24 अगस्त 2009

पहली बार गुरु से मुलाकात


यार का संदेश इस कदर प्यारा था की कदम मेरे बहक गए ।




जब संदेसा आया तो तेरे दर् को हम निकल पड़े ।




प्यार की पहली दुश्वारियों की सौगात ने भी चाहत की उम्मीदों को ख़त्म नही किया था ।




भगवान श्री को पढने के बाद उम्मीदें और भी जायदा हो गई थी।




ताम्बू गिन्नी की मेहरबानी से आप के दरवाजे तक पहुच गए।




जब पहली बातें हुयी तो आपने कहा "जिस तरह तुम मुझसे बातें कर रहे हो उसी तरह मैंने उनसे बातें की है ।




उनका प्यार मुझे मिला है "




इस ख्याल ने मेरे दिल को तेरे और भी करीब ला दिया .