,नहीं होना ,विवाद इत्यादि हो रहा है तो तो निम्लिखित विशेष टोटके रूपी प्रयास करें (.पीठ के सिद्दों ने यह उपाय बताया है) :
1 मूंगा नहीं पहनना चाहिए चाहे कुंडली में कितना भी कारक हो.
2 लाल कपडा ,लाल वस्त्र नहीं पहनना चाहिए
3 स्त्रियों को सवा चार रत्ती का पीला पुखराज तर्जनी ने और पुरुषों को सफ़ेद ओपेल दस रत्ती का तर्जनी में धारण करना चाहिए .
4 इक संतरा सुबह छह से नौ बजे के बीच नदी में बहाना चाहिए .



दवाखाना :
मेरे नौ जून के पोस्ट में डिप्रेशन के बारे में लिखा था तो मेरे इक पाठक मित्र को ठीक वैसा ही इक मरीज टकरा गया .मरीज अपने बैचनी ,सिरदर्द ,नींद नहीं आने ,और कई प्रकार के शारीरिक लक्षण के लिए कई जगह इलाज करा चूका था .अंत में शहर के बहुत बड़े डाक्टर ने मर्ज पकड़ लिया .
मरीज ने डाक्टर साहब से पूछा "सर मुझको क्या बीमारी है ?"
"असल में तुमको शाक लगा है " डाक्टर साहब  ने जवाब दिया.(ये अब उस शाक से उबरे की इस शाक से ) 

फ़िल्मी दुनिया :
इक बहुत बड़े शो में फिल्म स्टार  चयन के फ़ाइनल राउण्ड के अंत में जज ने समझाते हुए कहा "  स्टार  बनने के लिए  सबसे बड़ी क्वालिटी यह है की उसकी किस्मत बुलंद होनी चाहिए .किस्मत ही वो खूबी  है जो आपको   स्टार बना सकती है ."
इक लड़की उठकर ने पूछा "सर और हेरोईन बन्ने के लिए ?"
"तुम बाद में मिलना. मै बता दूंगा " जज ने कहा .

10 जून 2010

"डाक्टर साहब , डिप्रेशन की बीमारी का ब्लड टेस्ट करा दीजिये "




कुछ पहले इन आँखों आगे क्या-क्या न नज़ारा गुज़रे था
क्या रौशन हो जाती थी गली जब यार हमारा गुज़रे था
थे कितने अच्छे लोग कि जिनको अपने ग़म से फ़ुर्सत थी
सब पूछते थे अहवाल जो कोई दर्द का मारा    गुज़रे    था
 (फैज़ )



 चन्दन  कासवानी  रितेश  के स्कूल का दोस्त है .वह बहुत अच्छा किराना दूकान चलता था .उसके भाईयों ढाबा खोला था . जब वो ढाबा नहीं चला पाए तो उन्होंने  चन्दन को ढाबा चलाने के लिए कहा. चन्दन ने अपनी किराना दूकान भाई लोगों को देकर खुद ढाबा चलने लगा .ढाबा के धंधे में  उसको नुकसान हुआ . उसके बाद में भाई लोगों ने भी उसको सहारा नहीं दिया .वो पिछले डेढ़ साल से कुछ नहीं कर रहा है .उसने मित्रों से भी मिलना छोड़ दिया था .रित्तु को चन्दन इक दिन मिल गया. उसने उसको प्रेम से सहारा दिया ,सहयोग का भरोसा दिया .उसका मारल  बूस्टअप किया .
"डाक्टर साहब ये अपने खाटी   दोस्त है .जब अच्छा चल रहा था इसका तब इसने अपने भाई बहन की शादी की .अपने भाई लोगों को धंधे में  स्थापित किया. अब इसका बुरा वक्त आ गया है तो भाई लोग खुल कर सहयोग नहीं कर रहे है .मै  इसको देखता  हूँ तो मुझे अपने ख़राब दिन याद आते है .ये मेरा दोस्त है और इसको लाइन में लगाना है .आप इसका इलाज करो और इसके भाग्य को  बढ़ाने के उपाय बतावो  ." रितेश  ने कहा.

चन्दन ३० साल का युवक है पर चेहरे में उदासी और  निराशा छाई थी . बातचीत में  उसकी  दिमागी उलझन दिख रही थी .
"डाक्टर साहब मेरा ब्लड  टेस्ट करा दीजिये ."  चन्दन ने कहा .

"ठीक है .क्लिनिक आ जाना .मै पूरा करा दूंगा ."  मैंने कहा
.
"डाक्टर साहब .उसमे मेरी  डिप्रेशन की बीमारी का पता चल जायेगा ना ? "

मै मुस्कुरा दिया .

"अरे  यार डिप्रेशन का कोई ब्लड टेस्ट होता है " व्यंकटेश जो साथ में बैठा था  उसने कहा. व्यंकटेश और रितेश और चन्दन का स्कूल का दोस्त है . वह  ऍम बी ए है .

"होता है. सभी बीमारी का जब टेस्ट होता है तो इसका भी होगा .क्यों डाक्टर साहब? ." चन्दन ने मेरी और देख कर कहा .

"नहीं, डिप्रेशन का कोई टेस्ट नहीं होता है " मैंने कहा .

