28 अगस्त 2009

गुरुदेव की जीवनी -3


शरत स्चंद्र बोस के द्वितीय पुत्र सुधीर कुमार बोस पढ़ाई और खेलकूद में प्रवीण बालक थे । रायपुर में प्रारंभिक शिक्षा के बाद उनको पिता जी ने कलकत्ता के मेडिकल कॉलेज में पढने के लिए भेजा । १९२२ में उनको हॉस्टल में मासिक खर्चे के लिए ५०० रुपये भेजा जाता था । सुधीर बोस अखाडे में नियमित वर्जिश करते थे । उनका शरीर आजीवन बहुत बलवान बना रहा । सुधीर कुमार बोस हॉकी के बेहतरीन गोल कीपर थे । हिन्दुस्तान की नेशनल हॉकी टीम में उनका सेलेक्शन टीम के कैप्टेन के पक्षपात के कारण नही हो पाया। कलकत्ता के कॉलेज में वो सारे हॉस्टल में साभी मित्रों को खूब खिलाया करते थे । सुधीर कुमार बोस जहाँ कठोर वर्जिश के बाद भी भूखा रहने की साधना करते थे वही वो अच्छे खाने के भी शौकीन थे ।

मेडिकल कॉलेज उन दिनों क्रांतिकारियों का केन्द्र था । देशभक्ति और स्वाभिमान से भरे नौजवान सुधीर जल्दी ही क्रांतिकारियों से जुड़ गए । क्रांतिकारियों की बहुत कठिन ट्रेनिंग उन्होंने पास कर के आजीवन देशभक्ति और भारतमाता की सेवा का व्रत लिया । जल्दी ही वो कॉलेज की पढ़ाई छोड़ कर रायपुर वापस आ गए । उनका काम रायपुर से बम बनने के लिए कच्चा माल आगे सप्लाई करना था । वो अन्य साथियो को भी स्वतंत्रता आन्दोलन में भाग लेने और भारतमाता की सेवा के लिए कहते थे ।

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