25 फ़रवरी 2010

सामूहिक ओंकार ध्यान


गुरुदेव स्वामी चिन्मय योगी (श्री रजत बोस जी ) के ध्यान केंद्र बुढापारा में मैंने ओंकार ध्यान का अभ्यास शुरू कर दिया .मेरे साथ मेरे कुछ गुरुभाई दीपक  ,गप्पू ,ताम्बु,अतुल भी साथ हो लिए .जब हम सामूहिक रूप से अभ्यास करते तो गुरुदेव आकर हमारे अभ्यास को प्रोत्साहित करते .उन्होंने  कहा "सामूहिक ओंकार के अभ्यास से बहुत जायदा उर्जा बनती है इससे तुम सबको जादा लाभ होता है .यहाँ नीरव रजनीश ध्यान केंद्र बुढापारा में पिछले 25 सालों से ध्यान हो रहा है . यहाँ आलरेडी उर्जा क्षेत्र बना हुआ है और यहाँ ध्यान करने से तुम लोगों की प्रगति और जादा हो रही  है " 
"स्वामी जी सामूहिक ध्यान और अकेले करने में क्या अंतर है ?" मैंने उनसे पुछा .
"जैसे अकेले तुम जितना वजन उठा सकते हो . पांच लोग मिल कर उससे कई गुना  जादा वजन उठा सकते है .इसी प्रकार जब आप सामूहिक ध्यान करते हो तो जायदा एनेर्जी पैदा होती है और सभी को जादा लाभ मिलता   है. पूना में भगवान नए लोगों को सामूहिक ध्यान में शामिल होने के लिए बोलते थे .नए साधक की उर्जा कम   होती है.ऐसा साधक  जब सामूहिक में भाग लेता है तब उसको सामूहिक की उर्जा का लाभ मिलता है उसके शरीर के ध्यान के चक्र जल्दी से सक्रीय होते है .कम शक्ति वाले साधक को,नए साधक को जल्दी और जादा लाभ होता है "
गुरुदेव ने हमें ओंकार के साथ  में भ्रामरी (हमिंग ) को अंत में करने के लिए कहा .हम लोग उसके बाद ओंकार के साथ हमिंग का भी अभ्यास  करने लगे .
गुरुदेव ने बताया "हमिंग को जोड़ लेने से ध्यान का असर बढ जाता है .ओंकार और हमिंग की जोड़ी है जोड़ी में करने से तुमको  दो  ध्यान का लाभ मिलेगा ."आगे उन्होंने कहा "तुम लोगों को सामूहिक रूप से ध्यान करते देख कर मुझे बड़ी ख़ुशी होती है .मुझको पूना के रजनीश आश्रम का सामूहिक  ध्यान याद आता है "
(जय गुरुमहाराज की जय ) 

24 फ़रवरी 2010

मंत्र जाप का आरंभ

मंत्र साधना के बारे मे भारत मे सभी को जानकारी रहती है .प्रत्येक व्यक्ति अपनी पूजा मे कुछ ना कुछ  भगवान  का नाम लेता है  भगवान  का नाम लेना इस कलियुग मे सबसे सरल सुगम और आनंददायी साधना  है ऐसा मै बचपन से सुनता आया था .जब मै भगवान श्री रजनीश से प्रभावित होकर अपने गुरुदेव स्वामी चिन्मय योगी जी से मिला तो उनको मंत्रजाप करते देख  कर मै विस्मय मे पड़ गया क्योंकि ओशो के साहित्य और साधना मे मंत्रजाप मैंने कही नहीं पढ़ा था . 
"स्वामी जी आप मंत्र जाप  करते है " मैंने उनसे पुछा.
"हाँ, मै भगवान  का नाम लेता हूँ ,मै देवी देवताओं के साथ साथ सिद्ध गुरुओं का नाम  जाप  करता हूँ. मै अपने गुरुदेव भगवान श्री रजनीश का भी नाम स्मरण करता हूँ "
"मंत्र जाप  से क्या होता है. यह तो खाली बैठे  बैठे समय काटना और भाग्यवादी होकर आलस्य मे सिर्फ भगवान् का नाम लेना मात्र है .कर्म से ही व्यक्ति को उपलब्धि प्राप्त हो सकती है .मंत्रजाप से क्या हासिल हो सकता है "मैंने कहा.
"मंत्रजाप पूर्णत वैज्ञानिक है और  समय के हिसाब से प्रमाणिक है, यह अस्तित्व के उच्चतर तल पर कार्य करता है ,यह विज्ञान के तरंगों के सिद्धांत पर कार्य करता है ,संपूर्ण ब्रमांड के उत्पत्ति जिस उर्जा से हुई  है वह प्रारंभ मे निराकार स्वरूप मे थी जिसका सबसे पहला स्वरुप धव्नि तरंगों के रूप मे आया फिर बाद मे उसके पदार्थ बनने की प्रक्रिया चली .उसके बाद पदार्थ और चेतन  तत्वों के मिलन से जीवन का निर्माण हुआ .वस्तुतः ध्वनी तरंगे उर्जा का ही स्वरूप है और मंत्र जाप से जिन तरगों का निर्माण हम करते है वो हमारे आन्तरिक तल के अस्तित्व
 को विशिष्ट उर्जा से भर देते है ."गुरुदेव ने कहा .
"स्वामी जी आपने तो मंत्रजाप का नया रूप मेरे सामने रखा दिया "
गुरुदेव ने मुस्कुराते हुए कहा "मंत्रजाप मोबाइल को चार्ज करने के जैसे हमारे शारीर को दिव्य  उर्जा से चार्ज कर देता है "
"स्वामीजी ,मै मंत्रजाप करूँगा तो मेरी बैटरी भी चार्ज होगी .कृपा करके मुझे बताएं
 की मै कैसे मंत्रजाप शुरू करूं"
गुरुदेव ने कहा " पहले ओंकार के जाप से शुरू करो .यहाँ सत्संग मे आते जाते रहो तुम्हारी और और प्रगति होती जाएगी "
 (जय गुरु महाराज की जय ,जय भैरवी माता की जय)     

