29 अगस्त 2009

गुरुदेव की जीवनी -4

गुरुदेव स्वामी चिन्मय योगी  मनाली में 
शरत चंद्र की पत्नी का देहांत बच्चों के पैदा होने के बाद जल्दी ही हो गया । उनकी पत्नी की दूर की बहन ने माँ बनकर सभी बच्चों का लालन पोषण किया। उनकी पालन पोषण करने वाली माता का नाम श्रीमती पारुल बाला दासी था । सुधीर कुमार को घर में बाबू कहकर पुकारते थे । बाबू पर उनकी माताजी का विशेष स्नेह था । कसरत और अखाडे लगातार जाने के कारण बाबू की खुराक अधिक थी इस बात का उनकी माताजी ख्याल रखती थी।
रायपुर में सुधीर कुमार ने कई सांस्कृतिक संस्थाओं का निर्माण किया । बंगाली कालीबाड़ीसमिति बनाकर रायपुर में कलि दुर्गा पूजा प्रारम्भ की । नाटक इत्यादि के लिए संस्था बनाकर कई प्रकार के नाटक मंचित किए ।रायपुर में उन्होंने आखाडे की स्थापना की जहाँ युवा आकर शारीरिक शक्ति का विकास करते थे ।
देसभक्ति और समाज सेवा का व्रत जो क्रांतिकारियों की गुप्त समिति में लिया था उसका उन्होंने आजीवन पालन किया ।
१९४० में वो रास्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़ गए । आर एस एस के तत्कालीन प्रमुख श्री गुरूजी से सुधीर कुमार बोस जी की बहुत बढ़िया सम्बन्ध थे । रायपुर के संघ के कार्य में सुधीर कुमार जी समर्पित रूप से कार्य करते थे । श्री गुरूजी सुधीर कुमार बोस को प्रेम से बाबू कहते थे । सुधीर कुमार भी गुरूजी को प्रेम और आदर करते थे ।
सुधीर कुमार बोस समाज सेवा का व्रत लेने के कारण शादी नही करने की सोच चुके थे । परिवार ने जोर करके उनका सम्बन्ध श्रीमती उमा बोस से १९४० में कर दिया। उनके घर में दो संतान हुई ।

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