"देखा मैंने बोला था "  वेंकट ने पूछा " डिप्रेशन और निराशा में क्या अंतर होता है सर जी "

 " कभी कभी निराश हो जाना स्वाभाविक है .लेकिन  निराशा लगातार कई दिनों तक बनी ही रहे और बढती रहे तो ये डिप्रेशन में बदल जाती है . यदि मरीज को लगातार दो  हफ्ते तक निराशा का भाव बना रहे या निराशा के कारण उसकी दैनिक सामान्य दिनचर्या प्रभावित हो रही है तो यह मेजर डिप्रेशन कहलाता है .यह किसी प्रकार की शारीरिक कमजोरी या अपराध नहीं है यह इक बहुत विकराल स्वास्थ्य समस्या है और यह दवाई और समुचित चिकित्सा से ठीक हो जाने वाली बीमारी है ."

" इसमें सोचने  के लेवल में क्या  असर होता है? "

"डिप्रेशन के प्रमुख लक्षण है गहरी निराशा का भाव और जीवन में रूचि ख़त्म हो जाना .पहले जिन चीजों में मजा आता था वो  रुचिहीन लगती है .मरीज को साथ में  अपराधबोध, सारहीनता,नाउम्मीद ,और आत्महत्या  का भाव जैसे लक्षण भी होते है . इसे भावनात्मक लक्षण कहते है "

"साथ में कुछ शारीरिक लक्षण भी आते ही होंगे ?"


" हाँ शारीरिक लक्षण कई प्रकार के दर्द के रूप में आता है.
यद्यपि डिप्रेशन में भावनत्मक तल पर जबदस्त असर आता है पर साथ में शरीर पर भी यह असर करता है .६५ % डिप्रेशन के मरीज भावनात्मक लक्शाकं के साथ शरीर दर्द की शिकायत भी करते है .यह सिरदर्द ,कमरदर्द ,मांस पेशी दर्द ,जोड़ों का दर्द ,अधिक थकान ,जायदा या बहुत कम  नींद आना ,चक्कर आना इत्यादि लक्षण  के रूप में होते है .   "

"कई को तो भूख  भी काम लगती है "

"  हाँ, डिप्रेशन में मरीज के भूख और वजन में परिवर्तन होना भी इक प्रमुख लक्षण  है . भूख  अजीब तरह से बढ कर अत्यधिक हो जाती है या फिर भोजन की रूचि ख़त्म हो जाती है .कुछ मरीजों को बार बार दस्त या कब्ज या उलटी की शिकायत भी होती है "

मुझे ध्यान केंद्र  जाना था .देरी हो रही थी .मै जाने लगा तो वेंकट ने कहा" डाक्टर साहब मेरी उत्सकता अपने  बढ़ा दी. मुझे   कुछ और  जानना था ."

"कल  बैठेंगे  तो आगे बातें करेंगे "

चन्दन ने पूछा "मै ठीक तो हो जाऊंगा न, डाक्टर साहब ?"

"क्यों  नहीं"  

"अरे यार चंदू .तू डाक्टर साहब के क्लिनिक चला जाना तेरा सारा इलाज हो जायेगा .तेरे डिप्रेशन का भी और तेरी किस्मत का भी " रितेश ने कहा .

जय गुरु महाराज की जय जय भैरवी माता की जय

7 जून 2010

सरकती जाये है रुख से नकाब आहिस्ता आहिस्ता

आज रविवार का दिन है. आज "सन डे सत्संग" का दिन है .  आज ध्यान केंद्र में भोजन में खिचड़ी और आमलेट बनाना तय हुआ है .मै आवश्यक सामग्री लेकर ध्यान केंद्र पहुँच गया हूँ .मेरे बाद डाक्टर अनिल वास्ती आये . मैने      कूलर और घडे में पानी भरा     पिंकू भी चाय के लिए दुध और  साथ में ब्रेड  लेकर पंहुचा .


"तू ब्रेड ले कर  क्यों आया है ?"  मैंने पुछा .
"खिचड़ी मुझे उतनी पसंद नहीं है .अगर मज़ा नहीं आया तो मै ब्रेड आमलेट खाऊंगा ."
"तू पागल हो गया है क्या .खिचड़ी जो स्वामीजी के निर्देशन में बनता है वो फाइव स्टार से भी  मजेदार और रिच  रहता है ."
"ठीक  है ना ,बचेगा तो वापस ले जायेंगे ."
खाने के प्रति पिंकू का रुझान अलग ही है .


मैंने अपनी साबर पूजा की और अनिल को " झाडा " किया .अनिल की बीमारी को देखते हुए वो स्वयं हर हफ्ते यहाँ शाबर तंत्र विधि से झड्वाता है .उसको दवा के अतिरिक्त इस इलाज से भी अभूतपूर्व लाभ हुआ है .
गुरुदेव आये .हम सबने प्रणाम किया .आज कमलेश आया है .वो स्वामीजी से सात साल पहले भी मिल चुका है .उसकी सत्संग ,साधना , गुरु में श्रद्धा है और ज्योतिष में भी वह आस्था रखता है .