18 फ़रवरी 2010

ज्योतिष विज्ञान से आम आदमी को लाभ कैसे मिलेगा ?

आम आदमी के लिए के ज्योतिष क्या कर सकता है यह प्रश्न मेरे मन में हमेशा से ही आता है .इतने दिनों से ज्योतिष को जानने के बाद कुछ समाधान मुझे मिले है .यह सब गुरु की कृपा और आशीर्वाद से मुझे प्राप्त हुआ है .ज्योतिष के आम आदमी से सम्बन्ध में दो पक्ष है पहला ज्योतिषी का और दूसरा जातक यानि व्यक्ति का .और भी एक पक्ष है वो ज्योतिष विषय का .


पहले ज्योतिष विषय को लेते है. आज की तारीख में ज्योतिष क्या है इस के विषय में भ्रान्ति बहुत ज्यादा है .आज की आधुनिक शिक्षा और तथाकथित प्रगतिशील लोगो में ज्योतिष को नकारने का और पुरे विषय को ही झूठा साबित करने का चलन हो गया है हालाँकि उनमे से कई ऐसें भी है जो व्यक्तिगत रूप से ज्योतिष सलाह लेते है पर सबके सामने इसकी आलोचना करके रेसनलिस्ट बनते है .

मेरे अनुभव में ज्योतिष बहुत बड़ा विज्ञानं है यह जीवन के सभी पक्षों को अपने में समाहित करता है .यह तंत्र का ,जीवन का ,चिकित्सा का ,विद्या का ,जीवन के सारे आयामों का ,समय यानि कालचक्र का आधार है .यह गणित है ,जीवन है ,व्हार है ,दर्शन है ,तंत्र है ,आप कुलमिलाकर जीवन के सभी अंगों को यह शास्त्र शामिल कर लेता है .
आम आदमी को ज्योतिष के उपायों को करके लाभ लेना चाहिए .यह लाभ जातक को कर्म में भाग्य वृद्धि के रूप में ही हो सकता है और कर्म का परिणाम आपके और अनुकूल होता है .जातक को ज्योतिष उपायों को पूजा के रूप में ही लेना है ना की सट्टा के रूप में .उपायों के फेर में ठगा जाने से भी बचना चाहिए .
ज्योतिषी के पक्ष में यह बात जरुरी है की वो गुरु से ज्ञान प्राप्त किया हो ,आस्तिक हो और वो आपको दैवीय मार्ग से लाभ दिलाने की काबिलियत रखता हो .लोभी और बेईमान किस्म के ज्योतिषी आप को ठगंगे ही इसलिए उनसे कृपा करके बचें .
ज्योतिष दिव्य विज्ञान है  तंत्र है आप इसका लाभ लेकर स्वयं भी दिव्यता से भर सकते है .
जय गुरुमहाराज की जय ,जय  गुरु माता की जय 

9 फ़रवरी 2010

8 घंटे में 8 साल के पाइल्स का दर्द ठीक हुआ


मेरे दोस्त और गुरुभाई डाक्टर अनिल वास्ती 8 साल से क्रोनिक पाइल्स और फिशर से पीड़ित है .अनिल की समस्या कई महीनों से लगातार बढती ही जा रही है .


