24 फ़रवरी 2010

मंत्र जाप का आरंभ

मंत्र साधना के बारे मे भारत मे सभी को जानकारी रहती है .प्रत्येक व्यक्ति अपनी पूजा मे कुछ ना कुछ  भगवान  का नाम लेता है  भगवान  का नाम लेना इस कलियुग मे सबसे सरल सुगम और आनंददायी साधना  है ऐसा मै बचपन से सुनता आया था .जब मै भगवान श्री रजनीश से प्रभावित होकर अपने गुरुदेव स्वामी चिन्मय योगी जी से मिला तो उनको मंत्रजाप करते देख  कर मै विस्मय मे पड़ गया क्योंकि ओशो के साहित्य और साधना मे मंत्रजाप मैंने कही नहीं पढ़ा था . 
"स्वामी जी आप मंत्र जाप  करते है " मैंने उनसे पुछा.
"हाँ, मै भगवान  का नाम लेता हूँ ,मै देवी देवताओं के साथ साथ सिद्ध गुरुओं का नाम  जाप  करता हूँ. मै अपने गुरुदेव भगवान श्री रजनीश का भी नाम स्मरण करता हूँ "
"मंत्र जाप  से क्या होता है. यह तो खाली बैठे  बैठे समय काटना और भाग्यवादी होकर आलस्य मे सिर्फ भगवान् का नाम लेना मात्र है .कर्म से ही व्यक्ति को उपलब्धि प्राप्त हो सकती है .मंत्रजाप से क्या हासिल हो सकता है "मैंने कहा.
"मंत्रजाप पूर्णत वैज्ञानिक है और  समय के हिसाब से प्रमाणिक है, यह अस्तित्व के उच्चतर तल पर कार्य करता है ,यह विज्ञान के तरंगों के सिद्धांत पर कार्य करता है ,संपूर्ण ब्रमांड के उत्पत्ति जिस उर्जा से हुई  है वह प्रारंभ मे निराकार स्वरूप मे थी जिसका सबसे पहला स्वरुप धव्नि तरंगों के रूप मे आया फिर बाद मे उसके पदार्थ बनने की प्रक्रिया चली .उसके बाद पदार्थ और चेतन  तत्वों के मिलन से जीवन का निर्माण हुआ .वस्तुतः ध्वनी तरंगे उर्जा का ही स्वरूप है और मंत्र जाप से जिन तरगों का निर्माण हम करते है वो हमारे आन्तरिक तल के अस्तित्व
 को विशिष्ट उर्जा से भर देते है ."गुरुदेव ने कहा .
"स्वामी जी आपने तो मंत्रजाप का नया रूप मेरे सामने रखा दिया "
गुरुदेव ने मुस्कुराते हुए कहा "मंत्रजाप मोबाइल को चार्ज करने के जैसे हमारे शारीर को दिव्य  उर्जा से चार्ज कर देता है "
"स्वामीजी ,मै मंत्रजाप करूँगा तो मेरी बैटरी भी चार्ज होगी .कृपा करके मुझे बताएं
 की मै कैसे मंत्रजाप शुरू करूं"
गुरुदेव ने कहा " पहले ओंकार के जाप से शुरू करो .यहाँ सत्संग मे आते जाते रहो तुम्हारी और और प्रगति होती जाएगी "
 (जय गुरु महाराज की जय ,जय भैरवी माता की जय)     

2 टिप्‍पणियां:

  1. "अच्छा लगा लेख आपका शब्द शक्ति अद्भुत है इस सृष्टि का प्रादुर्भाव शब्द से ही तो हुआ है....."
    प्रणव सक्सैना amitraghat.blogspot.com

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  2. मंत्रणा से ही मंत्र उत्पन्न हुआ है और इसमे शक्ति अभ्यास से ही आती हैं। शब्द की महिमा अपार है।
    आपका आभार है।

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