खाना बनाने के लिए गुरुदेव ने मुझे तैयारी करने को कहा .   मैंने स्वामी जी के पास  मुंग दाल और चावल ला कर दिया .उन्होंने मुंग दाल और चावल को चार अनुपात  तीन  में निकाल कर अलग अलग रखने को कहा  .चावल को भीगा कर रखा गया .
"यह अनुपात ही सबसे महत्व का है .इसी कारण तो तुम्हारी खिचड़ी बिगडती है . अब मै जो पहले तुम्हारी रेसिपी की कापी में जो मसाला लिखवाया हूँ उसको निकालो ".

मैंने ८ लौंग और दाल चीनी, 4खड़ी मिर्च   हल्दी लालमिर्च निकला .मैंने लाकर दिखाया तो स्वामीजी ने उसके अनुपात को सही किया .

"स्वामीजी छोटी इलायची नहीं है "
"ठीक  है . मै अपने  इलायची के डब्बे से देता हूँ ."
"स्वामीजी यहाँ का बनाया हुआ गरम मसाला ख़त्म हो गया है .बाजार वाला है ."
"ला कर दिखावो "
"ये   लीजिये स्वामीजी "
"यह तो बिलकुल भी अच्छा नहीं है . मै लौंग इलायची दालचीनी अनुपात में देता हूँ .तुम ही यहाँ बना लो "

स्वामीजी  के दिए मसाले  को मैंने मिक्सी में डाला .पर मिक्सी के जर में थोडा झाँकने लगा तो उसके अंदर की चकरी निकल गयी .
"क्या हो गया ?"
"स्वामीजी मिक्सी के जार की चकरी टूट गयी "
"तुम पहली बार बना रहे हो. मत डरो.मेरे पास लाकर दिखावो ." मैंने ले जा कर दिखाया .
"ये  टुटा नहीं है निकाल गया है .देखो इसे ऐसे लगाते है ."
स्वामीजी ने ठीक कर के दिया तब मैंने मिक्सी में सामग्री रखी.
"देखो मिक्सी को ५ सेकेण्ड के लिए चलाना फिर बंद कर देना .ऐसा कई बार करने से तुम्हारा सारा मसाला पिसा जायेगा .अगर तुम लगातार मिक्सी को चला दोगे तो इसका मोटर जल जायेगा ."
"स्वामीजी मिक्सी को इस प्रकार लम्बा क्यों नहीं चला सकते ? " अनिल ने पुछा .
"अलग अलग मोटर की कपेसिटी अलग अलग होती है ."
मसाला पिसा गया तो उसकी खुशबू बहुत अलग ही थी




अनिल आज बहुत सारी तैयारी करके आया है की जोरदार मिल्क शेक बनाना है .उसने पिंकू की सहायता से मिल्क शेक बनाकर उसके ऊपर आइस क्रीम दाल कर सर्व किया .सबने शेक का आनंद लिया .

.
मैंने स्वामीजी के बताये अनुसार मुंग दाल को तवे में सुखा भूंजा .फिर जब वो थोडा गुलाबी हुआ तो उसमे घी दाल कर फ्राई  किया .फिर दाल को कुकर में  चार अंगुल पानी ने डाल कर तीन सिटी में पकाया .
स्वामीजी ने दुसरे  चूल्हे में मसाला तड़का तैयार  करने को कहा .पहले कटे  प्याज को घी में फ्राई किया फिर उसमे लौंग ,इलायची ,दालचीनी, हल्दी ,लाल पीसी  मिर्च, खड़ी मिर्च , किसा अदरक, डाल कर अच्छी तरह भूंजा .

इसी बीच आमलेट के लिए सामग्री पिंकू ने स्वामीजी के बोलने के अनुसार तैयार किया .अंडा फोड़कर डाला ,उसमे बारीक़ कटा प्याज ,कटी हुई हरी मिर्च .नमक .थोढ़ा शक्कर .मिलकर फेटनी से खूब फेटा गया .

अब पकाने के गंज में चावल का पानी निकाल कर डाला गया. उसमे दाल  को कुकर से निकाल कर डाला .उसमे मसाला और थोडा घी डाल कर अच्छी तरह से मिक्स किया .स्वामीजी बता रहे है की अब चावल फ्राई हो  रहा है और तड़का मसाला पूरी तरह से  सारी सामग्री में मिल रहा है .
जब थोड़ी खुशबू आ गई और सारी सामग्री मिक्स हो गई तब फिर थोडा थोडा पानी डाल कर उसको बार बार घुमा कर पकाते गए .इस बीच स्वामीजी ने स्वाद अनुसार नमक और शक्कर डाला .गंज को ढक कर पकाने से भाप में जल्दी पकता है इअलिये उसको ढक दिया गया .गुरुदेव ने चेताया की तुम्हारा ध्यान  थोडा भी इधर उधर होने से जल जायेगा .मैंने बिलकुल  ध्यान से बीच बीच में निकाल कर सामग्री को चलाना जरी रखा तब जाकर अंत में खिचड़ी  पक गयी .ऊपर से धनिया पत्ती और थोडा घी दल कर ढक दिया .

स्वामीजी ने स्वयं आमलेट बनाकर दिखाया तब मैंने और बनाया .

खिचड़ी और आमलेट को प्याज और हरी  मिर्च नमक  के साथ गुरुदेव को सर्व किया .मैंने पिंकू और कमलेश ने भी भोजन  प्रसाद का आनंद लिया .
"स्वामीजी आज की खिचड़ी तो सबसे बेहतरीन  बनी है .इसने तो चिकन .मटन , कढी  सबको फेल कर दिया ."  पिंकू बोला .
"वाह क्या जोरदार शाही अंदाज़ की खिचड़ी बनी है स्वामीजी .इतना सुंदर स्वाद तो मैंने कभी नहीं खाया है ."मैंने कहा .
कमलेश बोला "ये तो इतना अच्छा है की थोडा और होता तो वो भी खिला जाता ."