उसको साथ में और भी कई बीमारी है इस कारण से पाइल्स की  बीमारी की तकलीफ जादा ही होती है .पहले उसको महीने में 3 या 4 दिन तकलीफ होती थी जो बढकर अब महीने के 20 दिन तक हो गई है .अनिल एक स्तिथी में 10 मिनट से जादा बैठ नहीं पाता. डाक्टर अनिल शहर में अच्छी सोनोग्राफी की प्रक्टिस करते है और बहुत अच्छा कमाते है .अनिल ने अपना इलाज दिल्ली से लेकर रायपुर तक कई एलोपथी ,होमियो, आयुर्वेद के डाक्टरों को दिखाया पर बीमारी ठीक होना तो दूर ,दर्द भी ठीक तरीके से गया नहीं.जैसे तैसे करके डाक्टर साहब अपने इस बीमारी को कम ज्यादा करके अपने जीवन को चला रहे है.

अनिल की तकलीफ को देखकर गुरुदेव जी ने कहा की तुम लोग (मै ,हेमंत,गप्पू )तो साबर की सिद्धि कर लिए हो तो पाइल्स के लिए अपनी साबर क्रिया को अनिल के उपचार के लिए करो . हम लोग ने उसी दिन रात को अपनी झाड़ फुक की क्रिया अनिल के ऊपर की .अगले दिन सुबह ९ बजे अनिल का फोन आया की उसको जो फायदा मिला वो चमत्कारिक है .उसे ये बात गुरुदेव को ,मुझको ,गप्पू को तुरंत फोन पर बताई .सुबह जब  अनिल शौच के लिए बैठा तब उसको दर्द बिलकुल नहीं हुआ .उसने  अपनी उंगली अन्दर डाल के चेक किया तो अन्दर 90 % बीमारी ठीक हो गयी थी .अनिल इतना खुश हुआ की बोला वो अपने को 8 साल पहले जैसा महसूस कर रहा है

गुरुदेव जी से जब हम मिले तो उन्होंने कहा की तुम लोगों ने  पूरे विधान से साधना की जिससे तुमको सिद्धि मिल गयी है .इसका प्रमाण है की अनिल की बीमारी में 8 घंटे में ही पाइल्स का दर्द पूरी तरह ठीक हो गया और 90 % बीमारी ठीक हो गयी.अनिल को इस क्रिया को लगातार करते रहना पड़ेगा और परहेज और दवा जारी रखकर बीमारी को पूरी तरह से ठीक करना होगा तभी साबर की क्रिया का पूरा लाभ वो ले पायेगा .

जय गुरु महाराज की जय ,जय भैरवी माता की जय

5 फ़रवरी 2010

२० मिनिट के मंत्र से ४० दिनों में नौकरी

मात्र ४० दिन रोज २० मिनिट के मंत्र जप से नौकरी प्राप्ति .

बिलकुल सच है मेरे भाई आप कर के तो देखो .

क्या आप इस बात को मजाक में ले रहें है ? पर जरा सोचिये की अगर आपका भाई या बच्चा अगर बेरोजगार है तो वो आपके पुरे घर के लिए कितनी समस्या की बात है. आपकी समस्या सनातन प्रकृति की है . और हमारे समाज में संतों ने इस समस्या पर भी चिंतन किया है .बहुत सरल सी बात है की अगर किस भी घर में कोई युवा बेरोजगार है तो उस परिवार का दायित्व बनता है की उसके लिए मार्गदर्शन करे और संतों ने भी सोचा की घर में समस्या होगी तो व्यक्ति भी मज़े से धर्मं कर्म नहीं कर पायेगा .वस्तुतः संतों के पास चिंतन मनन का बहुत समय रहता है और समाज की समग्र चिंता अपने संस्कृति की परंपरा रही है . तो इस प्रकार उन्होंने नौकरी प्राप्ति के लिए दैविक उपाय निकला .

तो असली बात पर आता हूँ , पहली बात की व्यक्ति को अपना प्रयास जोरदार तरीके से करते रहना है और ये बात न हो की पढाई में गधा कलेक्टर बनाने की सोचने लगे .

अब करना ये है की एक मंत्र को रोज़ सुबह स्नान करके ४९ बार पूर्व की ओर मुख करके जाप करना है. ४९ बार पढ़ने के लिए आपको २० मिनिट से जादा नहीं लगेगा . अगर पूजा साथ में कर सके तो और अच्छा होगा .नहीं करे तो भी कोई बात नहीं .

मेरा दावा है की काबिल व्यक्ति को रोजगार मिलेगा ही.

