27 अगस्त 2009

गुरु ने दिया जीवन का समाधान


जब पहले दिन गुरुदेव से मुलाकात हुई तो मेरे मन का सबसे बड़ा प्रश्न था की मेरा कल्याण होगा की नही ? पर मेरे साथ आए हुये मित्र के जल्दीबाजी के कारण मै नही पूछ पाया। मुलाकात ख़त्म होने के बाद जब विदा लेने के लिए प्रणाम किया किया तो गुरुदेव ने स्वयं से ही कहा " आते जाते रहोगे तो हो जाएगा " उसके बाद हम विदा हो गए ।

सारी रात मुझको उनके व्यक्तित्व का आकर्षण खींचता रहा और उनका उत्तर मंत्रमुग्ध करता रहा ।

मुझे मेरे गुरुदेव ने स्वीकार कर लिया ।

मेरे जीवन का वसंत आ गया ।

मेरे खोज का ख़त्म हुई।

इश्क की आगाज़ हुआ ।

मै खींचता चला गया ।

मेरे प्रेमी ने मुझे पहले दिन से ही स्वीकार कर लिया ।

भगवान श्री रजनीश ने प्रवचन में कहा है "जब शिष्य तैयार होता है तो सदगुरु प्रकट हो जाते है "

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