स्वामीजी ने नीचे  अपने रूम से  हलवा और मीठी चकोली ला कर दिया .
"स्वामीजी इस मीठे ने तो स्वाद का नशा ला दिया है ."
"मुझे तो खाने के बाद मीठा खाना हमेशा ही अच्छा लगता है . "स्वामीजी ने कहा .
"मुझको  तो लग रहा है की भैरवी माँ ने यह प्रसाद भेजा है .क्या अद्भुत रस और आनंद इस भोजन का  आ रहा है."मैंने कहा .

पिंकू ने सारे बर्तन मांज दिए .कमलेश ने स्थान को पानी और झाड़ू से साफ किया .
खाने के बाद और बात चीत हो रही है .

मैंने पुछा "गुरुदेव मैंने अपने नए मित्रों के साथ जो उम्र ने मुझसे  तीन चार साल छोटे है बैठने  में  बहुत तकलीफ होती है .मेरे अंदर का इक चेतना का स्तर है. उससे  नीचे  आ कर उनके साथ उतरकर उनसे मित्रता बनाने में बड़ी कठिनाई आ रही है .आप तो इतने जयादा ऊँचे स्तर में रहते है आप कैसे निचे हमारे स्तर तक आ कर दोस्ती के अंदाज़ में रह लेते है ."
सद गुरु  अपने उच्च चेतना के स्तर पर जीता है पर शिष्य तो निचे के तल पर है .सदगुरु को निचे आना पड़ता है .मित्रता बनानी होती है .शिष्य को उसकी पूरी स्वतंत्रता देनी होती है .उसके साथ होना पड़ता है .फिर बीच बीच में मित्रों के अंदाज़  में सही बातें उनके कानो में डाल डाल कर दिमाग में सही बात बैठना पड़ता है. अगर निचे उतरकर शिष्यों को नहीं प्रेम कर पाया तो वो सदगुरु नहीं है ."
"मै  जानता हूँ की ये बहुत कठिन है. पर गुरु को शिष्य के लिए ,अपने गुरु के अभियान को आगे ले जाने के लिए इस कठिन कार्य को करना ही  होता है .ये ही तो सदगुरु का कार्य है पर यह होता है बहुत धीरे धीरे .अगर तुम अपना लो तो तुनको ही यहाँ ग्यारह साल लग गए ." गुरुदेव बोल रहे है "ये होता है आहिस्ता आहिस्ता "
"मुझको उस गजल की सुंदर बोल याद आ गए " मैंने कहा
"हाँ वाकई में बहुत खुबसूरत गजल है ." स्वामीजी ने मुस्कुरा कर कहा .

सरकती जाये है रुख से नकाब, आहिस्ता आहिस्ता

निकलता आ रहा है आफताब, आहिस्ता आहिस्ता

जवां    होने    लगे       तो   कर        लिया        पर्दा

हया इक लख्त आई और शबाब आहिस्ता आहिस्ता



(उसकी महफ़िल में बैठ कर देखो ,जिंदगी कितनी  खूब सूरत है ) 



.

6 जून 2010

शाबर, चंडीपाठ, अघोर तंत्र की क्रियाकारी शक्तियां रात को ही सक्रिय होती है


.आज शनिवार है .सिर्फ पिंकू और मै रात के सत्संग में आये हुए है .गप्पू अपने २२ दिन के कम्पनी के ट्रेनिंग के लिए निकल चुका है.