और ये आप का स्वानुभव बनेगा तो आप भी बोलेंगे

मेरी भक्ति गुरु की शक्ति फुरो मंत्र इश्वरो वाचा

4 फ़रवरी 2010

क्लिनिक चिकित्सा शास्त्र ज्योतिष

मेरी  क्लिनिक में आने वाले मरीज मुझे अपने घर का सदस्य मानने लगते है .ऐसा सभी जनरल प्रक्टिस करने वाले डॉक्टर के साथ मरीजों का सम्बन्ध बन जाता है .मेरी चिकित्सा शास्त्र की जानकारी और अनुभव का लाभ मेरे मरीजों को मिले  इसके लिए मै हमेशा प्रयास  करता हूँ .मेरे अनुभव में लोगों की समस्याएँ सिर्फ आधुनिक चिकित्सा यानी एलोपेथी मात्र से शुरुवाती
शारीरिक बीमारी के तल तक ही पूरी तरह से ठीक हो पाती है .सारी लम्बी बिमारियों के लिए एलोपथी चिकित्सा के अलावा परहेज ,आयुर्वेदिक ,होमियो ,योग को शामिल करने से परिणाम
ज्यादा  अच्छे आते है.
योग गुरु रामदेव ने आधुनिक चिकित्सा शास्त्र के प्रमाणों के आधार पर योग और प्राणायाम के परिणाम को सारे विश्व के सामने साबित कर दिया है .स्वामी रामदेव जी ने इस काम को इतनी कुशलता से किया है की आने वाला समय उनके इस योगदान को जीवन शैली के रूप में अपनाने को प्रस्तुत होगा और स्वयं रामदेव जी को भारत के सर्वाधिक प्रतिभाशाली संत और महापुरुष के रूप मै सदैव याद करेगा .
भारत में ज्योतिष को चिकित्सा शास्त्र का प्रारम्भिक हिस्सा माना  जाता रहा है पर आज के समय में ज्योतिशों और आयुर्वेदाचार्यों का  समन्वय नहीं हो पाने के कारण इस तथ्य को बिलकुल उपेक्षित कर दिया गया है . 
 मेरे क्लिनिक में मैंने ऐसे बहुत से मरीजों को लाभ  दिलाया है जो दवा के साथ ज्योतिष उपायों को  भी साथ में करने के लिए तैयार थे . मरीजों ने अपने साथ साथ अपने परिवार  के कई लोगों  की
पत्रिका दिखा कर उनके लिए भी समाधान लिया और उपायों को करके उनको भी लाभ दिलाया .
मेरे मरीज जो मेरे इस ज्ञान को जानते है वो मेरे ज्योतिष के जानकारी के जानकारी से बड़े प्रसन्न होते है क्योंकि उनको  मुझसे यह वेल्यु एडेड सर्विस मिल जाती है .
प्रक्टिस में लोगों को लाभ दिलाना ही तो मेरा काम है और जीवन में सकारात्मक परिवर्तन होते देखना बड़ा सुखद अनुभव है .
मेरी  एलोपेथी चिकित्सा शास्त्र के साथ साथ ज्योतिष शास्त्र के प्रति भी आस्था बढ़ गयी है .

2 फ़रवरी 2010

गुरुकृपा से साबर तंत्र सिद्धि


गुरुदेव से मार्गदर्शन में हम गुरुभाई साधना १० साल से कर रहे है .पहले साधना सौम्य प्रकृति की थी पर अब हम लोग साबर तंत्र की साधना कर रहे है ।
जनवरी के चन्द्र और सूर्य ग्रहण में हम लोगो को सिद्धि का बहुत अच्छा अवसर मिला और भैरवी माँ और गुरुकृपा से हमारी साधना सफल रही ।
साबर तंत्र से लोगो की समस्या का तात्कालिक हल दिलाने में हम लोग कामयाब हो रहे है .इसके परिणाम दिखने से हमारा उत्साह बढ़ गया है .हमारी सारी ऊर्जा अब साबर साधना की तरफ है ।
गृहस्थ लोगो के लिए अघोर साधना अनुकूल नहीं होती है .वैदिक साधना में रिजल्ट बहुत देर से आता है .तंत्र का जो आकर्षण चमत्कारिक रिजल्ट प्राप्त करने के लिए हमरे मन में बहुत दिनों से था । साबर तंत्र का रिजल्ट देखने से मन की वो अभिलाषा पूरी हुई ।
साबर में जिन शक्ति के माध्यम से काम  होता है वो शुभ शक्ति होती है .सभी शक्ति में गुरु की शक्ति सबसे बड़ी होती है .इस बात का प्रमाण साबर का रिजल्ट देखने के बाद और पुखता हुआ ।
अध्यात्म में ,साधना में , सदगुरु मिलने से ही काम  बनता है .
जय गुरु महाराज की जय