27 मई 2010

साधना में विघ्न

साधना में विघ्न कई प्रकार के हो सकते है .मूल रूप से कुछ प्रकार को जान कर उसके प्रति सचेत रहा जा सकता है.निम्न लिखित कुछ विशेष विघ्न है जिनसे साधक को सचेत रहना है :-



स्वास्थ्य : स्वास्थ्य अच्छा रहेगा ,कोई रोग नहीं होगा तो ही तो व्यक्ति साधना भली भांति कर सकेगा .इसलिए स्वस्थ रहने के लिए व्यायाम योग आसन इत्यादि करना चाहिए.


आहार : साधक को अपने आहार का ध्यान रखना चाहिए .आहार से कई प्रकार के मनो भाव आते है इसलिए ऐसा आहार लेना चाहिए जो साधक को प्रमाद के ओर मत ले जाये .

शंका :गीता में कृष्ण ने कहा है "संशयात्मा विनश्यति ". साधक को गुरु मन्त्र और इस्ट पर अटूट श्रद्धा होनी चाहिए .श्रद्धा साधक को साधना की उर्जा के प्रति ग्रहण शील बनाती है.श्रद्धा से साधक को गुरु ,मन्त्र ,इस्ट की कृपा मिलती है .शंका से मन और बुद्धि ,दिव्या उर्जा को ग्रहण करने की क्षमता खो देते है .

सदगुरु : किसी भी प्रकार की विद्या को प्राप्त करने के लिए गुरु के मार्गदर्शन की जरुरत होती है . सदगुरु के निर्देश के अनुसार ही साधना सफल हो सकती है .खजाने के रास्ते का पता गुरु को ही होता है .

प्रतिस्ठा मानसन्मान:  कुछ सफलता मिलने पर साधक को मान सन्मान मिलने लगता है जिससे उसका मन और और की इच्छा करता है .साधक का अहंकार बढ जाता है और वह पतन के ओर जाने लगता है .

परनिंदा : साधक दूसरों की बुराई निकल कर निंदा करता है .साधक स्वयं तो अच्छे मार्ग पर चल रहा होता है पर दुसरे की बुराई निकल कर निंदा करने से साधक का बड़ा भरी नुकसान   होता है .यह विघ्न साधक का पतन ला देता  है .


बर्म्ह्चार्य : साधक को अपनी काम वासना के ऊपर नियंत्रण पूर्ण रूप से रखना  चाहिए. कामवासना का गड्ढा इनता बड़ा है की उसमे गिरने से साधक पूरी तरह से साधना से विमुख हो सकता है .


भौतिक इक्षाएं :अनेक प्रकार की कामनाएं मन में  होती है. इन कामनाओं को विवेक का उपयोग करके बचना चाहिए .मन तो इतनी कामनाओं का अम्बर लगा देगा की साधक उसी में उलझ कर साधना के मूल स्वरूप से भटक जायेगा .मन को बार बार इस बारे में चेताते रहना चाहिए .    



साधकों के लिए सबसे अच्छा है की वो सदगुरु का सत्संग करते रहे तो गुरु आपको इन विघ्न बाधा से लगातार बचाते रहेंगे .

साधो ,गुरु के अलावा और कोई मार्ग नहीं है .

1 टिप्पणी:

  1. डा. साहब बहुत ही ज्ञानवर्धक आलेख है । लिखते रहें । आज की भागदौड भरे जीवन में खासकर शहरी वातावरण में साधना का क्या महत्व है बताने की कृपा करें ।

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