मै अपनी तंत्र पूजा करके भोजन करने के लिए तैयार हुआ वैसे ही गुरुदेव ऊपर ध्यान केंद्र आये .हम दोनों  ने प्रणाम किया .मैंने भोजन किया .पिंकू गुरुदेव की मालिश करने लगा .
"स्वामीजी.आपने पिछले शनि वार को हमको शाबर हवन  करते समय प्रचंड भैरव और वैदिक रीती के  देवी तथा अन्य शक्ति मन्त्र करने के लिए मना  किया था  .इसका कारण  मुझे समझ में अब आया .मुझे आपके बताने से ही नयी दृष्टी मिली ." मैंने कहा .
"इसी  कारण से तो सदगुरु की आवश्यकता है . देखो तुम लोग क्या कर रहे थे .बैठे थे तुम शाबर तंत्र हवन के लिए .उसमे तुम पहले वैदिक रीती से देवी भैरव शिव की पूजा (मन्त्र) करते थे .उसके बाद शाबर मन्त्रों से हवन करते थे .इसी बीच तुम प्रचंड भैरव का भी हवन  करते थे .कर तो रहे थे  तुम सारा कुछ जादा  शक्ति लगा पर तुम्हारी सारी  पूजा निष्फल जा रही थी ."
".वैदिक के साथ शाबर तंत्र की और साथ में प्रचंड भैरव की पूजा करके तुम एक ही साथ वैदिक शाबर और अघोर की पूजा करते थे .अब इस  प्रकार की पूजा एक ही सिटिंग में करने से ही पूजा निष्फल हो रही थी."
"सब विधि के गण यक्ष ,गंधर्व ,प्रेत ,पिशाच अलग अलग होते है सबको एक ही साथ बैठा  कर भोजन नहीं  खिलाया नहीं जा सकता .इससे उनके प्रतिनिधि गण नाराज़ होते है .और आते नहीं है या लौट जाते है .तुमको इस प्रकार से पूजा का लाभ नहीं मिल सकता ."
".इस बात को और अच्छे से  समझो .जैसे एक ही कौर में कोई यदि  एलोपैथी आयुर्वेदिक और होमीओ पैथी की दवा खायेगा तो उसका क्या होगा .तुन डाक्टर हो समझ सकते हो "
"हाँ, इससे तो मर्ज ठीक नहीं होगा." मैंने कहा .
"जैसे एक ही समय में कोई चाय पिए .चाइनीज़ और साउथ इंडियन भी साथ में खा ले तो क्या होगा  .मामला ख़राब ही होगा .इसलिए तुमको बोलता हूँ की आप एक समय में एक को ही करो .जब शाबर तंत्र पूजा या हवन करो तो उस समय उसी को करो .जब वैदिक करो तो उसी को करो .जब प्रचंड भैरव करना हो तो उसी को करो .अघोर रीती की लक्ष्मी पूजा करना हो तो उसी को करो उस समय और  किसी और विधि की पूजा नहीं करना है ."
"इसका मतलब अगर एक टाइम में करना है तो शाबर ही करें "
"देखो शाबर का तुमको इसलिए बोल रहा हूँ की तुम लोगों को भैरवी और मेरे माध्यम से उसकी सिद्दी प्राप्त हो गई है .तंत्र की यह शाखा वैदिक से कई गुना जायदा प्रभावशाली और शक्तिशाली है .जब तुम्हारे पास  जादा बेहतर विधि है तो उसको करो .अगर समय है तो वैदिक    भी कर सकते हो "
"समय तो कामधाम घर बार के बाद कम ही बचता है गुरुदेव "
"इसीलिए तो जादा बेहतर को करने बोल रहा हूँ "
"स्वामीजी मै सोचता था की बाकि लोग भी हमारे साथ बैठ कर आहुति दे सकते है "
" तुम बाकि लोगों को शाबर तन्त्र हवन  क्रिया को करते वक्त साथ में बिठा कर आहुति मत दिलावावो .बाकि लोग चूँकि दीक्षित नहीं है इसलिए तुम्हारे  साथ क्रिया में बैठने के अधिकारी नहीं है .बाकि लोग शाबर कर भी नहीं रहे है . तुमको अगर अन्य लोगों को भी शाबर तंत्र हवन का लाभ दिलाना है तो जब पूरी क्रिया संपन्न हो जाये तब उनसे तीन बार ॐ अग्नये स्वाहा बोल कर आहुति दिलावावो .इससे उनको पूरा पूरा हवन का लाभ मिलेगा ."
स्वामी जी वैदिक को दिन में और तांत्रिक और शक्ति मन्त्र पूजा को रात में ही करना चाहिए ."

"' देखो पूजा दिन और रात कभी भी करने से लाभ होगा पर जादा लाभ के लिए तंत्र को रात में ही करना चाहिए.   मै वैदिक पूजा मन्त्र जाप दिन में करता हूँ और हड्डी महाराज की पूजा अलग समय में रात्रि में करता हूँ .किसी भी प्रकार की शक्ति पूजा रात में ही जायदा प्रभावी रहती है .शाबर चंडीपाठ, अघोर इत्यादि की क्रियाकारी शक्तियां रात को ही सक्रिय होती है इसलिए रात में ही करना चाहिए ."गुरुदेव  ने कहा,
"स्वामीजी अपने मुझको एक नयी दृष्टी प्रदान की ."
"गुरु का यही तो रोल है " गुरुदेव ने कहा .
जय गुरु महाराज की जय, जय भैरवी माता की जय

5 जून 2010

को नहीं जानत है जग में प्रभु संकटमोचन नाम तिहारो

मै  जैसे ही ध्यान केंद्र के अंदर   गया   अंदर गुरुदेव की बातें कान में पड़ी .  गुरुदेव अनिल से से बातें कर रहे थे .
गुरुदेव "सूर्य से तेजस्वी और प्रतापी  इस  जगत में और कोई नहीं है .सारे ग्रह नक्षत्र उसके चारों ओर चक्कर लगाते है .सूर्य की महिमा उसकी तेजस्विता में है .पूरा जगत उसके अलोक से आलोकित है .जीवन के आधारभूत शक्तियां सूर्य के आश्रित है ."

"स्वामी जी क्या सूर्य से भी शक्तिशाली कोई हुआ ही .? "

" एक अंजनी पुत्र हनुमान पैदा हुए.  बचपन में सभी बच्चों की तरह वो  शैतानी करने लगे .बाल हनुमान ने धीरे धीरे शरारत के सारे कीर्तिमान भंग कर दिए तब जाकर उन्हे और एक शैतानी सूझी .उनको रोज सुबह एक लाल गोला दिखता था और सोचते थे की ये बाल जैसा दिखने   वाला  आखिर क्या है .अब बाल हनुमान तो बच्चे  ठहरे जाकर उस लाल गोले को ही निगल लिया .सारे जगत में हाहाकार मच गया ."

सबने बड़ा आनंद लिया .गुरुदेव आगे बता रहे है.

"जैसे तैसे बच्चे की शरारत को मनाया गया .तब  जाकर सूर्य अपनी जान बचा पाए .बाल हनुमान की चर्चा सारे जगत में हो गई ."

"ये तो बच्चे  के रूप में रिकार्ड धारी   हो गए "अनिल बोला .

"लेकिन ये जगत के लिए बड़ी समस्या थी ,बाल हनुमान बच्चे थे और बाल सुलभ शैतानी का भाव उनमे प्रबल था और गंभीरता नहीं थी .अब बाल स्वरुप में गंभीरता के अपेक्षा भी  नहीं थी ."

"सारे बड़े लोगों के मन में बड़ी चिंता हुई की इस बच्चे की इतनी शक्ति है और यह इश्वर की लीला का अंश है पर अभी बाल स्वरुप में इतना बड़ा कांड और ना कर दे "

कांड की बात सुनकर अपने बचपन की याद करके सभी मुस्कुरा दिए


"सारे ऋषि मुनि तपस्वी ज्ञानी देवता सभी लोगों की मीटिंग बुलाई गई .सबसे इस समस्या का निदान पुछा गया .बहुत विचार विमर्श के बाद एक उपाय निकला  गया. उपाय यह था की जब तक हनुमान बड़े नहीं हो जाते और इनको इनकी शक्ति  की इश्वर लीला के लिए आवश्यकता नहीं पड़ जाती तब तक इनको इनकी शक्तियां विस्मृत करा दी जाएँ .और इनमे यह शक्ति तभी जगे जब इनको यह याद दिलाया जाय की आप बहुत शक्तिशाली हो .  "

गुरुदेव ने आगे कहा " इसीलिए हनुमन जी की आप  पूजा करते हो तो, जब तक आप उनको उनकी शक्तियां याद नहीं दिलाते तब तक आपको लाभ नहीं मिलता .इसलिए तो बोला जाता है  को नहीं जानत है जग में प्रभु संकटमोचन नाम तिहारो , इसीलिए मन्त्र और चालीसा में भी उनको उनकी शक्ति का याद दिलाया जाता है ,दीनदयाल विरद सम भरी हरहु नाथ मम संकट सारी . साथ ही साथ हनुमान जी के इस्ट श्री राम की पूजा करने से पूजा का फल जल्दी और जायदा मिलता है .        प्रभु श्री राम का आश्रीवाद  है की हनुमान शाश्वत रहेंगे और अपने भक्तों के कष्ट को दूर करेंगे ."

गुरुदेव की बातों से लगा की हमारी संस्कृति और धर्म में कितने सुंदर आख्यान है जो जीवन के सभी पहलु पर इतना गहरा असर डालते है .

पहले  मुझे लगता था की ये कहानी है .

अब लगता है की ये सत्य से भी बढकर है .

और ये भक्ति की भावधारा कितनी सुंदर एवं दिव्य है .

जय गुरु महाराज की जय, जय भैरवी माता की जय  

3 जून 2010

"अच्छा, अमिताभ की तरह भगवान के पास जाकर बोल भी आया "

रित्तु ने कहा "मेरा पूरा उत्साह ठंडा पड़ गया है .मै आखिर काम करू तो किसके लिए .डाक्टर साहब सबकी प्रेरणा होती है .जादातर लोग परिवार के लिए करते है .मेरी तो शादी होने का कोई ठिकाना दिख  नहीं रहा है "

दर असल रित्तु  ३० साल का हो गया है और पिछले तीन चार साल से शादी  का प्रयास घर वाले कर रहे है .गए छह माह में तो प्रयास में कोई कसर बाकि नहीं रही .लेकिन दो सौ के करीब रिश्तों की बातचीत भी रिश्ता ठीक नहीं कर पाई
.तो अब भाई साहब निराश है .होना स्वाभाविक है आखिर वो स्वयं स्मार्ट है सुंदर ऊँचा  पूरा है  उसका परिवार शहर  में बहुत प्रतिष्ठित परिवार है .मारवारी अग्रवाल है. लाखों का कारोबार है .रित्तु  स्वयं एक लाख रुपया महिना से जादा  कमाता है,खुद का आफिस है .बीस लोगों का स्टाफ है .अब शादी इतने अच्छे  लड़के की नहीं हो पा रही है और समाज में उसके सारे पहचान के लोगों की ,दोस्तों की हो गई है और लगातार सबकी होते जा रही है तो मन में तो ये सारी चीजें आती ही है .निराशा खूब बढती जा रही है.

"डाक्टर साहब खुद को तो समझा कर कुछ समय शांत करता हूँ पर जैसे ही घर जाता हूँ  परिवार , माता पिता भाई भाभी   सबको देखता हूँ तो और और निराश हो जाता हूँ ."

"रित्तु भाई तेरी शादी के बावत तो मेरे सारे फलादेश फेल हो गए .यहाँ तक की सारे कुटनीतिक प्रयास धरे रह गए .अब तो मै इस सारे वाकये में साक्षी बन कर घटनाक्रम को देख  रहा  हूँ की आखिर ये क्या हो रहा है ,क्यों हो रहा है और इसका आगे क्या होगा .जादा से जादा अपना अगला प्रयास ही कर सकता हूँ , पर तेरे को मै इतना बोल सकता हूँ की मै अंत तक तेरे साथ हूँ मेरे रित्तु भाई "  मैंने कहा .


"डाक्टर साहब ये तो मेरे लिए बड़ी सांत्वना है पर मै अपने दिल दिमाग का क्या करूँ ." 

"रित्तु भाई  ,वर्तमान को स्वीकार कर .के आगे का प्रयास कर "

"स्वीकार नहीं करूँगा तो भी वर्तमान तो जैसा है वैसा ही है "

"अरे यार स्वीकार से कुछ तो दर्द कम होगा "

"मै  इस प्रकार के किसी सिद्धांत से सहमत नहीं हूँ ."

"मत हो तू सहमत.  पर यह मेरा विचार  है . मै इसी प्रकार से ही जीवन को जीता हूँ .अब मेरा टाइप ही ऐसा है तो अपनी बात तो तेरे कान में डाल ही देता हूँ ,फिर भले से तू बाद में इन चीजों पर विचार करे ."

"मै तो आज भगवान ,और देवता लोगों से भी बोल आया की तुम लोग आखिर क्या कर रहे हो.अगर सभी चीज़ उसको करना है तो आप  लोगों का काम ही क्या है " 

"अच्छा तो तुम अमिताभ बच्चन की तरह भगवान के पास जाकर बोल भी आया "

"क्या करूँ .अब और किसको बोलूं "

"मै आशावादी और यथार्थ वादी दोनों हूँ मेरे पास जो आईडिया ही वो तेरे को करना चाहिए तो कुछ तकलीफ कम  होगी .अभी तेरा बैड पैच चल रहा ही बाद में ठीक  हो जायेगा .तू बाद में ठीक मूड में मिलना तो आगे बात करेंगे"
 मुझसे  बात करके रित्तु  घर चला गया .
मैंने मन में भगवान से, गुरुदेव से उसके कल्याण की प्रार्थना की .

2 जून 2010

इसी को एक शब्द में प्रारब्ध कहते है

"मै इन लोगों की तुलना में कई गुना जायदा मन्त्र जाप कर चूका हूँ " हम लोगों की तरफ इशारा करके हेमंत ने कहा "मुझको तो कोई लाभ आज तक नजर नहीं आया .मेरा तो किसी भी मन्त्र ,पूजा पर से विश्वास ही उठ गया है .और तो और मेरा किसी भी गुरु पर भी ,साईं बाबा पर भी कोई विश्वास नहीं है .मुझको सारे गुरुवों पर शक ही होता है "
"शक करके गुरु के पास आना आधा आना होता है .शक्की मन से आप क्या लाभ ले पावोगे .शक आपकी कृपा और प्रसाद ग्रहण करने की सारी पात्रता ख़त्म कर देता है .अगर आप सही विधि ,सही दीक्षा से मन्त्र नहीं करोगे तो आप लाख क्या करोड़ मन्त्र जाप भी कर लो कुछ प्राप्ति नहीं होगी " गुरुदेव हेमंत को बोल रहे थे.
 "तुम्हारा प्रारब्ध ही अभि तक ख़राब है .तुम टीक से पढ़े  भी नहीं. तुम्हारे पास ,विद्या बल ,एप्रोच बल ,धन बल किसी में कमी रही होगी इसीलिए तुम  जज नहीं बन पाए .यानि प्रारब्ध ख़राब के कारण ही नहीं बन पाए . अभी शिक्षा कर्मी बनाना तुम्हारे भाग्य में था  इसलिए वही बन गए .शादी का अभी इस समय तक प्रारब्ध में नहीं था तो इतना खोजने के बाद भी शादी नहीं हुई .सिद्दी के लिए कु गुरु के चक्कर में पड़े तो गुरु  ने ही तुमको सही मार्ग नहीं बताया .ये ही तो प्रारब्ध है .अभी प्रारब्ध में तुमको शक करना है तो तुम वैसे हो यहाँ तुम आये और सिद्दी के लिए इतना बोले तो मै तुहारे कारण ही साबर तंत्र की दीक्षा देकर विधि बताया . पर तुम ही मात्र नहीं कर रहे हो बाकि सत्तू गप्पू कर रहे है सिद्ध हो गए है उनको प्रमाण लगातार मिल रहे है .तुम्हारा प्रारब्ध अभी ऐसा है तो दिख ही रहा है .और इन्ही सब के कारण तुम्हारा मन निराशा में है ."गुरुदेव ने कहा .
"गुरुदेव मै अभी आधे मन से ही यहाँ ध्यान केंद्र आ पता हूँ पर आपसे मिलना मुझको अच्छा लगता है ."हेमंत
गुरुदेव "देखो मेरी भी बहुत पहले ऐसी ही स्थिति  थी .पर धीरे धीरे मै प्रयोग करता रहा .मुझको बाद में भरोसा हो गया क्योंकि चीजें मेरे साथ ही घटित होने लगी .तब फिर अविश्वास करने का प्रश्न ही नहीं रहा .यह गुरु की कृपा थी और ऐसा मेरे प्रारब्ध था .अभी तुम ऐसे हो पर बाद  में तुम्हारा परिवर्तन होगा और क्या पता की बाद में तेरे ही चेले तुझ पर ही शक करें "
गुरुदेव ने बोला .सब हसने लगे .
बाद में  अगले दिन रितेश भी परमात्मा और अस्तित्व की सदभावना पर शक करके निराशा भरी बातें करने लगा तो मुझे गुरुदेव की बात याद आई की अभी इसके प्रारब्ध में अभी ऐसे ही असंतोष में जीना है .अभी यही है .बाद में आगे समय के अनुसार परिवर्तन होगा .
घुमा फिर के सारी बात एक ही शब्द में अटक जाती है की अभी ऐसा प्रारब्ध है .आप चाहो या ना चाहो वैसा घटित  होना ही परमात्मा की मर्जी है .इसी को एक शब्द में प्रारब्ध कहते है .

1 जून 2010

यार,तुम लोग तो बहुत भाग्यशाली हो

"मै भींगता रहा, एक नशा मुझमे छाता रहा.,मलंग तू कौन है,,तुने बिना देखे मेरी ओर मेरे दिल को कैसे छु लिया .
मै चल रहा था जिस रास्ते  उसमें कितना सुंदर  मोड़ आ गया .मै मुड़ता चला गया और इस नए रस्ते मे इतनी जादा  फूलों की खुशबू थी की मेरे  जेहन में मदहोशी  छा गई  ." शानू बोलता ही रहा .

"मै क्या बताऊँ डाक्टर साहब ,बहुत अच्छा हुआ की आप मिल गए .मै तो रितेश से इस बारे में बोलूँगा ये ही सोचता रहा दिन भर और रितेश के साथ आप भी मिल गए .मै किस से बताऊँ की मेरे साथ क्या घटित हो रहा है .और ये रितेश सब जान रहा था और ये भी मजे ले रहा था ."

रितेश ने मुस्कुराते हुए कहा "मै तो खुद मजे ले रहा था और सोचा की तू भी इस चीज़ का आनंद ले ."

"मै जीवन की हर बड़ी उपलब्धियों के लिए तेरा आभारी हूँ और इस मज़े को जिसको मै इतने पल जिए जा रहा हूँ इसके लिए की तू मुझको उस मलंग मस्त के पास उसकी महफ़िल तक ले गया ,मै फिर तेरा आभारी हूँ " शानू बोला .
शानू और रितेश की बरसों पुरानी दोस्ती है और इन दोस्तों की खासियत है की आपस में एक दुसरे के अन्दर चले वाले सारे बातों को भी महसूस करते है .
 दो दोस्तों की बातचीत चल रही थी.शानू के अंदर   एक प्यार भरी मस्ती और आनंद घटित हो रहा था .
ये बहुत ही दुर्लभ घटना शानू के साथ हुई थी की एक सदगुरु के पास उसकी महफ़िल में सबसे पहली बार आये दरवाज़े पर ही लगा की अन्दर कोई है जिसको  मुझे प्रणाम करना है,अन्दर आकर प्रणाम किया ,और कोई बात नहीं हुई, किनारे ४५ मिनट महफ़िल में बैठे रहे .सारी बातचीत हो रही थी मलंग गुरु और उसके एक चेले के बीच .पर  मलंग गुरु  इस अंदाज़ में  बोल  रहे थे की ऐसा लगा की सारी शराब वो शानू के  जहेन में ही उड़ेल रहे है   और हो गया ,सत्संग का नशा शानू को .और यह आनंद शानू को रविवार रात के बाद सोमवार को पुरे दिन भर छाया रहा .मस्ती के अनोखे मखमली एहसास  जैसी स्थिति में ही पूरा दिन डूबा  रहा .

पर मेरे आश्चर्य की और एक बात थी की रितेश को इस सारे बात का एहसास उसी समय हो गया. वो इस सारे वाकये का आनंद ले रहा था .मलंग गुरु की बातों का भी ,उसके चेले के अंदाज़  का भी ,और बाजु में बैठे  शानू के परिवर्तन का भी  .
उसका आनंद इसलिए और भी बढ गया की मलंग  गुरु की बातें जो शानू की अंदर फर्क ला रही थी उन बातें को एक दिन पहले ही शानू को वो बोलना चाह   रहा था .मलंग गुरु अपने मलंग अंदाज़ में उन्ही सारी बातों को बोल रहे थे. रितेश का मज़ा और बढ गया .

शानू बोला "डाक्टर साहब मै किसान का बेटा हूँ .हमारे यहाँ आम के फल के ऊपर कोयल अगर पेशाब कर देती है तो बोलते है की फल के ऊपर से उसकी कुछ बूद नीचे के फल पर भी टपक जाती है .और उसका असर ये आता है की ऊपर वाला फल तो पक जाता है साथ में नीचे वाला फल भी आधा पक जाता है .मेरे साथ ऐसा ही हुआ .मलंग गुरु अपना प्यार और अपनी सारी शक्ति अपने उस चेले पर उड़ेल रहे और इधर मुझ पर असर होता रहा ."

मै इस अद्भुत घटना को जान कर मुग्ध हो गया और इतना ही कह पाया "यार तुम लोग तो बहुत भाग्यशाली हो "
(शानू को यह समाधी के आनंद की एक झलक थी .इसे सतोरी यानि समाधी की झलक कहते है ,यह अकारण अत्यधिक आनंद की अवस्था है )